3 बड़े कारण क्यों CSK आईपीएल 2026 में हुई बुरी तरह फेल

(Courtesy : IPL)
IPL 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स का प्रदर्शन फैंस की उम्मीदों से बिल्कुल उलट रहा।
आईपीएल 2026 के 65वें मुकाबले में गुजरात टाइटंस से अहमदाबाद में हार झेलने के बाद चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) टूर्नामेंट से बाहर हो गई। हर सीजन की तरह आईपीएल 2026 में भी फैंस CSK को खिताब का बड़ा दावेदार मान रहे थे। इस बार टीम में कई युवा खिलाड़ियों की भरमार थी और फैंस को उम्मीद थी कि CSK एक बार फिर प्लेऑफ में जगह बना लेगी।
लेकिन एमएस धोनी की अनुपस्थिति में CSK पूरे सीजन कभी भी लय में नजर नहीं आई। बता दें, हालात ऐसे हो गए कि टूर्नामेंट के आखिरी दौर तक चेन्नई को अपनी जीत से ज्यादा दूसरे टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना पड़ा, लेकिन गुजरात टाइटंस के खिलाफ अहमदाबाद में मिली हार ने उन सभी उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया।
ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी वाली टीम बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी तक, लगभग हर विभाग में संघर्ष करती दिखी। इसी कड़ी में यहां हम आपको वो 3 बड़े कारण बताने जा रहे हैं, जिनकी वजह से चेन्नई सुपर किंग्स IPL 2026 में बुरी तरह फेल हो गई।
इन कारणों के चलते चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल 2026 में हुई फेल
ऋतुराज गायकवाड़ की खराब कप्तानी

आईपीएल 2026 में सबसे ज्यादा सवाल ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी पर उठे। एमएस धोनी की गैरमौजूदगी में इस बार उनकी कप्तानी में वह आत्मविश्वास नजर नहीं आया, जिसके लिए CSK जानी जाती रही है।
इससे यह साफ समझ आया कि चेन्नई की टीम अभी भी धोनी पर कितना निर्भर करती है। आंकड़े बताते हैं कि गायकवाड़ की कप्तानी में सुपर किंग्स अब तक 33 मैचों में सिर्फ 14 मैच ही जीत सकी है, जबकि धोनी की कप्तानी में टीम ने 235 में से 236 मुकाबले जीते थे। ये आंकड़े खुद-ब-खुद सारी कहानी बयां करते हैं,
इस सीजन कई मुकाबलों में गायकवाड़ के फैसले समझ से बाहर दिखे। चाहे गेंदबाजी बदलाव हो या फिर फील्ड सेटिंग, टीम अक्सर दबाव में नजर आई। इसके अलावा, टीम का बॉडी लैंग्वेज भी कई बार कमजोर दिखा। यही वजह रही कि CSK पूरे सीजन कभी भी एक चैंपियन टीम जैसी नजर नहीं आई।
कई बड़े खिलाड़ियों का खराब प्रदर्शन
CSK की हार की सबसे बड़ी वजहों में से एक उसके बड़े खिलाड़ियों का फ्लॉप होना भी रहा है। टीम के कई बड़े खिलाड़ी पूरे सीजन उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। हालांकि, कुछ मैचों में संजू सैमसन ने अच्छा प्रदर्शन जरूर किया और उन मुकाबलों में उन्हें जीत भी मिली, लेकिन इस सीजन वह 14 मैचों में दो शतक लगाने के बावजूद सिर्फ 477 रन ही बना सके।
इस सीजन कई मैचों में टॉप ऑर्डर लगातार संघर्ष करता रहा, क्योंकि कप्तान गायकवाड़ खुद पूरे सीजन फ्लॉप रहे और सिर्फ 123.45 की स्ट्राइक रेट से सिर्फ 377 रन ही बना सके। सबसे बड़ी बात यह रही कि नंबर 3 की पोजिशन पर कोई बल्लेबाज उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका, जिसके चलते हमेशा प्लेइंग XI में बदलाव भी करना पड़ा।
इसके अलावा, मिडिल ऑर्डर भी कई मैचों में दबाव में टूटता नजर आया। टीम के स्टार खिलाड़ी शिवम दुबे भी इस सीजन कुछ खास नहीं कर सके। वह इस सीजन अपने दम पर कोई भी मैच नहीं जीता सके और ना ही किसी मैच में बहुत अच्छा फिनिश कर सके। कई मैचों में टीम को अच्छी शुरुआत मिली ही नहीं और जब मिली, तब मिडिल ऑर्डर उसे बड़े स्कोर में बदलने में नाकाम रहा।
बल्लेबाजी के अलावा गेंदबाजी विभाग की हालत भी कुछ अलग नहीं रही। उनके गेंदबाज पावरप्ले और डेथ ओवरों में लगातार रन लुटाते रहे। यही कारण रहा कि CSK कई मुकाबलों में पहले ही गेम से बाहर हो गई।
अच्छे खिलाड़ियों का चोटिल होकर बाहर होना
CSK को इस सीजन कई खिलाड़ियों की चोटों ने भी काफी नुकसान पहुंचाया। कई अहम खिलाड़ी सीजन से ठीक पहले या बीच टूर्नामेंट में ही चोटिल होकर बाहर हो गए, जिससे टीम का कॉम्बिनेशन पूरी तरह बिगड़ गया।
नेथन एलिस, खलील अहमद, आयुष म्हात्रे, रामकृष्ण घोष और जेमी ओवरटन जैसे कई अच्छे खिलाड़ी अहम मैचों से पहले ही चोटिल होकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए, जिसने टीम को काफी नुकसान पहुंचाया।
बार-बार अलग-अलग खिलाड़ियों के चोटिल होने के चलते हर कुछ मैचों के बाद प्लेइंग XI भी बदलती नजर आई। इसका असर टीम की स्थिरता पर भी साफ दिखाई दिया। कई युवा खिलाड़ियों को अचानक मौके मिले, लेकिन लगातार बदलावों की वजह से टीम सही संतुलन नहीं बना पाई।
सबसे बड़ा असर यह हुआ कि टीम कभी अपनी बेस्ट XI के साथ लंबे समय तक खेल ही नहीं सकी। इसी वजह से CSK पूरे सीजन एक सेट टीम की तरह नजर नहीं आई और उन्हें सिर्फ 6 जीत के साथ ही टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।
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