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फुटबॉल समाचार

मां की मौत भी सुम​ति को फुटबॉल खेलने से नहीं रोक पाई

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Published at :January 15, 2020 at 11:54 PM
Modified at :January 15, 2020 at 11:54 PM
मां की मौत भी सुम​ति को फुटबॉल खेलने से नहीं रोक पाई

झारखंड के गुमला जिले में एक छोटा सा गांव है लोंड्रा और इसी गांव में रहने वाले एक किसान की बेटी इंडिया की अंडर-17 वुमेन्स फुटबॉल टीम के लिए खेलती है।

[KH_ADWORDS type="3" align="center"][/KH_ADWORDS] सुम​ति कुमारी स्ट्राइकर की पोजिशन पर खेलती है और इसी साल देश में होने वाले फीफा अंडर-17 वुमेन्स वर्ल्ड कप की तैयारी कर रही इंडियन टीम का अहम हिस्सा भी बन गई हैं। हालांकि, उनका यह सफर आसान नहीं रहा और छोटी सी उम्र में ही उन्हें गरीबी, सोसाइटी और अपनी मां की मौत तक से जूझना पड़ा। पिछले साल इंडियन टीम अक्टूबर में भूटान में होने वाले अं​डर-15 सैफ वुमेन्स चैम्पियशिप के रवाना होने के लिए तैयार थी। उसी समय सुम​ति को खबर मिली की उनकी मां का देहांत हो गया है। सुमति बताती हैं, "मैं वापस घर जाना चाहती थी, लेकिन उसी समय मैं टीम के लिए खेलना भी चाहती थी। जब मेरे घर में स्थिति ऐसी है तो मुझे पता है कि मुझे खेल में और मेहनत करनी पड़ेगी। मैं जानती हूं कि प्रोफेशनल प्लयेर बनने और परिवार की मदद करने के लिए मुझे लगातर मेहनत करनी होगी और खुद को बेहतर करना होगा।" [KH_ADWORDS type="4" align="center"][/KH_ADWORDS]

सैफ कप में किया शानदार प्रदर्शन

उन्होंने थिम्फू में हुए टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और देश के लिए अपना पहला गोल भी दागा। उन्होंने टूर्नामेंट में कुल तीन गोल किए और इंडियन टीम ने खिताब भी अपने नाम किया। सुमति ने कहा, "गोल करने के बाद मुझे मां की याद आई। जब भी मैं पिच पर कदम रखती हूं, मुझे उनकी याद आती है। मुझे याद आता है कि उन्होंने हमारे परिवार के लिए क्या-क्या किया। भूटान में हुए टूर्नामेंट से मैंने बहुत कुछ सीखा और अपने देश के लिए खिताब जीतकर हमें बहुत गर्व महसूस हुआ। मैं बहुत खुश थी क्योंकि मुझे महसूस हुआ कि मेरी मां भी मुझपर बहुत गर्व महसूस करती।" उन्होंने 2016 में फुटबॉल खेलना शुरू किया था और छोटे से गांव से ताल्लुक रखने के बावजूद परिवार ने हमेशा उनका सपोर्ट किया है। [KH_RELATED_NEWS title="Related News|आर्टिकल नीचे जारी है"][/KH_RELATED_NEWS] सुमति ने कहा, "मेरे गांव में लड़के फुटबॉल खेलते थे और उनको देखकर मुझे भी खेलने का मन हुआ। मेरे माता-पिता ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और फुटबॉल खेलने के लिए मेरा सपोर्ट किया। वे हमेशा मुझसे कहते हैं कि अगर लड़के खेल सकते हैं तो लड़की क्यों नहीं।" मुंबई में हाल में हुए अंडर-17 वुमेन्स फुटबॉल टूर्नामेंट 2019 में भी सुमति खेली थी और टीम के लिए दमदार प्रदर्शन किया था। इंडियन टीम टूर्नामेंट में दूसरे पायदान पर रही थी।
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