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हम एएफसी एशियन कप में जरूर क्वालिफाई करेंगे, कोच स्टीमाक को है पूरा यकीन

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Published at :June 2, 2021 at 9:15 PM
Modified at :June 2, 2021 at 9:20 PM
हम एएफसी एशियन कप में जरूर क्वालिफाई करेंगे, कोच स्टीमाक को है पूरा यकीन

भारतीय फुटबॉल टीम के कोच ने जून में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स के मुकाबलों को लेकर अपनी स्ट्रैटेजी भी साझा की है।

महीनों के गैप के बाद भारतीय टीम एक बार फिर जून में मैदान पर वापसी कर रही है। इस दौरान भारतीय टीम 3 जून को कतर से फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर में भिड़ेगी। इसके बाद टीम इंडिया का सामना बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भी होगा और इन्हीं मुकाबलों के आधार पर भारत के एएफसी एशियन कप क्वालिफायर्स के टिकट पर फैसला भी हो सकेगा। ऐसे में आगे के मुकाबले काफी अहम हैं और इनमें टीम की क्या स्ट्रैटेजी होगी, इसको लेकर कोच इगोर स्टीमाक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई सारी बातें कहीं और उन्होंने कतर में भारत को तैयारी के लिए मौका न मिलने की शिकायत भी की।

सीधे एएफसी एशियन कप क्वालिफायर्स में एंट्री के लिए भारतीय फुटबॉल टीम को अपने ग्रुप में तीसरे नंबर पर रहना होगा।

दरअसल फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स के तैयारी के लिए टीम को कैंप लगाने का मौका नहीं मिला और इस दौरान बहुत सा वक्त बर्बाद भी हुआ। इस पर कोच स्टीमाक का कहना है, "हमने 15 अप्रैल को कैंप शुरू करने का प्लान बनाया था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका तो हमने 1 मई से कोलकाता में कैंप का नया प्लान बनाया। हमारा प्लान था कि हम कुछ लोकल टीम के साथ और कुछ फ्रैंडली मुकाबलों को मिलाते हुए चार-पांच मैच खेलते। हालांकि महामारी के चलते सब कुछ रद्द हो गया। आखिर में हमें इस बात को जानकर खुशी हुई कि आखिरी तीन मुकाबले दोहा में होंगे।"

"लेकिन अगर मुझे पता होता कि सब कुछ इस तरह से होगा तो मैं इसे कतई कबूल नहीं करता। हम ऐसे हालातों में तो भारत में भी मुकाबले करा सकते थे। हम अपने दो होम ग्राउंड मुकाबलों में हार गए। हम अभी बबल में हैं और ऐसा आयोजन आईएसएल क्लब्स की सुविधाओं के साथ भारत में भी किया जा सकता था। हमें वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स के लिए जैसी तैयारी चाहिए थी वैसी नहीं मिली।"

कोच के बयान से ये साफ झलकता है कि वो कतर में क्वारंटीन सुविधा से खुश नहीं हैं। वो आगे कहते हैं, "ये मामला बहुत आसान है। मैं अच्छी तरह वाकिफ हूं कि कतर आने वाले वर्ल्ड कप का मेजबान है और हम ये जानते हैं कि उसके पास फुटबॉल टीम्स के लिए बेहतरीन सुविधाएं भी हैं। जब हमने यहां आने की बात मानी थी, तब हमने कतर की टूर्नामेंट का आयोजन करने के लिए सराहना भी की थी। लेकिन एक कोच के तौर पर मुझे इस संस्था से और भी चीजों की उम्मीद थी।"

स्टीमाक ने कहा, "मैं जानता हूं कि हमने महामारी के चलते अपने सभी प्लान बदले, क्योंकि हमें यहां आना था, लेकिन एक कोच के तौर पर मुझे काफी बेहतर की उम्मीद थी। मुझे जिम के इस्तेमाल और ट्रेनिंग सेशन की सुविधा की उम्मीद थी। हमें यहां सुबह के सेशन करने की सुविधा नहीं मिली है। हमें अपने कमरों के सामने मॉर्निंग सेशन करना पड़ रहा है और हमारे खिलाड़ियों को डिलिवरी फूड खाना पड़ रहा है, जो हमारे रूम के सामने छोड़ दिया जाता है। प्रोफेशनल खिलाड़ियों के लिए ये सही तैयारियां नहीं हैं। मुझे पक्का यकीन है कि कतर की टीम इस कंडीशन में नहीं होगी।"

भारतीय टीम के हेड कोच ने कतर में मिल रही सुविधाओं की तुलना करते हए कहा, "अब हमने इस विषय पर बहुत बात कर ली है। मैं ये कहना चाहूंगा कि महामारी की स्थिति दुनियाभर में काफी खराब है। हर कोई अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे ही हालातों में एआईएफएफ ने अपने स्टेकहोल्डर्स के साथ आईएसएल का आयोजन किया था। हम सभी जानते हैं कि वो काफी बेहतर भी रहा। उस दौरान टीम, खिलाड़ियों और कोच को सारी सुविधाएं दी गई थीं।"

