इंडियन फुटबॉल टीम के पूर्व कोच ने कहा कि उनकी वापसी की पूरी संभावनाएं हैं।

इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के आगामी सीजन से पहले इंडियन फुटबॉल टीम के पूर्व हेड कोच स्टीफन कांस्टेनटाइन ने इंडिया में वापसी के संकेत दिए हैं। वह किसी भी टॉप फुटबॉल क्लब के साथ भारत वापस आना चाहते हैं।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को दिए हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनकी भारत वापसी की पूरी संभावनाए हैं। हालांकि, वह इस वक्त साइप्रस में हैं।

स्टीफन कांस्टेनटाइन ने कहा, “मैं छह साल घर से दूर रहा था और मुझे फैमिली के साथ टाइम बिताने की जरुरत थी। जबसे मैंने इंडियन टीम को छोड़ा तबसे मुझे कई भारतीय क्लबों के ऑफर आए लेकिन इस्तीफा देने के तुरंत बाद मैं कोचिंग नहीं करना चाहता था। हालांकि, क्लब फुटबॉल के डे टू डे रुटीन को मैंने हमेशा मिस किया। क्लब फुटबॉल में होने का फायदा ये है कि मैं प्लेयर्स और कोच को ज्यादा से ज्यादा गाइडेंस दे सकता हूं। भारत मेरे लिए काफी अच्छा रहा है और मेरी वापसी की संभावनाएं हमेशा हैं।”

आईएसएल के अगले सीजन के लिए चेन्नईयन एफसी और नॉर्थईस्ट यूनाईटेड के अलावा लगभग सभी टीमों ने अपने कोच का ऐलान कर दिया है। हालांकि, ये दोनों टीमें अभी भी अपने नए कोच की तलाश में हैं।

स्टीफन कांस्टेनटाइन का मानना है कि उनके पास इन दो क्लबों में से किसी एक के साथ जुड़कर वापसी का मौका है। उन्होंने कहा कि इंडियन कंडीशंस और प्लेयर्स को वो अच्छी तरह जानते हैं और इस वजह से उन्हें ये रोल मिलने में आसानी होगी।

उन्होंने कहा, “जब मैंने पहली पार भारतीय टीम की कमान संभाली थी, तब हम फीफा रैंकिंग में 176वें स्थान पर थे। लेकिन मेरे पास युवा इंडियन प्लेयर्स को डेवलप करने का प्लान था। जब मैंने छोड़ा तो 49 प्लेयर अपना इंटरनेशनल डेब्यू कर चुके थे और टीम एएफसी एशियन कप के लिए क्वालीफाई कर चुकी थी। हमने इसके अलावा तीन इंटरनेशनल टूर्नामेंट भी जीते। हमारी अंडर-23 टीम रनरअप रही और 14 मैचों तक लगातार हारी नहीं थी।”

“मैं आईएसएल में सिर्फ इसलिए नहीं आऊंगा कि वो मुझे ज्यादा पैसे दे रहे हैं। मैं उस क्लब के साथ जुड़ना चाहता हूं जिसके पास एक खास प्लान हो और वो एएफसी चैंपियंस लीग के लिए क्वालीफाई करना चाहते हों।

स्टीफन ने इसके अलावा इंडियन फुटबॉल में 3+1 विदेशी खिलाड़ियों के नियम पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, “मैंने 3+1 नियम की हमेशा मांग की है । नेशनल टीम एशियन कप में लगातार कैसे बेहतर खेल सकती है, अगर पर्याप्त भारतीय खिलाड़ी रेगुलर अपने क्लब के लिए नहीं खेलेंगे। आईएसएल भले ही अब टॉप लीग है लेकिन हमें आई लीग के कंट्रीब्यूशन को नहीं भूलना चाहिए।”