डिफेंडिंग चैंपियन के पास कई जबरदस्त प्लेयर मौजूद हैं।

कोरोना वायरस की वजह से लम्बे गैप के बाद प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) की वापसी हो रही है। 29 से 31 अगस्त तक आठवें सीजन के लिए ऑक्शन हुआ और इस बार कई खिलाड़ियों के लिए बिडिंग हुई। हर टीम ने अपने-अपने कॉम्बिनेशन के हिसाब से प्लेयर्स को सेलेक्ट किया।

अपने प्लान और रणनीति के हिसाब से फ्रेंचाइजी ने प्रो कबड्डी लीग के सीजन 8 के ऑक्शन में बिडिंग की और कुछ खिलाड़ियों को खरीदने में उन्हें सफलता हासिल हुई तो कुछ को वो नहीं खरीद पाए।

पीकेएल ऑक्शन के बाद हम आपको सभी टीमों के वीकनेस और स्ट्रेंथ के बारे में बता रहे हैं और इस आर्टिकल में हम डिफेंडिंग चैंपियन बंगाल वॉरियर्स के बारे में बात करेंगे।

टीम की स्ट्रेंथ

रेडिंग है बंगाल वॉरियर्स की सबसे बड़ी ताकत

बंगाल वॉरियर्स का रेडिंग डिपार्टमेंट काफी शानदार है। उनके पास मनिंदर सिंह, रिशांक देवाडिगा, सुकेश हेगड़े और रविंदर कुमावत जैसे रेडर हैं। ये सभी खिलाड़ी मैच का पासा पलटने की क्षमता रखते हैं। बंगाल वॉरियर्स की स्ट्रांग रेडिंग का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सीजन फाइनल मुकाबले में मनिंदर सिंह के नहीं खेलने के बावजूद टीम ने जीत हासिल की थी।

टीम के पास मनिंदर सिंह जैसा रेडर है जो लीग के टॉप रेडर्स में से एक हैं। पिछले सीजन उन्होंने 20 मैचों में 205 रेड प्वॉइंट हासिल किया था। उनका रेड स्ट्राइक रेट 64 प्रतिशत था। मनिंदर सिंह की खासियत ये है कि वो रेडिंग करते वक्त अचानक से अपना पेस बढ़ाते हैं और डिफेंडर के कुछ समझने से पहले उसे टच करके वापस आ जाते हैं। इससे डिफेंस को बिल्कुल भी मौका नहीं मिलता है।

वहीं सुकेश हेगड़े एक सहयोगी रेडर के रूप में काफी शानदार काम करते हैं। डू ओर डाई रेड में अक्सर उन्हीं को भेजा जाता है और वहां पर वो काफी कामयाब रहते हैं। प्रो कबड्डी लीग के दूसरे सीजन में उन्होंने डू और डाई रेड में 26 प्वॉइंट हासिल किए थे और उनकी ये खासियत उन्हें और खिलाड़ियों से अलग बनाती है।

रिशांक देवाडिगा के आने से मनिंदर के ऊपर से दबाव होगा कम

प्रो कबड्डी लीग में पिछले सीजन रिशांक देवाडिगा यूपी योद्धा की टीम का हिस्सा थे लेकिन 8वें सीजन में वो बंगाल वॉरियर्स के लिए खेलेंगे। रिशांक एक अनुभवी रेडर तो हैं ही साथ ही में उन्हें कप्तानी का भी काफी एक्सपीरियंस है। वो पीकेएल में यूपी योद्धा की कप्तानी कर चुके हैं। इसके अलावा 2017-18 के सीनियर नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप में उन्होंने अपनी कप्तानी में महाराष्ट्र को 11 साल बाद चैंपियन बनाया था।

रिशांक के आने से कप्तान मनिंदर सिंह को काफी मदद मिलेगी। वो अपने कप्तानी के अनुभव मनिंदर के साथ शेयर कर सकते हैं। इससे काफी दबाव मनिंदर के ऊपर से कम हो जाएगा।

मोहम्मद ईस्माइल नबीबख्श के होने से टीम का बैंलेस शानदार होगा

प्रो कबड्डी लीग में बंगाल वॉरियर्स का एक और स्ट्रांग प्वॉइंट ये है कि उनके पास मोहम्मद नबीबख्श जैसा बेहतरीन ऑलराउंडर मौजूद है। नबीबख्श ने अभी तक प्रो कबड्डी में कुल मिलाकर 23 मैच खेले हैं और इस दौरान रेडिंग में 92 प्वॉइंट और डिफेंस में 30 प्वॉइंट हासिल किए हैं।

पिछले सीजन भी मनिंदर सिंह के चोटिल होने के बाद उन्होंने बंगाल वॉरियर्स को चैंपियन बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाई थी। नबीबख्श नाजुक मौकों पर प्वॉइंट लाने में सक्षम हैं। जितना खूबसूरत उनका डिफेंस होता है, उतना ही बेहतरीन अटैक भी वो करते हैं। उनकी वजह से टीम का बैलेंस काफी शानदार रहेगा और टीम के ऑल आउट होने के चांसेस कम रहेंगे।

वीकनेस

बंगाल वॉरियर्स के पास अच्छे डिफेंडर्स की है कमी

बंगाल वॉरियर्स का डिफेंस प्रो कबड्डी लीग में इस बार उतना अच्छा नहीं है। टीम के पास रिंकू नरवाल, सचिन विट्टाला, प्रवीण, विजिन थंगादुरई और दर्शन जे जैसे डिफेंडर मौजूद हैं। इसके अलावा ऑलराउंडर मोहम्मद नबीबख्श भी अपना योगदान दे सकते हैं।

हालांकि इन सभी डिफेंडर्स के पास वैसा एक्सपीरियंस नहीं है। केवल रिंकू नरवाल ने ही 100 से ज्यादा टैकल प्वॉइंट हासिल किए हैं। पिछले सीजन जीवा कुमार और बलदेव सिंह जैसे अनुभवी डिफेंडर बंगाल वॉरियर्स के पास थे लेकिन इस बार उन्हें रिलीज कर दिया गया है। ऐसे में अनुभव की कमी बंगाल को खलेगी।

बलदेव सिंह राइट कॉर्नर में एक दीवार की तरह डटे रहते थे और उसकी वजह से रेडर्स पर काफी दबाव रहता था। इस बार टीम को ये कमी जरूर खलने वाली है।

टीम

रेडर्स- मनिंदर सिंह, रिशांक देवाडिगा, सुकेश हेगड़े, रविंदर कुमावत, आकाश पिकालमुंदे और सुमित सिंह।

ऑलराउंडर्स- मोहम्मद नबीबख्श, मनोज गौड़ा और रोहित।

डिफेंडर्स- रिंकू नरवाल, सचिन विट्टाला, प्रवीण, विजिन थंगादुरई, रोहित बन्ने, दर्शन जे और अबोजर मोहाजेरमिघानी।