ब्लू टाइगर्स के कोच ने भारतीय टीम को लेकर कई अहम बातें कहीं।

कोरोना वायरस का प्रभाव पूरे विश्व में पड़ा है और फुटबॉल को लंबे समय तक रोका दिया गया है। इंडियन फुटबॉल टीम को मार्च में कतर के खिलाफ 2022 वर्ल्डकप क्वॉलीफायर मुकाबला खेलना था, लेकिन कोरोना के कारण वह मैच अनिश्चित समय के लिए स्थगित हो चुका है। इंडियन फुटबॉल टीम के कोच इगोर स्टीमाक ने वियोन के साथ बातचीत के दौरान इंडियन टीम को लेकर कई बाते कही हैं।

उन्होंने कहा, “मैं मजाक कर रहा था कि यदि किसी को भी कोरोना से फायदा होगा तो वह इंडियन फुटबॉल टीम होगी क्योंकि हम लंबे ब्रेक लेने के आदी हैं। हर साल हमारे पास 6-7 महीनों का ब्रेक होता है तो हमें इससे नुकसान नहीं होने वाला है क्योंकि खिलाड़ी इसके आदी हैं।”

इगोर स्टीमाक के अंडर इंडियन टीम में काफी सुधार देखने को मिला है और टीम ने पोजेसन बेस्ड गेम खेलने की कोशिश की है। कोच कई युवा खिलाड़ियों को टीम में लेकर आए हैं और उन्हें टीम में अपनी जगह पक्की करने का मौका दिया है।

टीम के बारे में उन्होंने कहा, “हम एक नई टीम बना रहे हैं जो अगले 4-5 सालों में अपने हाई लेवल पर पहुंचेगी। हमारे पास 18-23 साल की उम्र के बीच के करीब 25 प्लेयर्स हैं। मैं रिजल्ट के हिसाब से खुश नहीं हूं क्योंकि क्वॉलीफाई करने के लिए हमें और प्वाइंट्स की जरूरत थी। मैंने सोचा था कि हम ओमान को चौंका सकते थे, लेकिन अनुभव की कमी और फील्ड पर कुछ करिश्माई निर्णय ने हमें नुकसान पहुंचाया। इंडिया आसान गेम हारने वाली टीम नहीं रही है, लेकिन हम जरूरी गोल नहीं दाग रहे हैं।”

इगोर स्टीमाक लगातार इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) और आई-लीग में 3+1 रूल लाने की बात कहते आए हैं। उनका कहना है कि ऐसा कहने से इंडियन प्लेयर्स को सुधारा जा सकेगा और हाई लेवल पर ज्यादा मौक पाकर उनकी प्रगति तेजी के साथ होगी।

उन्होंने कहा, “मैं यह कहते-कहते थक गया हूं कि हमें इंडिया की घरेलू लीग्स में विदेशी खिलाड़ियों की संख्या को कम करने की जरूरत है। फुटबॉल नेशन के रूप में ग्रो करने में समय लगेगा। प्लेयर्स को अभी के मुकाबले और ज्यादा मैच खेलने का मौका देने के लिए सीजन को और बड़ा करना होगा। यदि सरकार नागरिकता संबंधी नियम बदल दे तो हम 7-8 इंडियन ओरिजन के ऐसे प्लेयर्स को ला सकते हैं जो विदेशों में खेल रहे हैं।”

कोच को यह भी लगता है कि मैचों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए और लीग कम से कम मई तक चलनी चाहिए क्योंकि इससे खिलाड़ियों को तो फायदा मिलेगा ही और इसके अलावा नेशनल टीम का स्टैंडर्ड भी बढ़ेगा।

उन्होंने कहा, “आगे बढ़ते समय मैचों की संख्या काफी अहम चीज होगी। हम फरवरी खत्म होते ही अपनी सीजन नहीं खत्म कर सकते और हमें कम से कम मई तक इसे खेलना ही चाहिए। मुझे बताया गया है कि ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि इससे आईपीएल के ब्रॉडकास्ट से टकराव होगा, लेकिन ब्राडकास्ट जरूरी नहीं है। जरूरी यह है कि प्लेयर्स ज़्यादा मैच खेलकर अपनी फुटबॉल सुधारें और नेशनल टीम में क्वॉलिटी लेकर आएं।”

स्टीमाक ने यह भी बताया कि नेशनल टीम प्री-सीजन के लिए तुर्की और क्रोएशिया जाने के लिए तैयार थी। कोरोना वायरस के कारण इस प्लान को लागू नहीं किया जा सका। हालांकि, कोरोना ने प्लेयर्स पर इतना प्रभाव नहीं डाला है और वे अपने-अपने घरों में जरूरी चीजों के साथ लगातार ट्रेनिंग करके खुद को फिट रख रहे हैं।

कोच ने कहा, “महामारी ने हमारे उन प्लांस को बर्बाद दिया जो हमने बनाया था और इसे सरकार के साथ AIFF ने भी स्वाकार कर लिया था। हम अप्रैल और मई में तुर्की और क्रोएशिया में ट्रेनिंग कैंप के लिए जाने वाले थे और हम वहां 10 फ्रेंडली गेम भी खेलने वाले थे।