बीते हफ्ते भी टूर्नामेंट में कई बड़े डेवलपमेंट्स हुए।

​इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) 2020-21 के 12 हफ्ते पूरे हो गए हैं। मुंबई सिटी एफसी और हैदराबाद एफसी के बीच मुकाबले के साथ ही बीते सप्ताह का समापन हुआ। हैदराबाद के खिलाफ ड्रॉ खेलने के बावजूद मुंबई ने प्वॉइंट्स टेबल में अपना टॉप पोजिशन बरकरार रखा है।

वहीं ओडिशा एफसी को चेन्नईयन एफसी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा और इसी वजह से वो प्वॉइंट्स टेबल में अभी भी सबसे निचले पायदान पर है। बीते हफ्ते के मैचों के बाद प्वॉइंट्स टेबल में ज्यादा बदलाव नहीं आया। हालांकि, टीमों के अंदर कुछ डेवलपमेंट्स जरुर हुए। हम आपको इस आर्टिकल में 12वें हफ्ते में हुई प्रमुख चीजों के बारे में बताएंगे:

5. क्या नॉर्थईस्ट यूनाईटेड ने सही समय पर जेरार्ड नुस को कोच पद से हटाया है ?

बेंगलुरु एफसी के खिलाफ नॉर्थईस्ट यूनाईटेड का आईएसएल मुकाबला ड्रॉ रहा और इस सीजन ये लगातार छठी बार था जब नॉर्थईस्ट की टीम को ड्रॉ से संतोष करना पड़ा। इसके बाद कोच जेरार्ड नुस को उनके पद से हटा दिया गया। हाइलैंडर्स ने अपने सीजन की शुरुआत तो शानदार तरीके से की थी। उन्होंने मुंबई सिटी एफसी जैसी टीम को हराकर बड़ा उलटफेर किया था, लेकिन पिछले छह मुकाबलों से उन्हें एक भी मैच में जीत नहीं हासिल हुई। जेरार्ड नुस की कोचिंग में टीम को 11 में से तीन मैचों में हार का भी सामना करना पड़ा।

आईएसएल की प्वॉइंट्स टेबल अब काफी दिलचस्प हो गई है। नॉर्थईस्ट की टीम अभी पांचवे पायदान पर है और प्लेऑफ की रेस में है लेकिन यहां पर ये भी ध्यान देने वाली बात है कि चौथे पायदान पर मौजूद हैदराबाद एफसी और नौंवे स्थान पर काबिज एससी ईस्ट बंगाल के बीच सिर्फ पांच प्वॉइंट का फासला है।

जेरार्ड नुस नॉर्थईस्ट यूनाईटेड के साथ 2-3 महीने तक काम कर चुके थे और ऐसे में वो सुनिश्चित कर सकते थे कि टीम ये सीजन एक पॉजिटिव नोट पर खत्म करे। ऐसे में कई लोगों का ये भी मानना है कि क्या उनको इस समय कोच पद से हटाकर सही किया गया ? वो पूरी तरह से एक नई टीम को लीड कर रहे थे और ओवरआल अच्छा प्रदर्शन किया था। ऐसे में एक ऐसे युवा कोच को बाहर करना जिसने टीम के साथ प्री-सीजन में काम किया और जिसके आंकड़े भी ठीक-ठाक रहे, शायद नॉर्थईस्ट यूनाईटेड के लिए सही रणनीति नहीं है।

4. चेन्नईयन एफसी के लिए इस्माइल गोंकाल्वेस का जबरदस्त प्रदर्शन

ओडिशा एफसी के खिलाफ 13 जनवरी को हुए आईएसएल मुकाबले से पहले चेन्नईयन एफसी को छह में से सिर्फ एक मैच में जीत मिली थी। हालांकि ओडिशा के खिलाफ इस्माइल गोंकाल्वेस ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और टीम को जीत दिलाई।

पांचवे मिनट में इस्माइल गोल करने से चूक गए थे लेकिन उसके बाद उन्होंने ओडिशा की एक और गलती का फायदा उठाया और इस बार गोल करने में देरी नहीं की। इसके कुछ देर बाद बॉक्स के नजदीक अनिरुद्ध थापा के साथ उनका बेहतरीन तालमेल देखने को मिला और उन्होंने टीम के लिए पेनल्टी भी हासिल किया। इसे भी गोल में तब्दील कर उन्होंने टीम को बढ़त दिला दी।

