सुनील छेत्री के अलावा कोई भी फॉरवर्ड खिलाड़ी टीम के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया है।

इंडियन फुटबॉल टीम लंबे समय से फॉरवर्ड प्लेयर्स की कमी की समस्या से जूझ रही है। कैप्टन फैनटास्टिक सुनील छेत्री के अलावा कोई भी खिलाड़ी नेशनल टीम की फॉरवर्ड लाइन में अपनी जगह पक्की करने में सफल नहीं हो पाया है और बाईचुंग भूटिया ने भी इस पर चिंता जताई है।

सुनील छेत्री फिलहाल, टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन कुछ समय बाद वह रिटायर जरूर होंगे और बाईचुंग भूटिया का मानना है कि तब टीम इंडिया को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

इंडियन फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान ने आईएनएस से कहा, “यह बड़ी चिंता है क्योंकि छेत्री के बाद कोई नहीं है। यह कहना काफी मुश्किल है कि इंडिया में स्ट्राइकर अपना रास्ता क्यों भटक रहे हैं। मुझे लगता है कि निरंतरता काफी जरूरी है। जेजे को काफी चोटें लगी और अब उनकी उम्र (29) भी उनके पक्ष में नहीं है। जेजे ने हालांकि, अच्छा काम किया है। मुझे लगता है कि चोट मुख्य कारण है। बलवंत को भी चोट के कारण काफी कुछ झेलना पड़ा।”

“मैं यही कह रहा हूं कि वह चोट के कारण खेल नहीं पाए। लेकिन फिर भी यह कहना काफी मुश्किल है कि वह कहां अपने रास्ते से भटक गए। मुझे लगता है कि निरंतरता काफी जरूरी है।”

बाईचुंग भूटिया का यह भी मानना है कि टीम की इस समस्या को सुलझाने के लिए अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, “एआईएफएफ ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। क्लब वेतन दे रहे हैं और वह ट्रॉफियां जीतना चाहते हैं और चाहते हैं कि खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करें। चूंकि क्लब वेतन दे रहे हैं तो एआईएफएफ उनसे यह नहीं कह सकती कि आप इस खिलाड़ी को मौका दें और उसे न दें। वह यह तब तक नहीं कह सकती जब तक वह वेतन न दे।”

अपने समय के दमदार स्ट्राइकर रह चुके बाईचुंगा भूटिया के अनुसार ग्रासरूट लेवल पर एक प्रोग्राम चलाकर इस समस्या को सुलझाया जा सकता है और इससे नेशनल टीम और क्लब सभी के फायदा होगा।

उन्होंने कहा, “निश्चित तौर पर मुझे लगता है कि स्ट्राइकरों की कमी एक समस्या है। यह क्लब पर निर्भर करता है कि वे कैसे कदम उठाते हैं क्योंकि हर कोई इसी समस्या से जूझ रहा है। हां, छेत्री के बाद खिलाड़ियों की कमी खलेगी। यह बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि छेत्री के बाद कोई नहीं है। हमें जमीनी स्तर पर स्ट्राइकरों की कमी पर काम करना होगा।”