‘द हॉक’ के नाम से मशहूर यह खलाड़ी अगले सीजन में गुजरात जायंट्स के लिए खेलेगा।

स्मार्ट, एथलेटिक और टेक्निकल, अगर हम एक पंक्ति में 7 दिसंबर 1990 को हरियाणा के सोनीपत में जन्मे प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के स्टार डिफेंडर रविन्द्र पहल का परिचय देना चाहे तो ऐसा कह सकते हैं। वह अपनी कसी हुई साहसिक डिफेंस के लिए जाने जाते हैं और मैच के दौरान अपने मजबूत थाइ-होल्ड से विपक्षी खिलाड़ियों के लिए हमेशा खतरा बने रहते हैं।

उनकी मौजूदगी में विपक्षी टीम का कोई भी खिलाड़ी बोनस प्वॉइंट लेने की जल्दी हिम्मत नहीं कर पता। कोई विपक्षी रेडर अगर अपने हाफ में सुरक्षित वापस चला जाये तो वह अपने आप को भाग्यशाली समझता है। रविन्द्र पहल प्रो कबड्डी लीग में राइट-कॉर्नर की पोजीशन पर खेलते हैं। पलक झपकने की फुर्ती के साथ अपने विरोधी को चित कर देने की कला के कारण ही उनके साथियों ने उनका निक नेम ‘द हॉक’ रखा है।

हरियाणा में दमदार प्रदर्शन करने के बाद उनका चयन नेशनल चैंपियनशिप के लिए हुआ था और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इनका कबड्डी में सबसे पसंदीदा मूव डाइविंग थाइ होल्ड है। इसमें डाइव करके डिफेंडर रेडर की जांघ को पकड़ लेता है और उसे हाफ-लाइन तक पहुँचने से रोकता है।

प्रो-कबड्डी लीग में शुरुआत

प्रो-कबड्डी लीग का आगाज 2014 में आईपीएल के तर्ज पर हुआ था। देश के शेष कबड्डी खिलाड़ियों की तरह ही रवींद्र पहल को भी इस लीग से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सफलता मिली।

पीकेएल के पहले सीजन में रविन्द्र पहल को दबंग दिल्ली ने अपनी ओर से खेलने के लिए साइन किया। पहले सीजन में उन्होंने ज्यादा मैच नहीं खेले लेकिन कम मैचों में ही अपनी होशियारी भरी तकनीक से सबको प्रभावित किया। उन्होंने सीजन में नौ मैचों में 29 टैकल प्वॉइंट हासिल किए और दिल्ली की टीम प्लेऑफ में नहीं पहुँच पाई।

दूसरे सीजन में रविन्द्र पहल ने दिल्ली के लिए दमदार प्रदर्शन किया। वह उस सीजन प्रो कबड्डी लीग के सबसे बेहतरीन डिफेंडर्स में से एक थे। उन्होंने अपनी टीम के लिए 14 मैच खेले और 96 बार टैकल करते हुए कुल 60 टैकल प्वॉइंट हासिल किए। उन्होंने सात सुपर-टैकल भी किए और पांच हाई-फाइव लगाए। हालांकि, रविंद्र की टीम अपने 14 मैचों में से मात्र चार मैच जीतकर सातवें स्थान पर रही।

लगातर आगे बढ़ते रहे पहल

2016 में ही प्रो-कबड्डी लीग का सीजन 3 और 4 खेला गया। तीसरे सीजन में दिल्ली के लिए खेलते हुए रविन्द्र पहल का योगदान ज्यादा नहीं रहा। उनकी टीम भी मात्र एक जीत के साथ अंतिम पायदान पर रही। उस सीजन में रविंद्र ने 11 मैच खेले जिसमें कुल 34 प्वॉइंट ही हासिल कर पाए।

चौथे सीजन के लिए रविन्द्र पहल को पुणेरी पलटन ने खरीद लिया। रविंद्र चौथे सीजन में भी अपनी धार वापस पाने में सफल नहीं हो पाए और 14 मैचों में सिर्फ 37 टैकल प्वॉइंट ही अर्जित कर पाए। हालांकि उनकी टीम तीसरे पायदान पर रही।

अगले सीजन वह बेंगलुरू बुल्स के साथ जुड़े। इस बार पहल ने बेहतरीन खेल दिखाया। वह प्रो कबड्डी लीग में अपने दूसरे सीजन के बेहतरीन प्रदर्शन को दोहराने में कामयाब रहे और लीग में दूसरी बार एक सीजन में 50+ टैकल प्वॉइंट अर्जित किए। साथ-ही-साथ वह 200 प्वॉइंट के क्लब में शामिल होने वाले पांचवे डिफेंडर बन गए। रविंद्र पहल छठे सीजन के लिए दोबारा दिल्ली से जुड़े। उन्होंने कुल 59 टैकल प्वॉइंट प्राप्त करके दबंग दिल्ली को प्रो कबड्डी लीग में पहली बार प्लेऑफ तक पहुँचने में मदद की। उस सीजन में दिल्ली ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए लीग में तीसरा स्थान हासिल किया।  

सातवें सीजन में बनाया नया रिकॉर्ड

प्रो-कबड्डी लीग के सातवें सीजन में खेलते हुए रविंद्र पहल, मंजीत छिलर के बाद कुल 300+ टैकल प्वॉइंट हासिल करने वाले दूसरे कबड्डी खिलाड़ी बन गए। पूरे सीजन में दमदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने 23 मैचों में कुल 63 टैकल-पॉइंट अर्जित किए। इनके इस चमत्कारिक प्रदर्शन के कारण दिल्ली पहली बार टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची, हालांकि उसे फाइनल में हार का सामना करना पड़ा।

पहल ने अब दिल्ली का साथ छोड़ दिया है। 2021 में होने वाले प्रो-कबड्डी लीग के आठवें सीजन के लिए उनको गुजरात जाइंट्स ने 74 लाख की बोली लगाकर खरीदा है। इस दमदार डिफेंडर ने कई रिकॉर्ड बनाए हैं लेकिन अबतक प्रो कबड्डी लीग का टाइटल नहीं जीता है और अपनी नई टीम के साथ वो इस रिकॉर्ड को बदलना चाहेंगे।