व्हाट्सऐप ग्रुप से एशियन कप तक: जानिए सुष्मिता लेपचा की कहानी कैसे भारतीय महिला फुटबॉल टीम में हुई उनकी जगह पक्की

(Courtesy : AIFF)
एशियन कप 2026 में भारतीय महिला फुटबॉल टीम अपने अभियान की शुरुआत 4 मार्च को करेगी।
एक दिन सुष्मिता लेपचा ने खुद को भारतीय महिला फुटबॉल टीम के व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा हुआ पाया। इससे पहले उन्हें चयन को लेकर कोई सूचना नहीं मिली थी। कुछ सेकंड के लिए वह हैरान रह गईं।
“मुझे ग्रुप में जोड़ा गया, और उससे पहले मुझे कोई जानकारी नहीं दी गई थी,” उन्होंने याद करते हुए कहा। यह उलझन तब तक बनी रही, जब तक उनके ईस्ट बंगाल क्लब के कोच एंथनी एंड्रूज ने इसकी पुष्टि नहीं की। “उन्होंने कहा, ‘हाँ, तुम्हें बुलावा आया है’,” सुष्मिता ने बताया।
जिस खिलाड़ी ने कभी भारत की नीली जर्सी पहनने का सपना भी नहीं देखा था, उसके लिए यह पल किसी सपने जैसा था। यह उनका पहला राष्ट्रीय शिविर था, और वह भी सीधे एएफसी महिला एशियन कप ऑस्ट्रेलिया 2026 की तैयारी के लिए, जहां भारत ने 23 साल बाद क्वालीफाई किया था।
सुष्मिता 29 वर्ष की हैं। उनका फुटबॉल सफर किसी अकादमी या संगठित युवा प्रणाली से नहीं, बल्कि उत्तर पश्चिम बंगाल के कालिम्पोंग से शुरू हुआ, जहां लड़कियों के लिए फुटबॉल लगभग न के बराबर था।
जहां वह पली-बढ़ीं, वहां फुटबॉल लड़कों का खेल माना जाता था। खेल में उनकी एंट्री उनके बड़े भाई के जरिए हुई। “लड़कियों के लिए फुटबॉल में कुछ खास नहीं था। मैंने अपने भाई को देखकर सीखा। वह फुटबॉल खिलाड़ी थे, और उन्हें खेलते देखकर मुझे भी खेलने की इच्छा हुई,” सुष्मिता ने पर्थ में the-aiff.com से बातचीत में कहा।
फुटबॉल के जरिए उन्होंने दोस्त बनाए, और यही दोस्ती उनके गृह नगर से बाहर निकलने की राह बनी, क्योंकि खेल अब सिर्फ शौक नहीं रहा था।
“एक दिन एक स्थानीय कोच, जिन्हें हम ‘मिनी अंकल’ कहते थे, मुझे दार्जिलिंग में एक स्थानीय टूर्नामेंट खेलने ले गए।”उस यात्रा ने उनकी दुनिया को बड़ा बना दिया। वहां से उन्होंने और स्थानीय मैच खेलने शुरू किए और उनका दायरा धीरे-धीरे बढ़ता गया।

आखिरकार उन्होंने कलकत्ता महिला फुटबॉल लीग में सेवायनी सोशल वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के लिए खेलना शुरू किया। इसके बाद वह पश्चिम बंगाल से बाहर मुंबई की पीआईएफए स्पोर्ट्स एफसी के लिए खेलने गईं, और फिर 2020 में किकस्टार्ट एफसी ने उन्हें मौका दिया।
“किकस्टार्ट ने मुझसे मेरे खेल के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स मांगे। उन्हें देखने के बाद उन्होंने मुझे बुलाया। मैंने किकस्टार्ट में काफी समय बिताया और बहुत कुछ सीखा। वहीं खेलते हुए मुझे सीनियर महिला राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप (राजमाता जीजाबाई ट्रॉफी) के लिए बंगाल राज्य टीम में बुलावा मिला। 2023 में बंगाल ने अमृतसर में फाइनल राउंड के लिए क्वालीफाई किया। 2024 में हम कोलकाता में सेमीफाइनल तक पहुंचे।”
उनके प्रदर्शन पर नजरें टिक गईं। 2023-24 राजमाता जीजाबाई ट्रॉफी के दौरान कोलकाता में खेलते हुए उन्होंने ईस्ट बंगाल एफसी का ध्यान खींचा।
“जब ईस्ट बंगाल ने संपर्क किया, तो मुझे लगा यह मौका नहीं छोड़ना चाहिए। यह मेरा राज्य क्लब है और मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मेरे माता-पिता और भाई ने भी मुझे यह मौका न गंवाने के लिए प्रेरित किया। यह एक बड़ा क्लब है।”
ईस्ट बंगाल ने सुष्मिता लेपचा को दिलाई पहचान
ईस्ट बंगाल से जुड़ना उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुआ। यहां उन्हें अनुभवी भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और कोच एंथनी एंड्रूज़ का मार्गदर्शन मिला।
