इंडियन टीम के स्टार डिफेंडर ने करियर की शुरुआती कठिनाइयों पर बात की।

संदेश झिंगन वर्तमान समय में इंडियन फुटबॉल के सबसे बेहतरीन डिफेंडर्स में से एक हैं। उन्होंने पिछले महीने ही इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) क्लब केरला ब्लास्टर्स को छोड़ा था और फिलहाल फ्री होने पर इंडियन फुटबॉल में उनकी सबसे ज्यादा मांग है।

भले ही आज संदेश झिंगन इतने सफल और मशहूर हैं, लेकिन हर प्लेयर की तरह उन्होंने भी असफलता का स्वाद चखा है। उनको कोलकाता में सेकेंड और थर्ड डिवीजन के क्लबों ने भी रिजेक्ट कर दिया था और इससे उनके मन में फुटबॉल को करियर के रूप में चुनने पर बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया था।

एआईएफएफ के साथ बातचीत में संदेश झिंगन ने कहा, “यह मेरे करियर के शुरुआती दौर में हुआ था। उस समय मैं क्लब की तलाश में था और मैंने कोलकाता में कई क्लबों के लिए ट्रायल दिया जिसमें सेकेंड और थर्ड डिवीजन के क्लब भी शामिल थे। मुझे सभी ने रिजेक्ट कर दिया था।”

सभी क्लबों द्वारा रिजेक्ट हो जाने के बाद उनको समझ आ गया था कि उन्हें और कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। हालांकि, कुछ समय बाद ही उन्हें यूनाइटेड सिक्किम फुटबॉल क्लब ने साइन किया था।

संदेश झिंगन ने बताया, “वह मेरे लिए सपना सच होने जैसा था। कुछ महीनों पहले ही मुझे कोलकाता के कई क्लबों ने रिजेक्ट किया था और अचानक मैं रेनेडी भाई और बाईचुंग भाई के साथ खड़ा था। ट्रेनिंग शुरु करने के दौरान मैंने रेनेडी भाई को फ्री-किक लेते देखा। मुझे ऐसा लगा कि मैं घुटनों पर बैठकर उनके पांव चूम लूं। बाईचुंग भाई के साथ हाथ मिलाने के बाद मुझे लगा कि अब मैं अपने हाथ ही मत धुलूं।”

इसके बाद से झिंगन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए। झिंगन ने कहा कि 1.3 अरब लोगों के लिए खेलना काफी जिम्मेदारी का काम है, लेकिन इन्हीं जिम्मेदारियों ने उन्हें और मजबूत बनाया है।