इस दिग्ग्ज खिलाड़ी ने खेल में अपार सफलता हासिल की।

प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) की शुरुआत से पहले ही अजय ठाकुर इंटरनेशनल लेवल पर एक स्टार प्लेयर बन चुके थे। 35 साल की उम्र में भले ही अब वो अपने पीक पर नहीं हैं लेकिन कबड्डी इतिहास में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बना ली है।

फैंस में उनके प्रति सम्मान और उनकी पॉपुलैरिटी कभी कम नहीं होने वाली है।

प्रो कबड्डी लीग के पहले की सफलता

अजय ठाकुर ने कबड्डी में अपना डेब्यू एयर इंडिया के लिए किया था और 2007 में एशियन इंडोर गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली इंडियन टीम का हिस्सा थे। इसके अलावा 2013 के एशियन इंडोर गेम्स और मार्शल आर्ट्स गेम्स में मेडल जीतने वाली टीम का भी वो हिस्सा थे।

भारतीय टीम के लिए जबरदस्त प्रदर्शन करने के बाद अजय ठाकुर ने 2014 में पीकेएल में अपना डेब्यू किया। लीग के पहले सीजन के ऑक्शन में अजय ठाकुर के लिए काफी महंगी बोली लगी थी। बेंगलुरू बुल्स ने उन्हें 12.20 लाख की भारी भरकम रकम में खरीदा था। उस टीम में अनुभवी डिफेंडर मंजीत छिल्लर भी थे।

प्रो कबड्डी में पहला सीजन

पहले पीकेएल सीजन में अजय ठाकुर ने बेंगलुरू बुल्स के लिए शानदार शुरुआत की थी। पहले दो मुकाबलों में उन्होंने 13 और 19 प्वॉइंट स्कोर किए थे। राउंड रॉबिन स्टेज में बेंगलुरू बुल्स का परफॉर्मेंस काफी अच्छा रहा। तेलुगु टाइटंस और जयपुर पिंक पैंथर्स के खिलाफ रोमांचक जीत हासिल करके टीम ने प्लेऑफ में जगह बनाई। इन दोनों ही मुकाबलों में ठाकुर ने 13 और 10 प्वॉइंट हासिल किए।

हालांकि, प्लेऑफ में उनके शानदार परफॉर्मेंस के बावजूद टीम को अनूप कुमार की अगुवाई वाली यू-मुम्बा से हार का सामना करना पड़ा। अजय ठाकुर ने 15 प्वॉइंट हासिल किए लेकिन टीम को हार से नहीं बचा सके। थर्ड प्लेस प्लेऑफ में पटना पाइरेट्स के खिलाफ हार की वजह से उन्हें चौथे नंबर से संतोष करना पड़ा। उन्होंने उस सीजन चौथे सबसे ज्यादा (127) प्वॉइंट हासिल किए।

बेंगलुरू बुल्स के साथ दूसरा सीजन

बेंगलुरू बुल्स ने दूसरे सीजन में मंजीत छिल्लर और अजय ठाकुर को रिटेन किया और टीम ने शानदार शुरूआत की। बंगाल वॉरियर्स के खिलाफ अजय ठाकुर ने 11 प्वॉइंट हासिल करके टीम को बेहतरीन जीत दिलाई। बेंगलुरू ने शानदार प्रदर्शन करते हए एक बार फिर प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई किया।

ठाकुर ने बुल्स के लिए दमदार प्रदर्शन किया

तेलुगु टाइटंस के खिलाफ आठ प्वॉइंट हासिल करते हुए अजय ठाकुर ने अपनी टीम को एक प्वॉइंट से रोमांचक जीत दिला दी। हालांकि, यू-मुम्बा के खिलाफ अगले मुकाबले में वो 15 रेड में सिर्फ तीन ही प्वॉइंट हासिल कर सके और टीम को हार का सामना करना पड़ा।

अजय ठाकुर ने इस सीजन 13 मैचों में कुल 79 प्वॉइंट हासिल किए और तीसरे सबसे ज्यादा प्वॉइंट हासिल करने वाले प्लेयर रहे। फाइनल मुकाबले में बेंगलुरू बुल्स को हार का सामना करना पड़ा और यही इस टीम के साथ उनका आखिरी सीजन साबित हुआ।

पुनेरी पलटन में हुए शामिल

पीकेएल के पहले दो सीजन में पुनेरी पलटन की टीम प्लेऑफ में जगह नहीं बना पाई थी। वो आखिरी पायदान पर रहे थे। लेकिन तीसरे सीजन में अजय ठाकुर के आने के बाद टीम की किस्मत पूरी तरह से पलट गई।

