दिग्गज रेडर ने अपनी कप्तानी में बेंगलुरू बुल्स को चैंपियन बनाया था।

रोहित कुमार प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के दिग्गज प्लेयर्स में से एक हैं। उन्हें मैट पर उनके शांत स्वभाव के लिए जाना जाता है और उन्होंने अभी तक पीकेएल में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। इस दिग्गज खिलाड़ी ने अपनी कप्तानी में छठे सीजन में बेंगलुरू बुल्स को पीकेएल का चैंपियन बनाया था और खुद उनका परफॉर्मेंस भी काफी शानदार रहा था। पांचवें सीजन में रोहित कुमार दूसरे सबसे ज्यादा रेड प्वॉइंट हासिल करने वाले प्लेयर थे। तीसरे सीजन में अपने डेब्यू से लेकर अभी तक उन्होंने हर सीजन में कम से कम 100 रेड प्वॉइंट जरूर हासिल किए हैं।

उनके पास काफी एक्सपीरियंस भी है और इसीलिए वो जिस भी टीम में होते हैं उसको काफी फायदा होता है। इस आर्टिकल में हम आपको रोहित कुमार के प्रो कबड्डी लीग में अब तक के सफर के बारे में बताते हैं।

रोहित कुमार के पिता भी थे कबड्डी प्लेयर

पानीपत में 19 जनवरी 1990 को जन्मे रोहित कुमार के पिता भी कबड्डी प्लेयर थे और यहीं से उन्हें कबड्डी में जाने की प्रेरणा मिली। इसके अलावा उनके पिता दिल्ली पुलिस डिपार्टमेंट में भी काम करते थे। उनके पिता ने कबड्डी में करियर बनाने के लिए उन्हें काफी सपोर्ट किया। रोहित कुमार जहां से ताल्लुक रखते हैं वहां से मंजीत छिल्लर, मोहित छिल्लर और राकेश कुमार जैसे दिग्गज प्लेयर्स निकले हैं और रोहित हमेशा इनकी ही तरह बनना चाहते थे। उन्होंने इन खिलाड़ियों के मैच देखकर काफी कुछ सीखा।

रोहित कुमार ने स्कूल के दिनों से ही कबड्डी में एक नया मुकाम हासिल कर लिया। उन्होंने कई सारी उपलब्धियां हासिल कीं। 2009 में स्पोर्ट्स कोटा के तहत वो इंडियन नेवी का हिस्सा बने।

डेब्यू सीजन में पटना पाइरेट्स को टाइटल जिताने में मदद की

रोहित कुमार को तो वैसे पीकेएल के पहले सीजन के ऑक्शन में ही सेलेक्ट कर लिया गया था लेकिन सर्विसेज स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड ने उन्हें रिलीज करने से इंकार कर दिया और वो पीकेएल में नहीं खेल पाए। वो लगातार दो सीजन तक पीकेएल का हिस्सा नहीं रहे। हालांकि तीसरे सीजन में पटना पाइरेट्स ने उन्हें खरीदा और उन्होंने अपना डेब्यू किया।

पटना पाइरेट्स की तरफ से अपने पहले ही सीजन में रोहित कुमार ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और 12 मैचों में कुल 109 प्वॉइंट हासिल किए। उन्होंने परदीप नरवाल का काफी अच्छा साथ दिया। उन्हें उस सीजन का मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर चुना गया। पटना पाइरेट्स ने पीकेएल का टाइटल जीता और इसमें रोहित कुमार के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।

चौथे सीजन में बेंगलुरू बुल्स का हिस्सा बने

तीसरे सीजन में पटना के लिए बेहतरीन प्रदर्शन करने के बावजूद रोहित कुमार को रिलीज कर दिया गया और चौथे सीजन में वो बेंगलुरू बुल्स की टीम का हिस्सा बने। उस सीजन 14 मैचों में उन्होंने 100 प्वॉइंट हासिल किए। इसके बाद पांचवां सीजन रोहित कुमार के लिए काफी जबरदस्त रहा। उन्होंने 22 मैचों में कुल 231 प्वॉइंट हासिल किए और उस सीजन दूसरे सबसे ज्यादा प्वॉइंट हासिल करने वाले प्लेयर थे। उन्होंने यूपी योद्धा के खिलाफ एक ही मैच में 32 प्वॉइंट हासिल किए और किसी एक मैच में 30 या उससे ज्यादा प्वॉइंट हासिल करने का रिकॉर्ड बनाया।

पांचवें सीजन में जबरदस्त प्रदर्शन के बाद फ्रेंचाइजी ने उन्हें छठे सीजन के लिए भी रिटेन किया और यहां तक कि उन्हें कप्तान भी बना दिया गया। ये फैसला काफी मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ। रोहित कुमार ने जबरदस्त तरीके से कप्तानी करते हुए बेंगलुरू बुल्स को पीकेएल का चैंपियन बना दिया। टीम ने फाइनल मुकाबले में गुजरात जायंट्स को हराकर खिताब जीता। रोहित कुमार ने इस सीजन 24 मुकाबले खेले और कुल 171 प्वॉइंट हासिल किए। उन्होंने टीम के मेन रेडर पवन सेहरावत का काफी अच्छा साथ दिया।

प्रो कबड्डी लीग में उनके आंकड़े

केवल चार सीजन में ही रोहित कुमार पीकेएल के टॉप-5 रेडर्स की लिस्ट में शामिल हो गए। इसके अलावा लीग में सबसे ज्यादा सुपर 10 लगाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में भी वो चौथे नंबर पर पहुंच गए। वो अभी तक कुल मिलाकर 670 रेड प्वॉइंट हासिल कर चुके हैं। रोहित अपने फ्रॉग जम्प के लिए काफी मशहूर हैं और इससे उन्होंने काफी सफलता हासिल की है।

तेलुगु टाइटंस की तरफ से खेलते हुए नजर आएंगे

लगातार चार सीजन तक बेंगलुरू बुल्स की तरफ से खेलने के बाद रोहित कुमार अब अगले सीजन तेलुगु टाइटंस की तरफ से खेलते हुए नजर आएंगे। ऑक्शन से पहले फ्रेंचाइजी ने उन्हें रिलीज कर दिया था और तेलुगु टाइटंस ने उन्हें 36 लाख की रकम में खरीदा। तेलुगु टाइटंस के लिए रोहित कुमार कप्तानी के भी दावेदार हो सकते हैं। उनके ऊपर टीम काफी डिपेंड करेगी।