Sunil Chhetri फुटबॉल
छेत्री टीम का अहम हिस्सा होंगे।

"अब मैं यहां की स्थिति देखता हूं तो मुझे समझ नहीं आता कि हम यहां क्वारंटीन क्यों हैं। हमारा तीन बार टेस्ट किया जा चुका है। सारे टेस्ट नेगेटिव हैं। मुझे नहीं पता कि हमारे पास मीटिंग हॉल क्यों नहीं हैं, जहां हम अपने विरोधी को अच्छे से समझ सकें। मुझे नहीं पता कि हम साथ खाना खाते हुए समय क्यों नहीं बिता सकते हैं। इसके अलावा हमारे पास शाम को ट्रेनिग सेशन में जाने का ही एक मौका होता है। क्वालिफायर्स के पहले इतनी सी सुविधाएं बहुत नाकाफी हैं।"

प्रेस कॉन्फ्रेंस में इगोर स्टीमाक से भारतीय टीम के साथ उनके जुड़ने के बाद टीम के आगे के लक्ष्यों के बारे में भी पूछा गया। इसका जवाब देते हुए उन्होंने साफ कहा, "स्थिति चाहे कुछ भी हो हमारे लक्ष्य नहीं बदलते। हमने अपने काम की शुरुआत में लक्ष्य बनाया था कि शुरुआत के दो साल हम एएफसी एशियन कप में क्वालिफाई करने की पूरी कोशिश करेंगे। अगर मौका मिलता तो हम वर्ल्ड कप के लिए भी क्वालिफाई करने की कोशिश करते। आप सभी जानते हैं कि क्वालिफायर्स के पहले दो मुकाबलों में हमारा प्रदर्शन काफी अच्छा रहा था और नतीजे भी बेहतर थे।"

कोच ने बताया कि उन मुकाबलों में प्रदर्शन इसलिए भी अच्छा था क्योंकि टीम को उनके पहले तीन-चार कैंप आयोजित करने का मौका मिला था। उन्होंने कहा कि हमें तब मौका मिला था कुछ चीजों को सही करने में और प्लेयर्स को ये बताने में कि उनसे क्या उम्मीद की जा रही है। इसके साथ ही स्टीमाक ने कहा कि ब्लू टाइगर्स एएफसी एशिया कप के लिए जरूर क्वालिफाई करेंगे, चाहे वो ग्रुप स्टेज में किसी भी पोजिशन पर रहें।

उन्होंने टीम की स्ट्रैटेजी बताते हुए कहा, "हम संदेश झिंगन, ब्रेंडन फर्नांडिस जैसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों का चोटिल होने के कारण कई मौकों पर इस्तेमाल नहीं कर सके थे। कुछ क्वालिफायर्स में हमारे साथ कई महत्वपूर्ण खिलाड़ी नहीं थे, लेकिन हमारा लक्ष्य अभी भी वही है। मार्च में दुबई कैंप के अलावा महामारी के कारण हम कोई कैंप आयोजित नहीं कर सके, लेकिन इससे हमारे लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं आया है। हम ग्रुप में किसी भी पोजिशन पर रहें, मुझे यकीन है कि हम एशियन कप में क्वालिफाई करेंगे और उसके बाद हमें साथ में काम करने के लिए काफी समय भी मिलेगा और हम अपने खेल से हर भारत में हर किसी को खुशी देंगे।"

फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स के साथ ही स्ट्राइकर सुनील छेत्री की भी टीम में वापसी हो रही है और स्टीमाक से इस बारे में पूछा गया कि इससे ग्रुप में टॉप थ्री पोजिशन में पहुंचने में क्या मदद मिलेगी तो कोच ने कहा कि सुनील का वापस आना हम सभी के लिए काफी अच्छा है।

उन्होंने कहा, "मैं सुनील से रोज बात करता हूं और हम दोनों इस बात से सहमत हैं कि हमें यहां चालाक बनना होगा। हमें 12 दिनों में तीन मैच खेलने हैं। मुझे इस दौरान फैसला लेना होगा कि सुनील के इस्तेमाल के लिए सही समय क्या होगा। जाहिर सी बात है कि हमारे लिए यहां सबसे महत्वपूर्ण मुकाबले हैं अफगानिस्तान और बांग्लादेश के खिलाफ। पांच-छह दिन की ट्रेनिंग के बाद मुझे टीम की स्थिति का साफ अंदाजा हो जाएगा और तब हम फैसले ले पाएंगे।"

स्टीमाक ने इस दौरान मार्च में हुए दुबई कैंप से मिली सीख का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया, "मैंने दुबई कैंप से जो सीखा वो काफी आसान है। हमें समझ आया कि युवा खिलाड़ियों को और समय की जरूरत है। हमने ये समझा है कि आईएसएल में खेलने से बाहर आकर अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलना कहीं ज्यादा मुश्किल है। लेकिन यही तो हमें करना है। हम अपने युवा खिलाड़ियों को एक्सपोजर देने के लिए फ्रैंडली मुकाबलों का इस्तेमाल करेंगे और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का अनुभव लेंगे।"

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