आशालता: भारतीय फुटबॉलर्स के लिए प्रेरणा हैं बाला देवी और आदिति चौहान

नेशनल टीम की कप्तान ने विदेश में खेल चुके इंडियन प्लेयर्स की तारीफ की।
पिछले कुछ समय में भारत की महिला फुटबॉलर्स ने विदेशी लीगों में हिस्सा लेकर एक नई शुरुआत की है। नेशनल टीम की स्टार फॉरवर्ड बाला देवी यूरोपियन क्लब के साथ करार करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी। उन्होंने रेंजर्स वुमेन एफसी के साथ करार किया और स्कॉटिश वुमेन प्रीमियर लीग में खेली। भारतीय टीम की कप्तान आशालता देवी ने कहा कि देश में युवा महिला फुटबॉल खिलाड़ी इससे प्रेरित होंगी।
एआईएफएफ टीवी के साथ लाइव चैट में उन्होंने कहा, "रेंजर्स के लिए बाला दीदी का खेलना भारतीय फुटबॉल में एक बहुत बड़ी बात है। इससे सिर्फ हमें ही नहीं बल्कि अगली पीढ़ी के लिए भी विदेशों में खेलने का रास्ता खुला है। मुझे उम्मीद है कि युवा पीढ़ी बाला दीदी और अदिति चौहान से प्रेरित होंगी और सोचेंगी कि आने वाले समय में वह भी उनकी तरह विदेशी क्लबों में साथ खेल सकती हैं। बड़े क्लबों के लिए खेलना हर किसी का सपना होता है और इसी प्रेरणा के साथ वह कड़ी मेहनत करेंगे और अपने खेल के प्रति पूरा समर्पण दिखाएंगे।"
27 साल की सेंटरबैक आशालता देवी को पिछले साल शानदार प्रदर्शन के लिए 'एफसी वुमेन प्लेयर' अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था। वह भी विदेशी क्लबों में खेलना चाहती है लेकिन फिलहाल उनका ध्यान एफसी महिला एशिया कप पर है जिसकी मेजबानी भारत करने वाला है। उन्होंने कहा, "हर खिलाड़ी विदेशी प्रोफेशनल क्लब के लिए खेलना चाहता है लेकिन जैसा कि हम जानते हैं कि भारत 2022 में महिला एशिया कप की मेजबानी करने वाला है और मेरा फोकस उसी पर है। अगर मुझे मौका मिलेगा तो मैं जरुर खेलने विदेश जाऊंगी लेकिन मेरी पहली प्राथमिकता एएफसी एशियन कप ही है।"
महिला नेशनल टीम में कई युवा खिलाड़ी शामिल हैं, आशालता ने कहा कि वह अपना एक दशक का अनुभव उनके साथ बांटना चाहती हैं। उन्होंने कहा, "मेरा देश और राष्ट्रीय टीम हमेशा मेरी पहली प्राथमिकता है। इसलिए मैं अपने अनुभवों को पहले अपने सभी जूनियर्स के साथ साझा करना चाहती हूं। जब मुझे लगेगा कि मैंने अपने देश के लिए अपना योगदान दे दिया है, तब मैं इस खेल को अलविदा कहूंगी।"
अगले साल उनको भारतीय फुटबॉल में 10 साल पूरे हो जाएंगे। साल 2011 में डेब्यू करने वाली आशालता पिछले कुछ सालों में भारतीय टीम का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। उन्होंने सैफ महिला चैंपियनशिप फाइनल में नेपाल के खिलाफ हुए मुकाबले को अपने करियर का सबसे यादगार पल बताया।
उन्होंने कहा, "2019 में नेपाल में सैफ कप का खिताब मेरे लिए सबसे यादगार पल है। उस मैच से कुछ समय पहले ही हम नेपाल से हार गए थे और फाइनल मैच से पहले हर कोई भावुक हो गया था। हमने मयमोल मैडम (मुख्य कोच मयमोल रॉकी) से वादा किया था कि हम उनके लिए यह ट्रॉफी जीतेंगे। सेमीफाइनल में हमने बांग्लादेश का सामना किया और नेपाल के सभी फैंस स्टेडियम में बांग्लादेश का समर्थन कर रहे थे जिससे हम कंफ्यूज हो गए थे।"
आशालता ने कहा, "फाइनल के दिन, मैंने लड़कियों से कहा कि हम सोचें कि हम अपने देश में खेल रहे हैं और फैंस हमारा समर्थन कर रहे हैं, इसलिए उन पर ध्यान न दें और केवल अपने खेल पर ध्यान दें। शुरुआत में मैंने महसूस किया कि बहुत सारे खिलाड़ी दबाव को संभालने में सक्षम नहीं थे, हालांकि फाइनल मुकाबले में जूनियर खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया और मुझे ऐसा नहीं लगा कि हम इससे पहले कभी नेपाल से हारे थे। सभी जूनियर्स ने मुझ पर भरोसा किया और एक टीम के रूप में शानदार प्रदर्शन करके खिताब अपने नाम किया।"
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