पीकेएल 8: एकजुट होकर नहीं खेलने की वजह से जयपुर पिंक पैंथर्स का सपना टूटा

(Courtesy : PKL)
टीम को अभी तक अपने दूसरे टाइटल का इंतजार है।
जयपुर पिंक पैंथर्स प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) की बेहतरीन टीमों में से एक है। इस टीम ने पीकेएल के पहले सीजन का खिताब जीता था। हालांकि तब से लेकर अभी तक टीम को अपने दूसरे पीकेएल का टाइटल का इंतजार है। पीकेएल के 8वें सीजन में भी टीम ने निराश किया। टीम का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। जयपुर पिंक पैंथर्स ने 22 में से 10 मुकाबले जीते और 10 हारे, वहीं दो मैच टाई रहे। वो प्वॉइंट्स टेबल में 8वें पायदान पर रहे।
जयपुर पिंक पैंथर्स ने शुरूआत में कुछ मुकाबले हारे लेकिन उसके बाद लगातार कई मैचों में जीत हासिल की। इस पीकेएल सीजन की सबसे बेहतरीन टीम पटना पाइरेट्स को उन्होंने दो बार हराया। एक समय टीम प्लेऑफ में जाती हुई दिख रही थी लेकिन उसके बाद निरंतरता की कमी की वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
टीम के नेगेटिव प्वॉइंट्स
पीकेएल के 8वें सीजन में जयपुर पिंक पैंथर्स की सबसे बड़ी कमी ये रही कि टीम पूरी तरह से एकजुट होकर नहीं खेल सकी। अगर अर्जुन देशवाल रेडिंग में अच्छा प्रदर्शन करते थे तो उन्हें दूसरे तरफ से कोई सपोर्ट नहीं मिलता था। वहीं डिफेंस भी पूरी तरह से एकजुट होकर नहीं खेल सका। शाहुल कुमार और संदीप धुल ने प्वॉइंट्स तो लिए लेकिन उससे ज्यादा गलतियां की। यही वजह रही कि टीम उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। धर्मराज चेरालाथन भी अपने अनुभव के हिसाब से टैकल नहीं कर पाए।
टीम के पॉजिटिव प्वॉइंट्स
जयपुर पिंक पैंथर्स के लिए पीकेएल के 8वें सीजन में विशाल जैसे डिफेंडर्स का परफॉर्मेंस पॉजिटिव प्वॉइंट रहा। उन्होंने 21 मैचों में 39 प्वॉइंट हासिल किए। उनका टैकल स्ट्राइक रेट 34 प्रतिशत रहा। वहीं अर्जुन देशवाल का परफॉर्मेंस टीम के लिए सबसे बड़ा पॉजिटिव प्वॉइंट रहा। उन्होंने जिस तरह से टीम को रेडिंग डिपार्टमेंट में लीड किया वो वाकई में काबिलेतारीफ रहा। अर्जुन देशवाल को हम पीकेएल के 8वें सीजन में जयपुर के लिए सबसे बड़ा प्लस प्वॉइंट कह सकते हैं।
किन खिलाड़ियों का परफॉर्मेंस निराशाजनक रहा
पीकेएल के 8वें सीजन में जयपुर पिंक पैंथर्स की टीम अगर किसी प्लेयर से सबसे ज्यादा निराश होगी तो वो दिग्गज ऑलराउंडर दीपक हूडा हैं। दीपक हूडा जिस स्तर के खिलाड़ी हैं, उनका परफॉर्मेंस उस तरह का नहीं रहा। 17 मैचों में उन्होंने केवल 120 ही रेड प्वॉइंट हासिल किए। इस दौरान वो महज चार ही बार सुपर-10 लगा सके।
दीपक हूडा अगर रेडिंग डिपार्टमेंट में अर्जुन देशवाल का पूरा साथ देते तो जयपुर पिंक पैंथर्स की स्थिति अलग हो सकती थी। वो लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए और टीम के खराब परफॉर्मेंस का बड़ा कारण ये भी रहा। वहीं टीम के सबसे अनुभवी डिफेंडर धर्मराज चेरालाथन ने भी निराश किया।
किन खिलाड़ियों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया
जयपुर पिंक पैंथर्स के लिए पीकेएल के 8वें सीजन में युवा रेडर अर्जुन देशवाल ने उम्मीद से बढ़कर खेल दिखाया। इस रेडर ने अकेले दम पर टीम को कई मैचों में जीत दिलाई। अर्जुन देशवाल ने 22 मैचों में 268 प्वॉइंट हासिल किए और इस पीकेएल सीजन दूसरे सबसे ज्यादा रेड प्वॉइंट हासिल करने वाले प्लेयर रहे। उनसे आगे सिर्फ पवन सेहरावत ही थे जिन्होंने 24 मैचों में 320 प्वॉइंट हासिल किए।
अर्जुन देशवाल ने 22 मैचों में 16 बार सुपर-10 लगाया। इस दौरान छह बार उन्होंने सुपर रेड भी लगाया। डू और डाई रेड में उन्होंने 44 प्वॉइंट हासिल किए जो इस सीजन का सेकेंड बेस्ट है। इसके अलावा उनका औसत रेड प्वॉइंट 12.14 का रहा। इससे पता चलता है कि अर्जुन देशवाल का इम्पैक्ट कितना बड़ा रहा।
आगामी सीजन के लिए टीम को क्या बदलाव करने चाहिए
जयपुर पिंक पैंथर्स को अपने रेडिंग डिपार्टमेंट को मजबूत करने की जरूरत है। उन्हें अर्जुन देशवाल जैसे एक और प्लेयर की जरूरत है, ताकि किसी एक खिलाड़ी पर वो ज्यादा निर्भर ना रहें। इसके अलावा डिफेंस को भी टीम को मजबूत करना होगा। टीम को एक बेहतरीन कप्तान की भी जरूरत है। बीच सीजन बार-बार कप्तान बदलने से परफॉर्मेंस पर काफी असर पड़ता है।
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