बेंगलुरू बुल्स के अपने पूर्व खिलाड़ी मंजीत छिल्लर और युवा रेडर दीपक निवास हूडा के साथ मिलकर अजय ठाकुर ने फ्रेंचाइज को तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया। पुनेरी पलटन का पीकेएल में ये सबसे बेस्ट परफॉर्मेंस था। हालांकि सेमीफाइनल मुकाबले में पुनेर पलटन को परदीप नरवाल की पटना पाइरेट्स से 40-21 से हार का सामना करना पड़ा। दीपक हूडा ने नौ प्वॉइंट तो ठाकुर ने चार प्वॉइंट लेकर टीम को तीसरे स्थान पर पहुंचाया। उस सीजन अजय ने कुल 52 प्वॉइंट हासिल किए थे।

पुनेरी पलटन के साथ चौथा सीजन

चौथा सीजन आते-आते ये लगने लगा कि अजय ठाकुर अपने पीक पर नहीं हैं। उनका परफॉर्मेंस पिछले सीजन अच्छा नहीं रहा था लेकिन पुनेरी पलटन ने उन्हें दीपक निवास हूडा के सपोर्ट के तौर पर यूज किया। उन्होंने ये भूमिका काफी अच्छी तरह से निभाई और अपनी टीम को लगातार दूसरी बार प्लेऑफ में पहुंचाया। उस सीजन उन्होंने कुल 63 प्वॉइंट हासिल किए।

हालांकि, लगातार दूसरे साल पुनेरी पलटन को परदीप नरवाल की पटना पाइरेट्स से हारकर बाहर होना पड़ा। इस मुकाबले में नौ रेड करने के बावजूद अजय कोई प्वॉइंट हासिल नहीं कर सके। तेलुगु टाइटंस को हराकर टीम ने तीसरा स्थान एक बार फिर हासिल किया। तीसरे स्थान के लिए हुए प्लेऑफ मुकाबले में ठाकुर ने सिर्फ तीन ही प्वॉइंट हासिल किए।

तमिल थलाइवाज के साथ नए सफर की शुरुआत

Ajay Thakur
थलाइवाज लीग में कुछ खास नहीं कर पाई

पीकेएल के पांचवे सीजन में अजय ठाकुर तमिल थलाइवाज की टीम का हिस्सा बने और उनके अनुभव की वजह से उन्हें टीम का कप्तान बनाया गया। हालांकि टीम का परफॉर्मेंस काफी खराब रहा और और जोन बी में वो निचले पायदान पर रहे। इसके उलट अजय ठाकुर का परफॉर्मेंस काफी शानदार रहा और उन्होंने 22 मुकाबलों में कुल 222 प्वॉइंट हासिल किए। इस दौरान उन्होंने 12 सुपर 10 लगाया।

छठे सीजन में भी तमिल थलाइवाज का खराब परफॉर्मेंस जारी रहा और जोन बी में एक बार फिर वो निचले पायदान पर रहे। इस सीजन अजय ठाकुर ने 203 रेड प्वॉइंट हासिल किए।

सातवें सीजन में स्टार रेडर राहुल चौधरी भी तमिल थलाइवाज की टीम का हिस्सा बन गए। इससे अजय ठाकुर के ऊपर से भार तो थोड़ा कम हो गया लेकिन टीम एक बार फिर 12वें पायदान पर रही। इस सीजन 13 मैचों में अजय ठाकुर ने 58 रेड प्वॉइंट हासिल किए।

इंडियन टीम के लिए जबरदस्त प्रदर्शन

पीकेएल में अब भले ही अजय ठाकुर का पुराना फॉर्म नहीं रह गया है लेकिन वो भारतीय टीम के महान खिलाड़ियों में शुमार किए जाते हैं। कबड्डी में उनके बेहतरीन योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। 2016 के कबड्डी वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतने वाली वो भारतीय टीम का अहम हिस्सा थे। उन्होंने पांच प्वॉइंट से पीछे चल रही टीम को नौ प्वॉइंट से बढ़त दिलाई थी। 2014 के एशियन गेम्स में उन्होंने गोल्ड मेडल और 2018 के एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल भी अपने नाम किया।

35 साल की उम्र में अजय ठाकुर अपने करियर की ढलान पर हैं। भले ही उनके नाम अभी तक कोई पीकेएल टाइटल नहीं है लेकिन अपने खेल से उन्होंने कई युवा प्लेयर्स को प्रेरित किया है। कई युवा खिलाड़ी उन्हें अपना आदर्श मानते हैं और उनका सिग्नेचर फ्रॉग जम्प काफी मशहूर हुआ है। भारतीय कबड्डी में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।