ओडिशा एफसी के नए हेड कोच ने जापान में अपने अनुभव के बारे में बताया।

​ओडिशा एफसी के कोच स्टुअर्ट बैक्स्टर दुनिया भर में ट्रैवल कर चुके हैं और कई टीमों के कोच रह चुके हैं। वो अपने देश इंग्लैंड में भी कोचिंग कर चुके हैं और दुनिया के अलग – अलग देशों खासकर एशिया और अफ्रीका में भी उन्हें अच्छा खासा अनुभव है। बैक्स्टर ने जापान में काफी काम किया है और उनकी फुटबॉल से वो काफी ज्यादा प्रभावित हैं।

अपने जबरदस्त अनुभव की वजह से वो ओडिशा एफसी की टीम को कुछ अलग प्रदान करेंगे। इसके अलावा ओडिशा की टीम उनसे ये भी सीख सकती है कि सही दिशा में कैसे कदम आगे बढ़ाया जाए। स्टुअर्ट बैक्स्टर बेहतरीन तरीके से बता सकते हैं कि इंडियन फुटबॉल को कैसे डेवलप किया जाए।

खेल नाओ के ‘बियोंड द स्कोर्स’ पॉडकास्ट में स्टुअर्ट बैक्स्टर ने बताया कि वो क्या-क्या चीजें हैं जिसे इंडियन फुटबॉल को जापान से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा, “मेरे हिसाब से कई सारी चीजे हैं जो जापान की फुटबॉल से सीखी जा सकती हैं। मैं ये नहीं कह रहा कि केवल इंडियन फुटबॉल ही उनसे सीख सकता है, बल्कि इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों के खिलाड़ी भी जापान से काफी कुछ सीख सकते हैं।”

उन्होंने जापान फुटबॉल की खूबियों के बारे में बताया, “उनके यहां जमीनी स्तर पर काफी काम होता है। वहां ट्रेनिंग सुविधाओं से लेकर विदेशी कोच तक काफी ज्यादा ध्यान दिया जाता है। जापान में कई सारी पिचे हैं जहां काफी सारी सुविधाएं हैं। इन पिचों पर कोच एजुकेशन और प्लेयर डेवलपमेंट की सारी चीजें उपलब्ध हैं। वहां हर समय इस चीज पर चर्चा की जाती है कि कितने विदेशी हमारे पास हैं और उन पर कितना पैसा खर्च किया जा सकता है।”

स्टुअर्ट बैक्स्टर के मुताबिक जापान में स्टेडियम का निर्माण भी काफी शानदार तरीके से किया गया है। इन स्टेडियम में फैंस को मैच देखने में काफी मजा आता है और इंडियन फुटबॉल को भी ऐसा ही करना चाहिए। उन्होंने कहा, “बेहतरीन ट्रेनिंग फैसेलिटी के अलावा वहां पर स्टेडियम भी काफी जबरदस्त हैं। सपोटर जब वहां पर मैच देखने आते हैं तो उन्हें एक अलग तरह का अनुभव मिलता है। जे-लीग एक शानदार प्रोडक्ट बन गया है और उनके पास अपनी फुटबॉल को डेवलप करने का अच्छा प्लान भी है। इसलिए मेरे हिसाब से ये सारी चीजें इंडियन फुटबॉल में भी की जा सकती हैं।”

ओडिशा एफसी के कोच के मुताबिक युवा खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा मौके वहां पर मिलते हैं। रिजर्व टीम में उन्हें रखा जाता है और उसके बाद वो सीनियर टीम के लिए बेहतरीन तरीके से डेवलप हो जाते हैं। उन्होंने कहा, “युवा प्लेयर्स को भी जापान की लीग में काफी बेहतरीन ढंग से तैयार किया जाता है। रिजर्व टीम में कई सारे युवा खिलाड़ी होते हैं और वहां से मैच्योर होकर वो सीनियर टीम में जाते हैं। उम्मीद है कि वो सारी चीजें हम लोग भी सीखेंगे। इनमें से कुछ चीजें इंडियन फुटबॉल में लागू की जा सकती हैं तो कुछ चीजें यहां के लिए नहीं हैं। वहां और यहां की चीजों को मिक्स करके इंडियन फुटबॉल को डेवलप करने का फॉमूर्ला तैयार किया जा सकता है।”

स्टुअर्ट बैक्स्टर ने जो चीजें बताई हैं उनमें से कई सारी चीजों में सुधार इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) की वजह से हो चुका है। इंडिया में ना केवल ट्रेनिंग फैसेलिटी और स्टेडियम बेहतर हुए हैं बल्कि ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा ज्यादा से ज्यादा कोच एजुकेशन प्रोग्राम भी चलाए जा रहे हैं।