युवा खिलाड़ी अब किसी भी मामले में विदेशी खिलाड़ियों से पीछे नहीं रहना चाहते।

इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के मौजूदा सीजन में कई ऐसे यंग इंडियन प्लेयर्स रहे हैं जिन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है। विदेशी सितारों के होने के बावजूद उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। नई पीढ़ी के यह खिलाड़ी सिर्फ अपने क्लब में ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय टीम के दरवाजे पर भी दस्तक देने को तैयार दिख रहे हैं। भारतीय टीम को बेशक इन खिलाड़ियों में आने वाला कल दिख रहा है।

भारतीय टीम के मिडफील्डर अनिरुद्ध थापा को नई पीढ़ी के खिलाड़ियों का स्टार माना जाता है, लेकिन कई ऐसे इंडियन प्लेयर्स हैं जो अपने दम पर मैच का रुख पलट सकते हैं। इसमें सबसे पहला नाम आता है सुरेश सिंह वांगजम का। 20 साल के सुरेश को बेंगलुरु एफसी की मिडफील्ड की जान कहा जाता है। उनके शानदार प्रदर्शन से बेंगलुरु विरोधियों से बॉल छिनने और पॉजेशन रखने में कामयाब हो पा रहे हैं। वह साल 2017 में अंडर-17 फीफा वर्ल्ड कप खेल चुके हैं और फिलहाल बेंगलुरु एफसी में भारतीय फुटबॉल के सबसे स्टार सुनील छेत्री का साथ निभा रहे हैं।

केरला ब्लास्टर्स की बात करें तो वहां राहुल केपी और सहल अब्दुल सामद दोनों ने शानदार खेल दिखाया है। सहल ने आगे बढ़कर टीम के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारियां उठाई है और अपनी बदली फिजीक एवं फिटनेस के कारण वह विपक्षी टीम के डिफेंडर्स को भी हटाने में कामयाब रहते हैं। केरला ब्लास्टर्स का सामना जब हैदराबाद एफसी से हुआ तब जिस तरह राहुल ने आकाश मिश्रा के खिलाफ वन टू वन खेल दिखाया वो भारतीय फैंस के लिए शानदार अनुभव था।

यही आकाश मिश्रा हैदराबाद एफसी के नए स्टार बन चुके हैं। अपने प्रदर्शन से उन्होंने कई क्लब को हैरान किया है। नॉर्थईस्ट यूनाइटेड में जो भूमिका लालेगमाविआ निभा रहे हैं हैदराबाद एफसी में वह जिम्मेदारी आकाश मिश्रा के पास है। लेफ्ट बैक के तौर उनके शानदार प्रदर्शन के दम पर ही उन्हें टीम के कप्तान के तौर पर भी चुना गया था। ईस्ट बंगाल के खिलाफ हुए मुकाबले में उनके युवा साथी खिलाड़ी निनथोइंगैंबा मेटाइ ने भी लेफ्ट विंगर के तौर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था।

हैदराबाद एफसी के ही चिंगलेनसाना सिंह कोनशम ने इस सीजन में शानदार प्रदर्शन किया है। वह जिस धैर्य के साथ खेलते हैं और गेंद पर उनका जैसा कंट्रोल है भारत में वैसा बहुत कम सेंटर बैक खिलाड़ियों में देखने को मिलता है। छह फुट एक इंज की लंबाई वाले इस खिलाड़ी में हर वह खूबी है जो आने वाले समय में उन्हें टीम इंडिया में पहुंचा सकती है। शिलॉन्ग लाजॉन्ग के साथ दो अच्छे सीजन के बाद उन्हें गोव एफसी की ओर खेलते हुए काफी समय तक बेंच पर बैठना पड़ा था। अब जब उन्हें लगातार खेलने का मौका मिला है तो फैंस और बाकी क्लबों को उनकी कबिलियत का अंदाजा हो रहा है।

वहीं गोवा एफसी में ब्रैंडन फर्नांडिस और हुगो बोउमोस के जाने के बाद नए स्टार बनकर सामने आए हैं। उन्होंने इस सीजन में शानदार खेल दिखाया है। इस सीजन में स्टार बनकर सामने आए इगोर एंगुलो और जॉर्ज ऑर्टिज के खिलाफ उन्होंने शानदार खेल दिखाया है। टीम का ब्रैंडन के खेल पर भरोसा ही था कि उन्होंने हुगो के जाने के बाद उन्हें रिप्लेस नहीं किया।

रहीम अली, रोछरजेला और मनवीर सिंह जैसे खिलाड़ियों ने गोल करके टीम अपनी उपयोगिता साबित की है। हर क्लब में कम से कम एक या दो ऐसे खिलाड़ी हैं जो अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसे देखकर साबित हो रहा कि आईएसएल के कोच इंडियन खिलाड़ियों को अब केवल नंबर पूरा करने के लिए ही टीम में नहीं रख रहे हैं वह उन्हें अहम जिम्मेदारियां दे रहे हैं जो टीम के गेम प्लान का हिस्सा है।

यह कहना गलत नहीं होगा की आईएसएल में अपने क्लब के लिए अहम जिम्मेदारियां निभा रहे यह खिलाड़ी आगे की चुनौतियों के लिए तैयार हो रहे हैं। जिन खिलाड़ियों को टीम में मौका नहीं मिला या मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला वह आई-लीग में नए मौके तलाश कर सकते हैं। आईएसएल में युवाओं का इस तरह सामने आकर अहम जिम्मेदारियां लेना इंडियन फुटबॉल के लिए अच्छा संदेश है। यह इन खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने वाली बड़ी मुश्किलों का सामना करने का आत्मविश्वास देगा।