इस्माइल गोंकाल्वेस इस आईएसएल सीजन इंजरी की वजह से हर गेम में वो औसतन 45 मिनट क्रीज पर रहे हैं। हालांकि, ओडिशा के खिलाफ मैच में उन्होंने आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व किया।

3. युआन फेरांडो के नेतृत्व में एफसी गोवा की बेहतरीन वापसी

आईएसएल के प्वॉइंट्स टेबल में तीसरे पायदान पर होने के बावजूद ऐसा लगता है कि एफसी गोवा की टीम अभी तक वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई जिसके लिए वो जाने जाते हैं। उन्होंने अपने लिए स्टैंडर्ड काफी ऊंचा सेट कर रखा है। दिसंबर में एटीके मोहन बगान और चेन्नईयन एफसी के खिलाफ मिली लगातार हार के बाद टीम का मोमेंटम जाता दिखा था।

चेन्नईयन एफसी के खिलाफ मिली हार के बाद एफसी गोवा के हेड कोच युआन फेरांडो काफी निराश दिखे। हालांकि उसके बाद गौर्स ने एक ड्रॉ और तीन जीत हासिल कर शानदार वापसी की, उन्होंने पिछले हफ्ते जमशेदपुर एफसी को 3-0 से हराया। 19 प्वॉइंट के साथ इस वक्त एफसी गोवा की टीम प्लेऑफ में जाती दिख रही है।

2. क्या ईस्ट बंगाल और केरला ब्लास्टर्स मिड टेबल में ही फिनिश करेंगे ?

शुक्रवार को एससी ईस्ट बंगाल और केरला ब्लास्टर्स ने 1-1 से ड्रॉ खेला। ये टीमें भले ही अभी प्वॉइंट्स टेबल में बीच में हैं लेकिन आगे के मैचों में इनके पास भी प्लेऑफ में जाने का मौका रहेगा। हालांकि, अभी तक केरला ब्लास्टर्स और ईस्ट बंगाल का प्रदर्शन वैसा नहीं रहा है, जिससे लगे कि वो अंतिम-4 में जगह बना सकती हैं।

दोनों ही टीमें इस वक्त प्वॉइंट्स टेबल में नौंवे और 10वें पायदान पर हैं। कई ऐसे मौके आए हैं जब इन टीमों ने वापसी की उम्मीद जगाई लेकिन रिजल्ट इसके विपरीत रहा। ब्लास्टर्स की टीम 11 मैचों में 21 गोल खा चुकी है जो लीग में सभी टीमों के बीच सबसे ज्यादा है। वहीं इस मामले में एससी ईस्ट बंगाल की टीम तीसरे नंबर पर है और उन्होंने कुल 16 गोल खाए हैं। इन दोनों ही टीमों के कोचों को अपनी टीम को इस स्थिति से बाहर निकालना होगा।

1. मैनोलो मारक्वेज ने अपनी बेहतरीन रणनीति से मुंबई सिटी एफसी को ड्रॉ पर रोका

मुंबई सिटी एफसी और हैदराबाद एफसी के बीच जब इस सीजन पहला मैच हुआ था तब मुंबई की टीम ने शानदार जीत हासिल की थी। हालांकि जब दूसरी बार इन टीमों का आमाना-सामना हुआ तब हैदराबाद के कोच मैनोलो मारक्वेज बेहतरीन रणनीति के साथ उतरे। हैदराबाद एफसी ने अहमद जोहू की मदद से इस बार मुंबई सिटी को गोल नहीं करने दिया।

पोस्ट मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोच ने इसको लेकर प्रतिक्रिया दी और कहा, “हमारा प्लान था कि हम गोल नहीं खाएंगे और मैच के बाद मैंने इस बारे में जोहू से मजाक भी किया। हमने जोहू के साथ एक प्लेयर रखा क्योंकि पहले मैच में उसके लॉन्ग बॉल की वजह से हमारी टीम को काफी नुकसान हुआ था।”

जोहू की मदद से मारक्वेज ने मुंबई सिटी की हर रणनीति को असफल कर दिया। उनकी पासिंग से हैदराबाद की टीम मुंबई के अटैक को रोकने में कामयाब रही। कुल मिलाकर हम ये कह सकते हैं को मारक्वेज ने दूसरी टीमों के कोचों को रास्ता दिखाया है कि किस तरह मुंबई सिटी एफसी को रोका जा सकता है।