लीग में कई खिलाड़ियों ने अपने खेल से ये साबित किया है कि वो इंटरनेशनल लेवल पर खेलने लायक हैं।

पिछले कुछ वर्षों से इंडियन फुटबॉल टीम के हेड कोच ज्यातातर आई-लीग को नजरअंदाज करते हुए दिखे हैं। कई सीजन्स में बहुत सारे खिलाड़ियों ने अपनी शानदार प्रतिभा का प्रदर्शन किया है, फिर भी वो ब्लू टाइगर्स के लिए नहीं चुने गए। हालांकि आई-लीग के कई खिलाड़ियों के लिए ये सीजन काफी अच्छा रहा है। उनके प्रदर्शन को देखकर उन्हें भारतीय जर्सी पहनने का एक मौका दिया जाना चाहिए।

हाल ही में खत्म होने वाले आई-लीग के इस सीजन के ऐसे ही पांच शानदार खिलाड़ियों से हम आपको रूबरू करा रहे हैं, जो शायद जल्द नेशनल टीम में भी जगह बना सकते हैं।

सेबस्टियन टी (गोकुलम केरला)

गोकुलम केरला के सबसे कंसिस्टेंट खिलाड़ियों में एक सेबस्टियन के लिए ये सीजन काफी शानदार रहा। पुणे एफसी एकेडमी से निकला ये खिलाड़ी अपनी कड़ी मेहनत और तेजी के लिए पहचाना जाता है। आक्रामक मानसिकता वाले सेबस्टियन डिफेंसिव खेल के साथ अच्छा बैलेंस भी करते हैं। उनकी बिजली सी तेजी उन्हें फॉरवर्ड खिलाड़ियों को चकमा देने में मदद देती है और वो गोकुलम के डिफेंस की मजबूत दीवार बन जाते हैं।

मणिपुर से आने वाले 22 साल के इस फुल बैक खिलाड़ी के साथ ओडिशा एफसी ने इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के लिए दो साल का करार कर लिया है। सेबस्टियन की सबसे बड़ी ताकत है उनकी आक्रामक मानसिकता और दोनों फ्लैंक पर खेलने की उनकी क्षमता। कई सारे फुल बैक खिलाड़ी ऐसे हैं, जिनमें दोनों फ्लैंक पर खेलने की काबिलियत नहीं होती है। थोड़ा और तराशे जाने पर मणिपुर का ये युवा फुटबॉलर भारतीय टीम में जल्द जगह बना सकता है।

दीपक देवरानी (गोकुलम केरला)

गोकुलम को आई-लीग चैंपियन बनाने में दीपक देवरानी की काफी अहम भूमिका रही है। इस सीजन में उन्होंने नेतृत्व करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी किया और कई अलग-अलग पोजिशन पर खेलते हुए दिखे। देवरानी राइट बैक के स्लॉट में भी फिट बैठते हैं और इस सीजन में उन्होंने टीम का पूरा डायनामिक्स ही बदल दिया था। उनके कारण टीम की बैक लाइन और भी मजबूत हो गई।

वो पहले ही मोहन बगान के साथ टाइटल जीत चुके हैं और मिनेरवा पंजाब के ऐतिहासिक सीजन में भी वो उनके साथ थे। इस अनुभव का उन्होंने भरपूर इस्तेमाल किया और लीग के कठिन मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया। ये उनका तीसरा लीग टाइटल है। उनकी मानसिकता और स्किल्स के बूते वो जल्द नेशनल टीम में नीली जर्सी पहने दिख सकते हैं।

एमिल बेनी (गोकुलम केरल)

वायनाड के विंगर एमिल बेनी का गोकुलम को उनका पहला आई-लीग टाइटल जिताने में काफी खास रोल रहा और तभी से वो भारतीय फुटबॉल जगत में चर्चा का विषय बन गए हैं। ट्राउ एफसी के खिलाफ मुकाबले में वो मेन ऑफ द मैच रहे थे। भले ही बेनी अभी नए और कम अनुभवी हों, लेकिन उनके अंदर फाइनल थर्ड में शामिल हो कर विरोधी टीम को कड़ी टक्कर देने की पूरी क्षमता साफ दिखाई देती है।

19 साल का ये खिलाड़ी जिस तेजी के साथ ड्रिबल करता है उससे विरोधी खिलाड़ी तो चकमा खाते ही हैं, साथ ही गोल की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। इस खिलाड़ी का भारतीय फुटबॉल में अच्छा भविष्य नजर आता है। अगर वो खुद पर काम करना जारी रखते हैं तो वो जाहिर तौर पर उन खिलाड़ियों में रहेंगे, जो भारतीय टीम में जगह बना सकते हैं।

बिद्यासागर सिंह (ट्राउ एफसी)

बिद्यासागर आई-लीग में सबसे बेहतरीन भारतीय खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने इस सीजन में गोल दागने की अपनी भूख के चलते कई रिकॉर्ड्स तोड़े और अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया। उन्हें ईस्ट बंगाल के साथ खेलते हुए ज्यादा गेम टाइम नहीं मिला था। बाद में जब ईस्ट बंगाल ने आईएसएल जॉइन किया तो मणिपुर का ये खिलाड़ी ट्राउ एफसी में लौट आया। 23 साल के इस खिलाड़ी ने सीजन में बाकी खिलाड़ियों से शानदार तालमेल भी बैठाया।

उनकी सबसे खास ताकत है उनकी तेजी। इसके चलते वो कई बार विरोधियों की बैकलाइन को चकमा देने में कामयाब रहते हैं। इस सीजन में उन्होंने अपनी फिनिशिंग पर भी काम किया और सीजन में कई टॉप विदेशी स्ट्राइकर्स को चकमा देते हुए टॉप गोल स्कोरर भी बने। ऐसे में जाहिर है कि इगोर स्टेमेक का ध्यान जरूर बिद्यासागर पर गया होगा, जो कि नेशनल टीम में आकर टीम को और मजबूती प्रदान कर सकते हैं।

के फाल्गुनी सिंह (ट्राउ एफसी)

ट्राउ एफसी के मिडफिल्डर फाल्गुनी सिंह का ये सीजन काफी बेहतरीन रहा। रेड पायथन्स का 26 साल का ये मिडफिल्डर गेंद के साथ काफी संभला हुआ दिखा और उन्होंने कई बेहतरीन पास भी सीजन के दौरान किए। ट्राउ इस सीजन में क्विक ट्रांजिशन पर निर्भर थे, ऐसे में उन्हें कोई ऐसा शख्स चाहिए था जो कि पोजेशन अपने पास रख सके और शानदार पास दे सके। फाल्गुनी में ये सारी प्रतिभाएं थीं। एक मिडफिल्डर के तौर पर उन्होंने अपने ऊपर काफी काम किया है, जिसके चलते इसबार वो मिडफिल्डर ऑफ द सीजन भी रहे।

फाल्गुनी वो खिलाड़ी थे, जिन्होंने ट्राउ एफसी के लिए पूरे खेल को संभाले रखा। उन्होंने कई अटैक्स बिल्ड अप किए। वो आईएसएल की किसी भी टीम के लिए एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी साबित हो सकते हैं और थोड़ा और अनुभव मिलने पर वो भारतीय टीम में भी जगह बना सकते हैं। खेल को अपने हिसाब से संभालने, पास लेने और पोशेशन वापस लेने की काबिलियत उन्हें और भी खतरनाक खिलाड़ी बना देती है।