आगामी सीजन में लीग में देशी कोच को मौका मिल सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के आयोजकों ने अब क्लबों को इंडियन कोच को अपनी टीम का हेड कोच बनाने की मंजूरी दे दी है। लीग के शुरू होने के बाद से ही क्लबों को इंडियन हेड कोच रखने की छूट नहीं थी और ऐसे में उन्हें हमेशा विदेशी कोच को चुनना पड़ता था।

आयोजकों ने अब यह नियम बदलने का निर्णय लिया है और क्लबों को इंडियन हेड कोच रखने की अनुमति दे दी है। हालां​कि, कोच के पास ‘प्रो-लाइसेंस’ होना चाहिए। आईए नजर डालते हैं उन पांच इंडियन कोच पर जो आईएसएल क्लबों के हेड कोच बन सकते हैं:

5. संतोष कश्यप

एएफसी प्रो डिप्लोमा क्वॉलिफाइड फुटबॉल कोच संतोष फिलहाल, चेन्नइयन एफसी रिसर्वस और अकैडमी की देखरेख कर रहे हैं। एक ​प्लेयर के तौर पर वह इंडियन टीम के लिए खेल चुके है और अपने दमदार फ्री-किक के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने प्रोफेशनल कोचिंग करियर की शुरुआत महिंद्रा यूनाइटेड अंडर-19 टीम के साथ की और फिर आई-लीग में एयर इंडिया की बागडोर संभाली।

ज्यादा फंड न होने के बावजूद वह टीम को रेलिगेशन से बाहर लेकर गए। इसके बाद से वह कई क्लबों को मैनेज कर चुके हैं जिसमें मोहन बागान और सल्गाओकर जैसे नाम शामिल हैं। 2018 में वह आईजोल एफसी के कोच बने और 2019 में चेन्नइयन एफसी आए। अब यह देखना है कि क्या वह आईएसएल की किसी टीम के हेड कोच बन पाएंगे।

4. सैयद सबीर पाशा

पूर्व भारतीय​ खिलाड़ी पाशा 1991 से लेकर 2007 तक नेशनल फुटबॉल लीग में इंडियन बैंक के लिए खेले। रिटायर होने के बाद वह 2014 तक इंडियन बैंक के कोच रहे और जापान में कोर्स पूरा करने के बाद उन्हें एएफसी ए लाइसेंस मिला। उन्हें 2012 में तमिलनाडु का कोच बनाया गया और उनके मार्गदर्शन में टीम संतोष ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंची।

2014 में पाशा को एआईएफएफ एलीट अकैडमी को हेड कोच बनाया गया जो आई-लीग अंडर-19 में खेलती है। टीम ने दमदार प्रदर्शन किया और लगातार तीन टाइटल अपने नाम किए, पहले दो सीजन में तो टीम एक मैच तक नहीं हारी। पाशा फिलहाल, चेन्नइयन एफसी के असिस्टेंट कोच हैं और उनमें एक आईएसएल क्लब का हेड कोच बनने का माद्दा है।

3. खालिद जमील

कुवैत में जन्में खालिद ने 2001 में इंडियन फुटबॉल टीम के लिए कुछ मैच खेले। वह 2009 में फुटबॉल से रिटायर हुए और पहले की मुंबई एफसी के कोच बने जहां उनके काम की काफी तारीफ हुई। 2016 में आईजोल एफसी को हेड कोच बनने के बाद उनकी हर जगह तारीफ होने लगी।

आईजोल ने एक अंडरडॉग टीम होने के बावजूद 2016—17 सीजन में आई—लीग का खिताब जीतकर सबको चौंका दिया। अगले सीजन वह 1.25 करोड़ रुपये के साथ ईस्ट बंगाल में गए और अगले सीजन मोहन बागान के कोच बने। जमील को नॉर्थईस्ट यूनाइटेड का असिस्टेंट कोच बनाया गया और रॉबर्ट जार्नी के सैक होने के बाद वह क्लब के इंटरिम मैनेजर बने। जमील में वो आईएसएल क्लब इंटरेस्ट दिखा सकते हैं जो अटैकिंग स्टाइल वाले एक इंडियन कोच को टीम का हेड कोच बनाना पसंद करें।

2. थंगबोई सिंग्टो

सिंग्टो ने अपने कोचिंग करियर की शुरुआत 2009 में आई-लीग टीम शिलांग लाजोंग के साथ अपने काचिंग करियर की शुरुआत की। वह 2013 में क्लब के इंटरिम हेड कोच बनाए गए और 2017 तक क्लब में रहे। उन्होंने कई यंग प्लेयर्स को डेवलप किया।​ शिलांग से अलग होने के बाद वह आईएसएल क्लब केरला ब्लास्टर्स के असिस्टेंट कोच और यूथ डेवलपमेंट के डायरेक्टर बने।

2019-20 सीजन की शरुआत के समय में ओडिशा एफसी से एक असिस्टेंट कोच के रूप में जुड़े। सीजन के अंत में क्लब ने हेड कोच जोसप गोम्बाउ को सैक कर दिया और देखना यह है कि क्या वे सिंग्टो को अपने हेड कोच के रूप में चुनेंगें ।

1. डेरिक पेररा

परेरा 1984 से 1991 के बीच इंडियन नेशनल टीम का हिस्सा रहे और क्लब लेवल पर भी उनका करियर शानदार रहा। 1999 में क्लब करियर समाप्त करने के बाद उन्होंने सल्गाओकर की अं​डर-19 टीम के साथ अपने कोचिंग करियर की शुरुआत की।

वह कई क्लबों के साथ जुड़े और 2017 में एफसी गोवा के असिस्टेंट और यूथ डेवलपमेंट के हेड बने। एक साल बाद उन्हें क्लब का टेक्निकल डायरेक्टर भी बनाया गया। 2019 में उन्हें एएफसी इंडिया की अंडर-23 टीम की जिम्मेंदारी सौंपी गई। उनके अनुभव के कारण यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी टीम उनके अपने साथ जोड़ती है।