कैप्टन फैनटास्टिक का अभी रुकने का कोई इरादा नहीं है।

फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर मुकाबले में हाल में भारत ने बांग्लादेश को 2-0 से करारी शिकस्त दी और टीम अपने ग्रुप में तीसरे पायदान पर पहुंच गई है। इस मैच के हीरो रहे कप्तान सुनील छेत्री, जिन्होंने 10 मिनट के अंतराल में दो बेहतरीन गोल दागे।

इस शानदार जीत के बात कप्तान ने कई पहलुओं को लेकर बातचीत की। सुनील छेत्री ने कहा, “बांग्लादेश के खिलाफ कुछ मौकों पर फाइनल थर्ड ने जल्दबाजी दिखाई और हम आने वाले और मुकाबलों से काफी कुछ सीखेंगे। खिलाड़ी अब तैयार हैं, उनमें भूख है और वो कड़ी मेहनत कर रहे हैं।”

पिछले मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम आने वाले मुकाबले में अफगानिस्तान के खिलाफ भी जीत के इरादे से ही मैदान में उतरेगी। कप्तान का कहना है, “हम अगर आखिरी मुकाबले में अफगानिस्तान के खिलाफ जीत भी जाते हैं, तो भी मुझे नहीं लगता कि हम इस कैंपेन को सफल मानेंगे। मैं पिछले उन मुकाबलों को भी देखता हूं, जिनमें बांग्लादेशऔर अफगानिस्तान के खिलाफ हमने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। हम कभी अच्छा तो कभी बुरा खेल दिखाते हैं, जोकि सबसे ज्यादा चिंतित करता है। हमें एक ही लेवल पर अपना प्रदर्शन बरकरार रखना होगा।”

हालांकि कप्तान का प्रदर्शन इस कैंपेन में बेहतरीन ही रहा है। बांग्लादेश के खिलाफ भी उन्होंने दो बेहतरीन गोल दागते हुए टीम को जीत दिलाई और खुद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत में सबसे ज्यादा गोल मारने वाले एक्टिव खिलाड़ियों की लिस्ट में मेसी को पीछे छोड़ते हुए दूसरे नंबर पर पहुंच गए। सुनील छेत्री की इस उपलब्धि के बाद एक बार फिर उनकी तुलना मेसी से की जाने लगी है। हालांकि उन्होंने बड़े ही सरल भाव से इस बहस का अंत करते हुए कहा कि मेसी महान फुटबॉलर हैं और उनकी तुलना नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, “मैं इस तुलना से नाराज नहीं हूं। दरअसल इसका मुझपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है क्योंकि लोगों के अपने-अपने विचार होते हैं और आज के समय में उनके पास अपने विचार साझा करने और उनपर चर्चा करने के लिए प्लेटफॉर्म्स भी मौजूद हैं। हजारों फुटबॉलर्स मुझसे बेहतर हैं और वो सभी मेसी के फैन हैं। मुझे गर्व इस बात का है कि मैंने अपने देश के लिए 100 से ज्यादा मैच खेले हैं और टीम के लिए 74 गोल किए हैं। मैं एक भारतीय खिलाड़ी के तौर पर अपने आखिरी लम्हे तक कड़ी मेहनत करता रहूंगा।”

34 साल के होने के बावजूद भी इंडियन कैप्टन के खेल में कहीं भी उम्र का असर दिखाई नहीं देता है। इसपर उनका कहना है, “वैज्ञानिकों के मुताबिक जितनी आपकी उम्र बढ़ती है, उतना आपका मेटाबोलिज्म धीमा होता है। यानि कि ये गलत नहीं है कि उम्र के साथ खिलाड़ी भी कमजोर होता है। इसी बीच, निजी तौर पर मुझे लगता है कि 36 साल की उम्र में भी मैं अपना बेहतर खयाल रख सकता हूं क्योकि उम्र के साथ आपका ज्ञान भी बढ़ता है और आपको पता चलता है कि आपके लिए क्या अच्छा है। हां लेकिन इकलौता नुकसान बढ़ती उम्र के साथ जो होता है वो है मोटिवेशन का कम होना। उम्र के साथ जितना आप हासिल करते हो, उतना ही आपके लक्ष्य कम होते जाते हैं।”

“मैं फुटबॉल को इंजॉय कर रहा हूं। जब तक मेरे अंदर भूख और जिद बरकरार रहेगी, मैं इसे इंजॉय करता रहूंगा। जिस दिन मेरी भूख और जिद मिट गई, तब मैं फुटबॉल छोड़ दूंगा।”

छेत्री ने बताया कि टीम के हेड कोच इगोर स्टीमाक बॉल को ज्यादा से ज्यादा अपने पास रखते हुए आगे बढ़ने और पासेस को बढ़ाते हुए अटैक करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा, “मैं खुद से और लड़कों से कहता हूं कि तैयार रहें और मैदान पर अपना सौ प्रतिशत दें और इसके बाद जो भी नतीजा हो उसका सम्मान करें। आपको व्यक्तिगत तौर पर गेंद के साथ परफॉर्म करने का मौका भले ही ज्यादा न मिले, लेकिन टीम के तौर पर एक साथ आकर आप अच्छा कर सकते हैं। विरोधियों को लगना चाहिए कि हम एक टीम के तौर पर लड़ सकते हैं, डिफेंड कर सकते हैं और ये हमारा पहला कदम होगा। इसके बाद आगे का सफर होगा।”