19 वर्षीय खिलाड़ी इंडिया के उन मिडफील्डर्स में से एक हैं जिनके पास क्रिएटिव सेंस के साथ फिजिकल पावर भी है।

आपने बहुत सारे फुटबॉलर्स को देखा होगा जिनका फर्स्ट टच काफी क्लीन होता है और इसे ही एक टैलेंटेड फुटबॉल खिलाड़ी हैं आयुष अधिकारी। वह एक ऐसे यंग प्लेयर हैं जिनकी फील्ड पर मैच्योरिटी को देखकर आपको सुकून मिलता है। दिल्ली के रहने वाले आयुष फिलहाल आई-लीग क्लब इंडियन एरोज के लिए खेल रहे हैं। आईए इंडिया के सबसे बेहतरीन उभरते हुए खिलाड़ियों में से एक आयुष अधिकारी के बारे में आपको बारीकी से बताते हैं।

स्काउटिंग रिपोर्ट

उम्र- 19 साल

डेट ऑफ बर्थ- 30 जुलाई 2000

पोजिशन- मिडफील्डर

बैकग्राउंड

आयुष अधिकारी ने सात साल की उम्र में ही फुटबॉल खेलना शुरु कर दिया था। वह इस खेल से जुड़े परिवार से ताल्लुक रखते हैं और खेलने के लिए उनके पास मोटिवेशन की कमी नहीं थी। उनके पिता एक लोकल अकादमी में फुटबॉल कोच हैं और आयुष ने कम उम्र में ही खेल को अपना लिया था। उनके घर में गेंद हमेशा रहती थी तो यह खेल उनके लिए स्वाभाविक रहा। उनके पिता ने उन्हें अपने दोस्तों के साथ खेलते देखा और फिर अपनी अकादमी ले गए जहां उन्होंने स्किल्स डेवलप किए।

इसके बाद से इस यंग प्लेयर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने अंडर-14 ट्रायल्स में दिल्ली स्टेट के लिए खेलते हुए सभी को प्रभावित किया और यू ड्रीम फुटबॉल प्रोग्राम में सलेक्ट होने के बाद उन्हें जर्मनी जाने का मौका भी मिला। बिटबर्ग और हॉफेनहाइम की अकादमी में चार साल तक कठिन मेहनत करने के बाद उन्होंने खुद को आज एक बेहतरीन प्लेयर के रूप में बदला है।

वापस आने के बाद उन्होंने ओजोन एफसी ज्वाइन किया और संतोष ट्रॉफी में दिल्ली के लिए खेले। टूर्नामेंट में वह सबसे ज्यादा गोल करने वाले प्लेयर रहे। उनके टैलेंट और गोल स्कोरिंग को अनदेखा नहीं किया गया और उन्हें इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) फ्रेंचाइजी केरला ब्लास्टर्स ने साइन किया। खेलने के लिए ज्यादा मौके पाने के लिए उन्हें लोन पर इंडियन एरोज भेज दिया गया।

पॉजिटिव

आयुष का क्लोज कंट्रोल और विजन उनकी उम्र के हिसाब से काफी बेहतरीन है। वह बॉल के साथ काफी कॉन्फिडेंट नजर आते हैं और फील्ड पर कही भी स्पेस मिलने पर उसका काफी फायदा भी उठाते हैं। रोहित दानू और विक्रम प्रताप सिंह के दिए गए उनके कुछ पासेस यूरोपियन स्टाइल से मेल खाते हैं जो उन्होंने जर्मनी में अपने समय का दौरान सीखा होगा। ओजोन के लिए खेलते हुए उन्होंने काफी प्रभावित किया था और इसके बाद ही उन्हें संतोष ट्रॉफी खेलने के लिए दिल्ली बुलाया गया था।

2018-19 में वह महाराष्ट्र के आरिफ शेख के साथ टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल दागने वाले प्लेयर रहे जहां दोनों ने छह गोल दागे थे। इससे पता चलता है कि सही सिस्टम और बॉक्स में जाकर अटैक करने की आजादी मिलने पर वह अच्छे गोल स्कोरर भी साबित हो सकते हैं।

कहां है इम्प्रूवमेंट की जरूरत और क्या है भविष्य

इस युवा प्लेयर को निर्णय लेने में लगने वाले समय को कम करना होगा और टीम को फायदा पहुंचाने के लिए उन्हें गेंद को जल्दी रिलीज करना होगा। आयुष अधिकारी को अपनी फ्री-किक पर भी काम करने की जरूरत है। भले ही उनका कर्व काफी शानदार है, लेकिन उन्हें खुद को खतरनाक बनाने के लिए काफी ट्रेनिंग सेशन की जरूरत है। हालांकि, उनका टच काफी बेहतरीन है।

सारी मजबूतियों के बावजूद उन्हें आईएसएल में गेम टाइम हासिल करने के लिए और मेहनत करने की जरूरत है क्योंकि उनके जैसे खिलाड़ी को बेहतर बनने के लिए पिच पर ज्यादा समय की जरूरत होती है। उन्हें अभी अपना भविष्य तय करना है, लेकिन सही रास्ता और कठिन मेहनत करते रहने पर उनका भविष्य काफी उज्जवल दिखाई देता है।