Khel Now logo
HomeSportsFIFA WORLD CUP 2026Live Cricket Score
Advertisement

फुटबॉल समाचार

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में दिखी क्रिकेट जैसी टेक्नोलॉजी, फैंस भी देखकर हो गए दंग

Neetish has been part of Khel Now since March 2023, covering Hindi Sports articles on the Cricket desk.
Published at :June 16, 2026 at 10:10 PM
Modified at :June 16, 2026 at 10:10 PM
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में दिखी क्रिकेट जैसी टेक्नोलॉजी, फैंस भी देखकर हो गए दंग

स्वीडन और ट्यूनीशिया के मैच में इस्तेमाल हुई बॉल कॉन्टैक्ट टेक्नोलॉजी ने फुटबॉल जगत में नई चर्चा छेड़ दी।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्वीडन और ट्यूनीशिया के बीच खेले गए मुकाबले के बाद सबसे ज्यादा चर्चा किसी खिलाड़ी या गोल की नहीं, बल्कि एक नई तकनीक की हो रही है। इस मैच के दौरान एक विवादित गोल की समीक्षा में जिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया, उसे देखकर कई फैंस ने इसकी तुलना क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली Snicko तकनीक से कर दी।

हालांकि, यह तकनीक पूरी तरह नई नहीं है, लेकिन फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इसके इस्तेमाल ने एक बार फिर फुटबॉल फैंस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सोशल मीडिया पर भी इस तकनीक को लेकर काफी चर्चा देखने को मिली।

स्वीडन बनाम ट्यूनीशिया मैच में क्या हुआ था?

स्वीडन ने टूर्नामेंट के अपने पहले मुकाबले में ट्यूनीशिया को 5-1 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। इस दौरान यासिन अयारी ने दो गोल किए, जबकि विक्टर ग्योकेरेस, माटियास स्वानबर्ग और एलेक्जेंडर इसाक ने एक-एक गोल दागा।

मैच के दौरान स्वानबर्ग का एक गोल शुरुआत में ऑफसाइड करार दिया गया था। असिस्टेंट रेफरी का मानना था कि सेट पीस के दौरान गेंद सीधे स्वानबर्ग तक पहुंची थी। हालांकि, स्वीडन के खिलाड़ियों ने दावा किया कि गेंद रास्ते में एलेक्जेंडर इसाक को छूकर गई थी।

इसके बाद VAR ने मामले की समीक्षा की और बॉल कॉन्टैक्ट टेक्नोलॉजी की मदद ली गई। जांच में यह साबित हो गया कि गेंद वास्तव में इसाक को छूकर गई थी। इसके बाद रेफरी ने अपना फैसला बदलते हुए गोल को मान्यता दे दी।

क्या है बॉल कॉन्टैक्ट टेक्नोलॉजी?

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इस्तेमाल की जा रही मैच बॉल Trionda “कनेक्टेड बॉल टेक्नोलॉजी” से लैस है। इस तकनीक के तहत गेंद के अंदर एक स्पेशल माइक्रोचिप और सेंसर लगाए गए हैं।

यह सेंसर गेंद के हर कॉन्टैक्ट को रिकॉर्ड करते हैं और उसकी जानकारी रियल टाइम में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) तक पहुंचाते हैं। इससे रेफरी यह पता लगा सकते हैं कि गेंद किसी खिलाड़ी के शरीर या पैर को छुई है या नहीं।

यह बॉल बनाने वाली कंपनी एडिडास के अनुसार यह तकनीक मैच अधिकारियों को पहले से ज्यादा तेज और सटीक फैसले लेने में मदद करती है। साथ ही खेल के दौरान मिलने वाले डेटा की क्वालिटी भी बेहतर होती है।

क्रिकेट के Snicko जैसी क्यों लगती है यह तकनीक?

क्रिकेट फैंस Snicko तकनीक से अच्छी तरह परिचित हैं। वहां बल्ले और गेंद के बीच हल्के संपर्क का पता लगाने के लिए ऑडियो और सेंसर डेटा का इस्तेमाल किया जाता है।

फुटबॉल में इस्तेमाल हो रही यह तकनीक भी कुछ हद तक उसी तरह काम करती है। स्वीडन और ट्यूनीशिया के मैच के दौरान स्क्रीन पर एक सेंसर ग्राफ दिखाया गया था। जब गेंद अलेक्जेंडर इसाक के पैर के पास पहुंची तो ग्राफ में स्पष्ट स्पाइक दिखाई दिया, जिससे पुष्टि हुई कि गेंद उनके संपर्क में आई थी। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर फैंस इसे फुटबॉल का Snicko कहकर चर्चा कर रहे हैं।

क्या पहले भी इस्तेमाल हो चुकी है यह तकनीक?

यह पहली बार नहीं है जब किसी फुटबॉल मैच या बड़े टूर्नामेंट में बॉल कॉन्टैक्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इससे पहले फीफा वर्ल्ड कप 2022 और यूरो 2024 में भी इसका उपयोग किया जा चुका है।

बहुत सारे लोगों को याद होगा कि, कतर में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप 2022 में पुर्तगाल और उरुग्वे के मुकाबले के दौरान ब्रूनो फर्नांडिस के एक गोल को लेकर विवाद हुआ था। उस समय क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने दावा किया था कि गेंद उनके सिर से लगकर गोल में गई थी। हालांकि, सेंसर डेटा ने साफ कर दिया कि रोनाल्डो का गेंद से कोई संपर्क नहीं हुआ था और गोल ब्रूनो फर्नांडिस के नाम दर्ज किया गया।

इसके अलावा यूरो 2024 में बेल्जियम और स्लोवाकिया के मैच में भी इस तकनीक का इस्तेमाल हुआ था। उस मुकाबले में रोमेलू लुकाकू का गोल शुरुआत में मान्य दिया गया था, लेकिन समीक्षा के दौरान पता चला कि अटैक की शुरुआत में बेल्जियम के खिलाड़ी लोइस ओपेंडा के हाथ से गेंद लगी थी। इसके बाद VAR ने गोल को रद्द कर दिया था।

For more updates, follow Khel Now on Facebook, Twitter, Instagram, Youtube; download the Khel Now Android App or IOS App and join our community on Whatsapp & Telegram.

Neetish
Neetish

Neetish Kumar Mishra started content writing in 2018 due to his interest in cricket. He has experience writing and editing work for more than 10 sports websites to date.