“जब मैं जुड़ी, तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे आशालता देवी, स्वीटी देवी और अंजू तमांग जैसी भारतीय राष्ट्रीय टीम खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलेगा। मैं बहुत खुश थी। मुझे पता था कि उनसे सीखने को मिलेगा।”
ईस्ट बंगाल में उन्होंने भारतीय फुटबॉल के उच्चतम स्तर की बारीकियों को समझना शुरू किया। “ईस्ट बंगाल में मैंने जाना कि फुटबॉल में पेशेवर होना वास्तव में क्या होता है। मैं आज भी हर दिन सीख रही हूं और खुद को बेहतर बना रही हूं।”
मोशाल गर्ल्स ने 2024-25 इंडियन वुमेंस लीग का खिताब जीता, जिससे उन्हें एएफसी महिला चैंपियंस लीग और सैफ महिला क्लब चैंपियनशिप में जगह मिली। इसलिए राष्ट्रीय टीम में नई होने के बावजूद एशिया के शीर्ष स्तर पर खेलना उनके लिए नया अनुभव नहीं होगा।
“जब मैंने पहली बार एएफसी महिला चैंपियंस लीग में खेला, तो वह शानदार अनुभव था। मैच दर मैच मुझे एहसास हुआ कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल कहीं ज्यादा कठिन है। उस स्तर पर कुछ भी आसान नहीं होता। वह सीख अमूल्य थी।
“लेकिन सच कहूं तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। जब मैंने खेलना शुरू किया था, तब राष्ट्रीय टीम का सपना नहीं था। लक्ष्य सिर्फ खेल का आनंद लेना था,” सुष्मिता ने कहा।
लेकिन निरंतर प्रगति और सही मार्गदर्शन ने उनकी दिशा बदल दी। “क्लब, कोच और ईस्ट बंगाल में सभी ने मेरा समर्थन और हौसला बढ़ाया। ईस्ट बंगाल और कोच एंथनी का मेरे आज यहां तक पहुंचने में बड़ा योगदान है।”
उनका पहला बुलावा सीधे विदेशी कोच अमेलिया वाल्वेर्दे के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय माहौल में आया। तुर्किये और ऑस्ट्रेलिया में लगे तैयारी शिविर उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव थे।
“जब मैं राष्ट्रीय टीम के साथ तुर्किये और ऑस्ट्रेलिया गई, तो यह मेरा पहला गंभीर शिविर था और वह भी एक बड़े टूर्नामेंट की सीधी तैयारी। मैं घबराई हुई भी थी और उत्साहित भी।”
हालांकि ईस्ट बंगाल में कुछ खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का अनुभव उनके काम आया। एशियन कप के लिए भारत की 26 सदस्यीय टीम में रेड एंड गोल्ड ब्रिगेड की आठ खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें सुष्मिता भी हैं।
“जब मैंने ईस्ट बंगाल में शुरुआत की थी, तो मेरा लक्ष्य सिर्फ क्लब के लिए अच्छा खेलना था। क्लब और कोच एंथनी के समर्थन से ही मुझे राष्ट्रीय टीम का यह मौका मिला। मेरे लिए यही एक बड़ी उपलब्धि है।
“आगे मैं बस अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती हूं, मजबूत रहना चाहती हूं और लगातार सुधार करना चाहती हूं। यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण टूर्नामेंट है, और मैं टीम की हर संभव मदद करना चाहती हूं,” सुष्मिता ने कहा।
अपने भाई के साथ स्थानीय टूर्नामेंट खेलने से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्लब प्रतियोगिताओं तक, चयन के लिए वीडियो क्लिप भेजने से लेकर व्हाट्सऐप नोटिफिकेशन के जरिए राष्ट्रीय टीम का बुलावा मिलने तक — सुष्मिता लेपचा का सफर कभी भी तयशुदा नहीं रहा।
अब वह पहली बार भारत की जर्सी पहनने की उम्मीद कर रही हैं, और वह भी एक बड़े टूर्नामेंट में। जब उन्होंने अपने घर में खेलना शुरू किया था, तब शायद उन्होंने यह सपना नहीं देखा था। लेकिन अब शायद, कहीं न कहीं, वह यह मानने लगी हैं कि यही उनकी सही जगह है।
भारत एएफसी महिला एशियन कप ऑस्ट्रेलिया 2026 में अपना पहला मुकाबला 4 मार्च को वियतनाम के खिलाफ 16:30 बजे (भारतीय समयानुसार) खेलेगा। मैच का सीधा प्रसारण फैनकोड पर किया जाएगा।
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