इस युवा डिफेंडर ने बेहद कम समय में ही पीकेएल में अपना एक अलग मुकाम बना लिया है।

कबड्डी में डिफेंस का काफी महत्व होता है। अभी तक प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के इतिहास में कई दिग्गज डिफेंडर हुए हैं। अगर लीग की बात करें तो यहां पर मंजीत छिल्लर, रविंदर पहल, जीवा कुमार, नितेश कुमार, फजल अत्राचली, बलदेव सिंह और प्रवेश भैंसवाल जैसे दिग्गज डिफेंडर ने अपना जलवा दिखाया है। इन सबके अलावा युवा डिफेंडर विशाल भारद्वाज ने भी काफी प्रभावित किया है।

हिमाचल प्रदेश के रहने वाले विशाल ने तेलुगु टाइटंस की तरफ से खेलते हुए खुद को प्रो कबड्डी लीग के बेस्ट डिफेंडर्स में से एक साबित किया है। विशाल लगातार तीन सीजन में 60 या उससे ज्यादा टैकल प्वॉइंट हासिल करने वाले पीकेएल इतिहास के पहले खिलाड़ी हैं। वो एंकल होल्ड स्पेशलिस्ट हैं और खास बात ये है कि उनकी टाइमिंग लाजवाब होती है।

हम आपको इस आर्टिकल में प्रो कबड्डी लीग में विशाल भारद्वाज के अब तक के सफर के बारे में बताते हैं।

स्कूल लेवल से की कबड्डी की शुरूआत

1 जनवरी 1997 को हिमाचल प्रदेश के ऊना में जन्मे विशाल भारद्वाज ने शुरूआत में स्कूल लेवल पर कबड्डी खेलना शुरू किया। उनके सारे दोस्त क्रिकेट को काफी ज्यादा पसंद करते थे लेकिन विशाल भारद्वाज की दिलचस्पी कबड्डी में थी। उन्होंने आठवीं क्लास से ही कबड्डी खेलना शुरू कर दिया। उन्होंने इंटर स्कूल कबड्डी टूर्नामेंट्स में अपनी स्कूल टीम का प्रतिनिधित्व किया। वहां पर बेहतरीन परफॉर्मेंस करने के बाद कॉलेज में भी उन्होंने वैसा ही प्रदर्शन किया।

विशाल के टैलेंट को देखते हुए उन्हें बेहतर ट्रेनिंग के लिए बिलासपुर भेज दिया गया। वहां पर भी उन्होंने लगातार बेहतरीन परफॉर्मेंस दिया और 2016 में उनका सेलेक्शन जूनियर नेशनल टीम के लिए हो गया। उन्होंने तीन बड़े जूनियर कबड्डी टूर्नामेंट्स में इंडियन टीम का प्रतिनिधित्व किया और यहां तक कि गोल्ड मेडल भी जीता।

तेलुगु टाइटंस टीम के साथ की पीकेएल करियर की शुरूआत

विशाल भारद्वाज ने अपने प्रो कबड्डी लीग करियर की शुरूआत चौथे सीजन में तेलुगु टाइटंस टीम के साथ की थी। वो लगातार चार सीजन तक तेलुगु टाइटंस के लिए खेले और यहां तक कि छठे सीजन में टीम की कप्तानी भी की थी। महज 21 साल की उम्र में उन्होंने टीम का नेतृत्व किया और डिफेंस में बेहतरीन खेल भी दिखाया।

विशाल भारद्वाज के लिए पीकेएल का डेब्यू सीजन अच्छा नहीं रहा था और उन्हें मात्र दो मैचों में खेलने का मौका मिला था जिसमें उन्होंने सात प्वॉइंट हासिल किए थे।

पांचवें सीजन जबरदस्त प्रदर्शन

विशाल भारद्वाज को तेलुगु टाइटंस ने पांचवें सीजन के लिए रिटेन किया और उस सीजन उन्होंने जबरदस्त प्रदर्शन किया। भारद्वाज ने 22 मैचों में कुल मिलाकर 71 प्वॉइंट हासिल किए और सीजन के तीसरे सबसे बेस्ट डिफेंडर रहे। उन्होंने अपनी टीम के डिफेंस की रीढ़ रहे और उनका एवरेज काफी शानदार रहा।

उनके बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें छठे सीजन में तेलुगु टाइटंस का कप्तान बनाया गया और उस सीजन में भी उनका परफॉर्मेंस काफी शानदार रहा। उन्होंने 17 मैचों में 60 टैकल प्वॉइंट हासिल किए। विशाल भारद्वाज ने महज 21 साल की उम्र में कप्तानी करते हुए काफी मैच्योरिटी दिखाई। हालांकि बाकी प्लेयर्स का साथ नहीं मिलने की वजह से तेलुगु टाइटंस का परफॉर्मेंस उतना शानदार नहीं रहा और वो सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए।

प्रो कबड्डी लीग के सातवें सीजन के लिए भी टीम ने उन्हें रिटेन किया और इस बार भी वो उम्मीदों पर खरे उतरे। उन्होंने पीकेएल 7 में कुल मिलाकर 19 मुकाबले खेले और 63 प्वॉइंट हासिल किए।

आगामी आठवां सीजन और आगे का रास्ता

लगातार चार सीजन तक तेलुगु टाइटंस की तरफ से खेलने के बाद विशाल भारद्वाज आठवें सीजन में नई टीम की तरफ से खेलते हुए नजर आएंगे। तेलुगु टाइटंस ने उन्हें प्रो कबड्डी लीग ऑक्शन से पहले रिलीज कर दिया था और नीलामी के दौरान पुनेरी पलटन ने उन्हें खरीदा। आगामी सीजन में अब वो पलटन का हिस्सा होंगे।

तेलुगु टाइटंस की तरह पुनेरी पलटन को भी अपने पहले पीकेएल टाइटल का इंतजार है। विशाल भारद्वाज के आने से टीम का डिफेंस मजबूत हुआ है और वो आगामी सीजन अच्छा प्रदर्शन करना चाहेंगे। विशाल भारद्वाज के ऊपर सबकी निगाहें होंगी।