इंडियन टीम के पूर्व हेड कोच ने कहा कि अब वो किसी क्लब के साथ काम करना ज्यादा पसंद करेंगे।

स्टीफन कांस्टेनटाइन की ऑटोबायोग्रफी से पता चलता है कि वो दुनियाभर में सबसे ज्यादा ट्रैवल करने वाले फुटबॉल कोच हैं। 57 वर्षीय कोच ने अभी तक नेपाल, इंग्लैंड, मालावी, सुडान, साइप्रस, ग्रीस और रवांडा के अलावा सात साल भारत में भी बिताए हैं।

उन्होंने जब मैनेजर के रूप में अपना करियर स्टार्ट किया तब से लेकर अब तक शायद ही उन्होंने कभी ब्रेक लिया हो। 2019 में इंडियन फुटबॉल टीम के हेड कोच के पद से इस्तीफा देने के बाद वो नए जॉब की तलाश में हैं।

खेल नाओ के ‘बियोंड द स्कोर’ पॉडकास्ट के लेटेस्ट एपिसोड में उन्होंने इंडियन फुटबॉल समेत कई मुद्दों पर बात की। स्टीफन कांस्टेनटाइन ने कहा कि कोच के तौर पर अब वो किसी नेशनल टीम से ज्यादा एक क्लब को प्राथमिकता देंगे।

स्टीफन कांस्टेनटाइन ने कहा, “मैं एक क्लब का कोच बनना पसंद करुंगा। पिछले हफ्ते मुझे गुइनिया से ऑफर आया था जो कि वेस्ट अफ्रीका में है लेकिन मेरी प्राथमिकता अब एक क्लब है। हालांकि, अगर कोई अच्छी नेशनल टीम मिली तो मैं ना नहीं कहुंगा। मैं उस टीम का कोच नहीं बनना चाहता जिसके पास कोई लक्ष्य ना हो। अभी भी मेरा करियर काफी बचा हुआ है, इसलिए सिर्फ किसी टीम का कोच बनकर केवल पैसे कमाना मेरा टार्गेट नहीं है, बल्कि मैं टीम को और बेहतर बनाने की कोशिश करता हूं।”

उन्होंने ये भी कहा कि उनकी कोचिंग दौरान इंडियन टीम ने जितनी भी उपलब्धियां हासिल की थी उसको ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई।

स्टीफन कांस्टेनटाइन ने कहा, “मेरे हिसाब से हमने जो इंडिया में बेहतरीन काम किया उसकी लोगों ने तारीफ नहीं की। ईमानदारी से कहूं तो इंडिया में फुटबॉल को लेकर हम कुछ भी करें ज्यादातर लोगों को फर्क ही नहीं पड़ता है। हम फीफा रैंकिंग में 176वें पायदान पर थे लेकिन मेरी कोचिंग में टीम 96वें पायदान तक आ गई (वास्तव में 97)। एशियन कप के लिए भी टीम ने क्वालीफाई किया।”

“भारतीय फुटबॉल के इतिहास की सबसे युवा टीम को हमने एक बड़े फाइनल में पहुंचाया। एशियन कप में हमने थाइलैंड को बुरी तरह हरा दिया। इसके अलावा जब कार्लोस क्विरोज से यूएई में ईरान टीम के बार में बात की गई तो उन्होंने भारतीय टीम के बारे में बोलना शुरु कर दिया। वो ना केवल मेरे बल्कि इंडियन फुटबॉल और प्लेयर्स के लिए भी काफी बड़ी चीज थी।”

पिछले महीने स्टीफन कांस्टेनटाइन ने इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में कोच बनने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था कि वो आईएसएल की किसी टीम का कोच बनना जरुर पसंद करेंगे। जब इस बारे में उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा, “ये मेरे लिए सही समय है। हालांकि, मैं किसी एक खास क्लब का नाम नहीं लेना चाहूंगा लेकिन मैं इंडिया वापस आने के लिए तैयार हूं। मेरे हिसाब से मैं एक क्लब के लिए काफी सारी चीजें कर सकता हूं। अब ये उन टीमों के ऊपर है कि वो मेरे साथ काम करना चाहती हैं या नहीं।”

उनके मुताबिक किसी भी टीम की जिम्मेदारी लेने से पहले उसका एक रोडमैप होना जरुरी है। उन्होंने कहा कि जब आधे सीजन में किसी टीम की जिम्मेदारी मिलती है तो सबसे पहले जरुरी ये हो जाता है कि उस टीम के अंदर एक जबरदस्त जोश और जज्बा पैदा किया जाए।

कांस्टेनटाइन से ये भी पूछा गया कि क्या अभी तक भारत से उन्हें कोई ऑफर मिला है या नहीं। इस पर उन्होंने बताया कि उन्हें इंडियन फुटबॉल टीम की कोचिंग छोड़ने के बाद से तीन ऑफर आ चुके हैं। हालांकि, उन्होंने टीमों के नामों का खुलासा नहीं किया।