अगर क्लब जवाब नहीं देता है तो मामले को प्लेयर स्टेटस कमेटी के पास भेजा जा सकता है।

आई-लीग का पिछला सीजन कोरोना वायरस के कारण पूरा नहीं हो पाया। कई मैच खेले नहीं गए और रद्द कर दिए गए। कुछ आई-लीग क्लबों ने आपात स्थिति का हवाला देते हुए फोर्स मैजर क्लाज जारी किया जिसके कारण खिलाड़ियों के कॉनट्रैक्ट खत्म हो गए। क्लॉज एक्टिवेट किए जाने के बाद से खिलाड़ियों को सैलरी भी नहीं दी गई। ईस्ट बंगाल भी इन क्लबों में से एक हैं जिसने 25 अप्रैल को क्लॉज एक्टिवेट किया जो एक मई से लागू हुआ।

हालांकि क्लब के कई खिलाड़ी इसके पक्ष में नहीं थे और लगभग पांच खिलाड़ी अपने बकाया वेतन के लिए क्लब के पूर्व इन्वेस्टर के खिलाफ प्लेयर स्टेटस कमेटी (पीएससी) गए थे। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) ने क्लब से इस पर सफाई मांगी है और चार सिंतबर तक खिलाड़ियों की परेशानियों को खत्म करने को कहा है। चार सिंतबर के बाद यह मामला पीएससी के सामने रखा जाएगा।

ईस्ट बंगाल के पूर्व इन्वेस्टर क्वेस कॉर्प ने 17 जुलाई को क्लब के साथ सारे करार खत्म कर दिए थे और उसके स्पोर्टिंग राइट वापस कर दिए थे। वे खिलाड़ी जिनका क्लब के साथ कई साल का करार था और वेतन बकाया था उन्होंने क्वेस कॉर्प को नोटिस भेजा था लेकिन क्वेस कॉर्प ने जवाब में कहा था कि अब उनका इस क्लब से कोई लेना देना नहीं है। इस तरह खिलाड़ियों के पास कोई मौजूदा करार नहीं है और न ही अपने बचे हुए वेतन को लेकर कोई स्पष्टता।

मामले से संबंध रखने वाले एक सोर्स ने नाम न छापने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, “एआईएफएफ ने ईस्ट बंगाल को पत्र भेजा है और खिलाड़ियों की वेतन न मिलने की मांग पर प्रतिक्रिया मांगी है। उन्हें चार सितंबर का समय दिया गया है इसके बाद मामला पीएससी के पास पहुंचेगा।”

उन्होंने कहा, “आमतौर पर पीएससी, दोनों पार्टियों के दावों को सुनती है, लेकिन इस मामले में अगर ईस्ट बंगाल चार सितंबर तक प्रतिक्रिया नहीं देती है तो सिर्फ खिलाड़ियों की मांगें मानी जाएगी। अगर ईस्ट बंगाल जवाब देती है तो और ज्यादा समय मांगती है तो चार सितंबर के बाद से एक और सप्ताह का समय उन्हें दिया जाएगा।”

इस समय ईस्ट बंगाल बिना निवेशक के संघर्ष कर रही है और क्लब की हालत अच्छी नहीं है।