PKL 12: टॉप 8 की रेस से बाहर होने वाली सभी टीमें

PKL 12 के लीग स्टेज के बाद 12 में से 4 टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो गई हैं।
प्रो कबड्डी लीग के 12वें सीजन (PKL 12) का लीग स्टेज खत्म हो गया है और नए नियमों के कारण 12 में 8 टीमों ने अगले राउंड के लिए क्वालीफाई किया। इस बार PKL में कुछ नई चीजों के कारण काफी रोमांचक मुकाबले देखने को मिले।
पीकेएल 12 अंक तालिका की नीचे की 4 टीमें टॉप 8 की रेस से बाहर हो गई और उनके लिए टूर्नामेंट का अंत हो गया। इन टीमों के पास कई दिग्गज खिलाड़ी होने के बावजूद उनका प्रदर्शन उस स्तर का नहीं रहा और उन्होंने काफी खराब खेल दिखाया।
तो चलिए उन टीमों के ऊपर एक नजर डालते हैं जो टॉप 8 की रेस से बाहर हो गई है:
4. यूपी योद्धा
PKL 12 के ऑक्शन के बाद यूपी योद्धा की टीम काफी ज्यादा मजबूत दिख रही थी। उन्होंने अपने प्रमुख खिलाड़ियों को टीम में रखा था और उसके अलावा गुमान सिंह जैसे बढ़िया रेडर को टीम में शामिल किया था। हालांकि, पूरे सीजन में टीम का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा।
टूर्नामेंट में ठीक-ठाक शुरुआत करने के बाद यूपी की लय बिगड़ गई और काफी नजदीकी मुकाबले उन्होंने गँवाए। यूपी योद्धा ने लीग स्टेज के 18 मैचों में सिर्फ 7 मुकाबले जीते और 11 हार के साथ नौवें स्थान पर रहते हुए बाहर हुए।
3. गुजरात जायंट्स
गुजरात जायंट्स ने PKL 12 से पहले ऑक्शन में मोहम्मदरेज़ा शादलू को काफी महंगे में खरीदा था और ऐसी उम्मीद थी कि इससे टीम को काफी फायदा मिलेगा। हालाँकि ऐसा हुआ नहीं और शादलू का भी फॉर्म काफी खराब रहा। टीम सही कॉम्बिनेशन के साथ नहीं खेल सकी और ज्यादातर मैचों में उनकी हार का यही कारण रहा।
लीग स्टेज के आखिरी कुछ मैचों में गुजरात जायंट्स ने वापसी की कोशिश की लेकिन अहम मौकों पर उन्हें हार मिली जिसके कारण वह टॉप 8 में नहीं जा सके। गुजरात की टीम 18 मैचों में सिर्फ 6 जीत और 12 हार के साथ 11वें स्थान पर रही।
2. तमिल थलाइवाज
PKL 12 से पहले ऑक्शन में तमिल थलाइवाज ने पवन सहरावत और अर्जुन देशवाल को अपनी टीम में शामिल किया था जिसकी वजह से वह इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत टीम में से एक दिख रही थी। नितेश कुमार के तौर पर थलाइवाज के पास बेहतरीन डिफेंडर भी था।
हालांकि, टीम का प्रदर्शन इस सीजन काफी खराब रहा और इसके साथ टूर्नामेंट के बीच में हुए कुछ विवाद से भी उनको नुकसान हुआ। पवन को बीच सीजन टीम से बाहर कर दिया गया और अर्जुन को नया कप्तान बनाया गया। टॉप 8 की रेस से बाहर होने के बाद कोच संजीव बालियान और अर्जुन ने भी मैनेजमेंट के ऊपर आरोप लगाए कि स्टार्टिंग 7 चुनने में उन्हें काफी परेशानियां हुई।
उन्होंने यह भी बताया कि अनफिट खिलाड़ियों को टीम में मौका दिया गया और फिट खिलाड़ी बेंच पर बैठे रह गए। तमिल थलाइवाज ने 18 मैचों में सिर्फ 6 जीत दर्ज की और 12 हार के साथ 10वें स्थान पर रहे।
1. बंगाल वॉरियर्स
बंगाल वॉरियर्स के लिए PKL 12 सबसे ज्यादा निराशाजनक रहा और वह 18 मैचों में सिर्फ 6 जीत और बेहद खराब स्कोर अंतर के कारण आखिरी स्थान पर रहते हुए टूर्नामेंट से बाहर हुई। ऑक्शन में बंगाल ने देवांक दलाल को खरीदा था और उन्होंने लीग स्टेज में सबसे ज्यादा 271 रेड पॉइंट लेकर बेहतरीन प्रदर्शन किया लेकिन इसके बावजूद टीम को लगातार हार से नहीं बचा सके।
देवांक को साथी खिलाड़ियों से वैसा सहयोग नहीं मिल पाया जिसकी उम्मीद थी और इसके अलावा बंगाल वॉरियर्स का डिफेंस भी काफी हद तक कमज़ोर ही रहा। इस वजह से बंगाल की टीम लगातार जीत दर्ज नहीं कर पाई और कई मैचों की एकतरफा हार के कारण उन्हें आखिरी स्थान पर रहना पड़ा।
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