इन सभी खिलाड़ियों ने अपनी-अपनी टीमों के लिए जबरदस्त प्रदर्शन किया।

​हर साल ट्रांसफर विंडो के दौरान कई फुटबॉल खिलाड़ी एक क्लब से दूसरे क्लब में जाते हैं। इनमें से कई प्लेयर्स को काफी ज्यादा ट्रांसफर फीस मिलती है, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं होती है कि वो खिलाड़ी बेहतर परफॉर्मेंस करेगा। हालांकि, कुछ साइनिंग ऐसी रहती हैं जिन्हें बेहद कम करके आंका जाता है लेकिन वो प्लेयर्स काफी सफलता हासिल करते हैं और अपने-अपने क्लबों के लीजेंडरी खिलाड़ी बन जाते हैं।

हम आपको यूरोप में पिछले दशक में हुए टॉप-5 साइनिंग के बारे में बताएंगे जिन्हें काफी कम करके आंका गया:

5. मीचू (स्वानसी सिटी)

मिगुअल प्रेज कूएस्टा उर्फ मीचू को 2012 में तब प्रीमियर लीग की अहम टीम स्वानसी सिटी एफसी ने £2 मिलियन की रकम में साइन किया था। उन्हें जिल्फी सिगरडसन के रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में लाया गया था। फुटबॉल क्लब को एक अटैकिंग मिडफील्डर की जरुरत थी और इसी वजह से उन्होंने रायो वैलिकानो से मीचू को साइन किया।

मीचू दो साल तक क्लब का हिस्सा रहे और जबरदस्त प्रदर्शन किया। अपने डेब्यू सीजन में उन्होंने 43 मैचों में 22 गोल कर प्रीमियर लीग में सबको हैरान कर दिया। 2013 में उन्होंने टीम को लीग कप ट्रॉफी जीतने में अपना अहम योगदान दिया था। इसी वजह से टीम यूएफा यूरोपा लीग के लिए भी क्वालीफाई करने में कामयाब रही।

उस सीजन के बाद माइकल लॉडरप ने कहा था, “मीचू टीम के लिए सबसे बेस्ट साइनिंग थे। मैं हमेशा प्लेयर्स के लिए अच्छी डील करता हूं लेकिन मीचू ने जिस तरह का इम्पैक्ट डाला और उनकी जो अहमियत थी उससे वो हमारे लिए बेस्ट साइनिंग थे।”

4. मिरांडा (एटलेटिको मैड्रिड)

एटलेटिको मैड्रिड ने 2011 में ब्राजीलियन डिफेंडर मिरांडा को साइन किया था। डिएगो गॉडिन के साथ 2015 तक वो टीम के डिफेंस की धुरी रहे। 2013-14 के सीजन में एटलेटिको मैड्रिड ने 17 साल के बाद अपना पहला ला-लीगा टाइटल जीता और इसमें मिरांडा का काफी बड़ा योगदान रहा।

लीग में बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए उन्हें फिफप्रो 2014 में भी नॉमिनेट किया गया था। उन्होंने 2014 में टीम को यूएफा चैंपियंस लीग के फाइनल में भी पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका अदा की थी। मिरांडा 4 चार साल तक एटलेटिको मैड्रिड का हिस्सा रहे और 2015 में इंटर मिलान में चले गए।

3. पॉल पोग्बा (युवेंटस)

2012 में फ्री ट्रांसफर के जरिए युवेंटस फुटबॉल क्लब ने पॉल पोग्बा को साइन किया था। इससे पहले वो मैनचेस्टर यूनाईटेड का हिस्सा थे लेकिन फर्स्ट टीम में सीमित मौके की वजह से उन्होंने अपना कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने का फैसला नहीं किया था। हालांकि, पोग्बा के इस रवैये पर मैनचेस्टर यूनाईटेड के तत्कालीन मैनेजर एलेक्स फर्ग्युसन ने काफी नाराजगी जाहिर की थी और इसे अपमानजनक बताया था।

युवेंटस की तरफ से खेलते हुए पॉल पोग्बा ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और उनकी गिनती यूरोप के बेहतरीन युवा खिलाड़ियों में होने लगी। कई सालों तक एंड्रिया पिर्लो के साथ वो युवेंटस की मिडफील्ड का अहम हिस्सा रहे। 2013 में उन्हें गोल्डन ब्वॉय अवॉर्ड से भी नवाजा गया। 2016 में £86 मिलियन की रिकॉर्ड रकम के साथ उन्होंने दोबारा से मैनचेस्टर यूनाईटेड में वापसी की।

2. जेम्स मिलनर (लिवरपूल)

पिछले दशक की सबसे अंडररेटेड साइनिंग में से एक जेम्स मिलनर भी अपने क्लब के लिए काफी शानदार प्लेयर साबित हुए। 2015 में फ्री ट्रांसफर के जरिए लिवरपूल ने अपनी चिर-प्रतिद्वंदी टीम मैनचेस्टर सिटी से जेम्स मिलनर को साइन किया था। लिवरपूल के लिए मिलनर काफी बेहतरीन खिलाड़ी साबित हुए। वो टीम की जरुरत के हिसाब से किसी भी पोजिशन पर खेल सकते थे।

लिवरपूल की तरफ से मिलनर ने कई पोजिशंस पर फुटबॉल खेला और हर बार पूरे जोश और जज्बे के साथ मैदान में उतरे। उन्होंने टीम के साथ यूएफा चैंपियंस लीग का खिताब भी जीता जो 30 सालों में लिवरपूल का पहला लीग टाइटल था। मिलनर की लीडरशिप स्किल काफी जबरदस्त है जो उनकी सफलता का एक अहम कारण है।

1. जेमी वार्डी (लेस्टर सिटी)

2012 में लेस्टर सिटी ने जेमी वार्डी को फ्लीटवुड टाउन से £1 मिलियन की रकम में साइन किया था। उस वक्त ये उनकी रिकॉर्ड साइनिंग थी। जेमी वार्डी लीस्टर सिटी के लिए सबसे जबरदस्त प्लेयर बनकर उभरे और क्लब को 2014 में प्रीमियर लीग में भी प्रमोशन मिला।

प्रीमियर लीग के अपने डेब्यू सीजन में लीस्टर सिटी की टीम 14वें स्थान पर रही। हालांकि इसके बाद अगले सीजन में सबको चौंकाते हुए लीस्टर सिटी ने प्रीमियर लीग का खिताब अपने नाम कर लिया। जेमी वार्डी के बेहतरीन परफॉर्मेंस को देखते हुए उन्हें 2016 के यूरोज में भी जगह मिली। 2019-20 के सीजन में 33 साल की उम्र में 23 गोल करके वार्डी ने गोल्डन बूट का अवॉर्ड जीता।