कई ऐसे प्लेयर रहे जिन्हें टीम में जगह नहीं मिली है।

एशियन गेम्स के लिए भारत की 24 सदस्यीय संभावित कबड्डी टीम का ऐलान कर दिया गया है। इस टीम में परदीप नरवाल और नवीन कुमार समेत प्रो कबड्डी लीग के कई बड़े सितारे शामिल हैं। टीम में एक तरफ जहां दीपक हूडा और गिरीश एर्नाक जैसे दिग्गज हैं तो दूसरी ओर जयदीप और मोहित गोयत जैसे युवाओं को भी मौका दिया गया है। बंगाल वॉरियर्स के कप्तान मनिंदर सिंह, बेंगलुरू बुल्स के कप्तान पवन सेहरावत, यूपी योद्धा के कप्तान नितेश कुमार, गुजरात जायंट्स के कप्तान सुनील कुमार, प्रवेश भैंसवाल, असलम ईनामदार और जयदीप जैसे कई खिलाड़ियों को इस संभावित प्लेयर्स की लिस्ट में जगह मिली है।

हालांकि इसके बावजूद कुछ ऐसे भी प्लेयर रहे जिन्होंने प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) में अपने परफॉर्मेंस से काफी प्रभावित किया था लेकिन वो एशियन गेम्स टीम में अपनी जगह नहीं बना पाए। हम आपको ऐसे ही कुछ खिलाड़ियों के बारे में बताएंगे जिन्हें इस टीम में जगह मिलनी चाहिए थी। आइए जानते हैं ये कौन-कौन से प्लेयर हैं।

1. सुरेंदर गिल (यूपी योद्धा)

यूपी योद्धा के लिए सुरेंदर गिल का परफॉर्मेंस पीकेएल के आठवें सीजन में काफी अच्छा रहा था। परदीप नरवाल के फॉर्म में ना होने की वजह से रेडिंग का सारा जिम्मा उनके ऊपर आ गया था और उन्होंने इस जिम्मेदारी को पूरी तरह से उठाया। सुरेंदर गिल ने पीकेएल सीजन-8 में 23 मैचों में 198 प्वॉइंट हासिल किए। वो टीम की तरफ से सबसे ज्यादा प्वॉइंट हासिल करने वाले रेडर रहे और ओवरऑल पांचवें पायदान पर रहे। सुरेंदर गिल ने सात सुपर रेड भी लगाए, वहीं औसत रेड प्वॉइंट के मामले में वो टूर्नामेंट में पहले पायदान पर रहे। ऐसे में उनको निश्चित तौर पर एशियन गेम्स के संभावितों में जगह मिलनी चाहिए थी।

2. सौरभ नांदल (बेंगलुरू बुल्स)

बेंगलुरू बुल्स टीम से एशियन गेम्स के लिए कप्तान पवन सेहरावत को सेलेक्ट किया गया है। हालांकि उनके ही टीम के खिलाड़ी और पीकेएल सीजन-8 के तीसरे बेस्ट डिफेंडर सौरभ नांदल को जगह नहीं मिली है। सौरभ नांदल ने 24 मैचों में 69 प्वॉइंट हासिल किए थे। उन्होंने छह सुपर टैकल किए और दो बार हाई फाइव भी लगाया। 56 प्रतिशत टैकल सक्सेस रेट से पता चलता है कि उनके अंदर काफी क्षमता है। ऐसे में सौरभ नांदल को भी एशियन गेम्स के लिए टीम में जगह मिलनी चाहिए थी। उन्हें अब इंटरनेशनल एक्सपोजर भी दिया जाना चाहिए।

3. सुमित (यूपी योद्धा)

