एशियाई चुनौती के लिए तैयार भारत अंडर-20 महिला टीम: कप्तान शुभांगी सिंह

थाईलैंड में जापान के खिलाफ अपने पहले मुकाबले से महज दो हफ्ते पहले, भारतीय अंडर-20 महिला राष्ट्रीय टीम एक लंबे इंतजार के बाद वापसी की दहलीज पर खड़ी है। दो दशक बाद भारत एएफसी अंडर-20 महिला एशियन कप में वापसी कर रहा है और 2 अप्रैल को टीम की कप्तानी शुभांगी सिंह करेंगी।
शुभांगी के लिए क्वालिफिकेशन का महत्व अब पीछे छूट चुका है। म्यांमार में 20 साल का इंतजार खत्म करने के बाद जश्न की जगह अब टीम का पूरा ध्यान आने वाली चुनौती पर है।
उन्होंने कहा, “हम वहां क्वालिफाई करने के इरादे से गए थे और हमने वह हासिल किया। जब आपको पहले से विश्वास होता है, तो यह किसी आश्चर्य की तरह नहीं लगता।”
अब यही विश्वास टीम को आगे बढ़ा रहा है, क्योंकि ग्रुप सी में भारत का सामना 2 अप्रैल को भारतीय समयानुसार शाम 6:30 बजे जापान से, 5 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे ऑस्ट्रेलिया से और 8 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे चाइनीज़ ताइपे से होगा। ग्रुप की शीर्ष दो टीमें और दो सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमें क्वार्टर फाइनल में पहुंचेंगी, जबकि क्वार्टर फाइनल जीतने वाली चार टीमें फीफा अंडर-20 महिला विश्व कप पोलैंड 2026 के लिए क्वालिफाई करेंगी।
फिलहाल कोलकाता में अभ्यास कर रही ‘यंग टाइग्रेस’ टीम शुक्रवार सुबह (20 मार्च) बैंकॉक के लिए रवाना होगी।शुभांगी सिंह ने कहा, “हमारा फोकस इन तीन कठिन ग्रुप मैचों पर है। इस स्तर पर कोई भी मुकाबला आसान नहीं होता। हम तैयार हैं और शीर्ष टीमों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करना चाहते हैं। एशियन कप से पहले कुछ और अभ्यास मैच भी खेलेंगे, जिससे हमें और मदद मिलेगी।”
भारत की तैयारियां काफी व्यवस्थित और व्यापक रही हैं। इस साल की शुरुआत में स्वीडन में एक महीने का ट्रेनिंग कैंप और पिछले साल के अंत में उज्बेकिस्तान व कज़ाखस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडली मैचों ने टीम को उच्च स्तर की फुटबॉल के लिए तैयार किया है।
शुभांगी ने कहा, “हमारी तैयारी काफी अच्छी रही। स्वीडन में एक महीना बिताना और यूरोपीय क्लबों के खिलाफ खेलना शानदार अनुभव था। वे टीमें शारीरिक रूप से हमसे ज्यादा मजबूत थीं, जिससे हमें ऐसे मुकाबलों से निपटना सीखने को मिला।”
स्वीडन के शीर्ष क्लब हम्मार्बी आईएफ की सीनियर टीम के खिलाफ पहले मैच में 0-6 की हार टीम के लिए बड़ा सबक साबित हुई।
उन्होंने कहा, “पहला मैच सबसे कठिन था। 0-6 की हार स्वीकार्य नहीं थी, लेकिन उससे हमें बहुत सीख मिली। इसके बाद हमने बेहतर तालमेल बैठाया और कैंप का अंत 5-2 की जीत के साथ किया। इससे हमें यूरोपीय शैली को समझने में मदद मिली, जो जापान जैसी टीमों के खिलाफ काम आएगी।”
स्वीडन से पहले टीम ने उज्बेकिस्तान और कज़ाखस्तान के खिलाफ भी कई मैच खेले थे।
“हमने उज्बेकिस्तान के खिलाफ कई बार खेला और अच्छे परिणाम हासिल किए। वे शारीरिक रूप से मजबूत टीम हैं, इसलिए उनके खिलाफ खेलना हमारे लिए फायदेमंद रहा,” शुभांगी सिंह ने कहा।
“कज़ाखस्तान में हमने एक मैच जीता और एक ड्रॉ खेला। शुरुआत में हमें शारीरिक रूप से मजबूत खिलाड़ियों के खिलाफ दिक्कत हुई, लेकिन उन मैचों ने हमें बहुत कुछ सिखाया।”
इस भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत उसकी निरंतरता है। कोर ग्रुप पिछले एक साल से साथ खेल रहा है, जिससे टीम में बेहतर समझ और तालमेल विकसित हुआ है।
शुभांगी ने कहा, “हम एक साल से ज्यादा समय से साथ हैं, जिससे मैदान के अंदर और बाहर हमारी समझ बेहतर हुई है। हमने व्यक्तिगत और टीम दोनों स्तर पर काफी विकास किया है।
मुख्य कोच जोआकिम एलेक्जेंडरसन के आने के बाद टीम की खेल शैली में भी बदलाव आया है।
“उनके आने के बाद हमारी शैली ज्यादा आक्रामक हो गई है। वह हमें गलतियों से डरने के बजाय खुलकर खेलने के लिए प्रेरित करते हैं और खेल का आनंद लेने पर जोर देते हैं। इससे हमारे प्रदर्शन में काफी सुधार हुआ है,” उन्होंने कहा।
भारत का पहला मुकाबला जापान जैसी मजबूत टीम से होगा, जिसने छह बार अंडर-20 एशियन कप जीता है और तीन बार विश्व कप फाइनल खेला है।
शुभांगी सिंह ने कहा, “जापान बहुत मजबूत टीम है। उनकी जूनियर टीमें भी सीनियर टीम की तरह खेलती हैं, इसलिए हमें अंदाजा है कि क्या चुनौती होगी। लेकिन हम किसी भी टीम को खुद से मजबूत मानकर मैदान में नहीं उतरेंगे। हम दिखाना चाहते हैं कि यह भारतीय टीम क्या कर सकती है।”
कई खिलाड़ियों के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा मंच होगा, लेकिन टीम का लक्ष्य सिर्फ भाग लेना नहीं है। शुभांगी ने अंत में कहा, “हमारा लक्ष्य अच्छा प्रदर्शन करना और नॉकआउट स्टेज के लिए क्वालिफाई करना है। थाईलैंड में और भारत में हमारे सभी समर्थकों से अपील है कि हमें समर्थन दें। आपका साथ हमारे लिए बहुत मायने रखता है और हम अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगे।”