ब्लू टाइगर्स के साथ काफी शानदार रहा है छेत्री की सफर।

12 जून, 2005 को युवा सुनील छेत्री ने पाकिस्तान के खिलाफ इंडियन फुटबॉल टीम के लिए अपना डेब्यू किया था और डेब्यू मैच में ही गोल दागा था। नेशनल टीम के लिए उनके डेब्यू करने के बाद से टीम ने दो बार एशियन कप के लिए क्वॉलीफाई किया है। 20 साल की उम्र में ही मोहन बागान से एक प्लेयर के रूप में जुड़ने वाले छेत्री से शुरु से ही महान प्लेयर बनने की उम्मीद लगाई गई थी।

भले ही लोगों ने उनसे उम्मीद लगाई थी, लेकिन बेहद कम लोगों को यकीन रहा होगा कि ये उम्मीद सच्चाई में तब्दील होने वाली है। डेब्यू से लेकर अब तक सुनील छेत्री ने इंडियन टीम के लिए 100 से भी ज्यादा मैच खेलें हैं और टीम के लिए हमेशा अपना 100 प्रतिशत देते हैं। कुछ वर्षों पहले तक इंडिया में फुटबॉल को एक करियर के रूप में नहीं देखा जाता था, लेकिन उन्होंने इन चीजों को झूठा साबित किया और आज वह देश के सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल हो चुके हैं।

पिता के इंडियन आर्मी और मां के नेपाल नेशनल टीम के लिए खेलने के कारण फुटबॉल सुनील छेत्री की रगों में बसा था। वह शुरुआत के दिनों में दिल्ली स्थित क्लब सिटी एफसी के लिए खेलते थे और बाद में मोहन बागान ने उन्हें सिलेक्ट किया। 2002-2003 सीजन में बागान जाने के बाद उन्होंने तीन साल में क्लब के लिए आठ गोल दागे और फिर जेसीटी चले गए।

जेसीटी को नेशनल फुटबॉल लीग में सेकेंड और आई-लीग के पहले सीजन में थर्ड फिनिश कराने वाले सुनील छेत्री को बेहतरीन प्रदर्शन के लिए 2007 में एआईएफएफ ने बेस्ट फुटबॉलर चुना। उसी साल उन्होंने नेहरू कप के रूप में भारत के लिए पहला टूर्नामेंट खेला और कंबोडिया के खिलाफ दो गोल दागे। उन्हें यूरोप में कई टीमों द्वारा ट्रायल पर बुलाया गया और क्वींस पार्क रेंजर्स ने उन्हें तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट भी ऑफर किया, लेकिन इसका कोई मतलब नहीं था।

वर्क परमिट नहीं मिलने के कारण वह इंग्लैंड में नहीं खेल सके और ईस्ट बंगाल तथा डेम्पो एससी के साथ थोड़ा समय बिताने के बाद वह मेजर लीग सॉकर (एमएलएस) में केंसास सिटी विजर्ड नामक टीम से जुड़े। हालांकि, वहां भी उन्हें केवल दो मैच खेलने का ही मौका मिला। 2008 में उन्होंने इंडियन टीम को सैफ चैंपियनशिप जिताया और इसके कारण भारत को एएफसी चैलेंज कप में खेलने का मौका मिला।

सुनील छेत्री ने 24 साल बाद भारत को एएफसी कप के लिए क्वॉलीफाई कराया, लेकिन इंडियन टीम पहले राउंड में ही बाहर हो गई। 2012 में बाईचुंग भूटिया के रिटायर होने के बाद छेत्री टीम के कप्तान बने और अब तक टीम को फ्रंट से लीड कर रहे हैं। पुर्तगाल के टॉप क्लबों में से एक स्पोर्टिंग लिस्बन की बी-टीम में थोड़ा समय बिताने के बाद उन्होंने चर्चिल ब्रदर्स को लोन पर आकर दूसरा आई-लीग खिताब जिताया।

2013 में अस्तित्व में आने के साथ ही बेंगलुरु एफसी ने सुनील छेत्री को साइन किया और अब तक वह उनके साथ हैं। स्टीफन कोन्सटेन्टाइन को दोबारा इंडियन कोच बनने के बाद छेत्री एंड कंपनी 14 मैचों तक लगातार अजेय रही और 2019 एशियन कप में टेबल टॉपर के रूप में पहुंची।

सुनील छेत्री ने बेंगलुरु ने किर्गिस्तान के खिलाफ खूबसूरत गोल दागा और अपने 99वें मैच में उन्होंने चाइनीज तपेई के खिलाफ हैट्रिक लगाई थी। अपने 100वें मैच के बाद छेत्री ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया और ब्रेस लगाया। वह अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल में 72 गोल दाग चुके हैं और एक्टिव फुटबॉलर्स में क्रिस्टियानो रोनाल्डो के बाद दूसरे सबसे ज्यादा गोल दागने वाले प्लेयर हैं। हाल के समय में उनके जैसा कोई दूसरा फुटबॉल प्लेयर नहीं आया है और आईएम विजयन के साथ वह इंडिया के लिविंग लेजेंड हैं।