एशियन गेम्स के लिए जो 24 सदस्यीय संभावित टीम चुनी गई है, उसमें यूपी योद्धा के युवा डिफेंडर सुमित का भी नाम नहीं है। सुमित ने पीकेएल के 8वें सीजन में जबरदस्त खेल दिखाया था। उन्होंने 24 मैचों में 62 प्वॉइंट हासिल किए थे और सबसे ज्यादा टैकल प्वॉइंट हासिल करने के मामले में वो टॉप-5 में रहे। नितेश कुमार के साथ उनकी जोड़ी विरोधी टीमों के लिए काफी घातक साबित हुई थी। हालांकि इसके बावजूद उनको एशियन गेम्स के संभावितों में नहीं रखा गया है। निश्चित तौर पर उन्हें जगह मिलनी चाहिए थी।

4. मंजीत (तमिल थलाइवाज)

तमिल थलाइवाज के युवा रेडर मंजीत ने पिछले दो पीकेएल सीजन से अपने परफॉर्मेंस से दिखाया है कि उनके अंदर काफी दमखम है। हालांकि इसके बावजूद एशियन गेम्स के संभावितों में उनका नाम नहीं है। मंजीत ने पीकेएल के सातवें सीजन में पुनेरी पलटन के लिए एक जबरदस्त रेडर की भूमिका निभाई थी। इसके बाद 8वें सीजन में तमिल थलाइवाज के लिए भी उन्होंने 20 मैचों में 167 प्वॉइंट हासिल किए। मंजीत लंबे कद के प्लेयर हैं और ऐसे में उन्हें रोकना काफी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा उनका फुटवर्क भी काफी बेहतरीन होता है। ऐसे में मंजीत भी एशियन गेम्स टीम का हिस्सा होने चाहिए थे।

5. राहुल चौधरी (पुनेरी पलटन)

“शो मैन” राहुल चौधरी भारतीय कबड्डी का एक बड़ा नाम हैं। उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड्स अपने नाम किए हैं। हालांकि पिछले कुछ पीकेएल सीजन से उनका फॉर्म काफी खराब रहा है और शायद यही वजह है कि उन्हें एशियन गेम्स टीम में जगह नहीं मिली। हालांकि राहुल चौधरी के ओवरऑल एक्सपीरियंस और रुतबे को देखते हुए उन्हें जरूर शामिल किया जाना चाहिए था। उनके पास इन बड़े टूर्नामेंट्स में खेलने का अनुभव है और वो पहले टीम को जीत दिला चुके हैं। ऐसे में उनकी कमी खली सकती है।

6. वी अजीत कुमार (यू-मुम्बा)

वी अजीत कुमार ने यू-मुम्बा के लिए पीकेएल सीजन-8 में उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया। इस प्लेयर ने 20 मैचो में 159 प्वॉइंट हासिल किए। इस दौरान उन्होंने छह सुपर-10 भी लगाए। अभिषेक सिंह की गैरमौजूदगी में उन्होंने कई मैचों में सनसनीखेज खेल दिखाया। अपनी स्किल से उन्होंने दिखाया कि वो किसी भी रेडर के लिए बेहतरीन असिस्ट की भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में एशियन गेम्स के लिए वो भी एक दावेदार हो सकते थे।

7. अजिंक्य पंवार (तमिल थलाइवाज)

पीकेएल के बीते सीजन तमिल थलाइवाज का परफॉर्मेंस अच्छा नहीं रहा लेकिन अजिंक्य पंवार जैसे खिलाड़ी जरूर उनके लिए पॉजिटिव प्वॉइंट रहे। डू और डाई सिचुएशन में उन्होंने जो स्किल दिखाई है वो काबिलेतारीफ है। उन्होंने कुल मिलाकर 18 मैचों में 114 प्वॉइंट बीते पीकेएल सीजन हासिल किए। इनमें से 42 प्वॉइंट उन्होंने डू और डाई सिचुएशन में हासिल किए। कई मैचों में इस तरह के प्लेयर की सबसे ज्यादा जरूरत होती है और ऐसे में वो एशियन गेम्स में अपनी अहम भूमिका निभा सकते थे।