क्यों जेरार्ड नुस इंडियन फुटबॉल में एक बड़े कोच साबित हो सकते हैं?

35 वर्षीय कोच के नेतृत्व में हाईलैंडर्स ने अभी तक लीग में बेहतरीन शुरुआत की है।
इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के 2020-21 सीजन में नॉर्थईस्ट यूनाईटेड की टीम ने अभी तक अपने प्रदर्शन से सबको हैरान किया है। सबकी उम्मीदों से उलट बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए नॉर्थईस्ट प्वॉइंट्स टेबल में चौथे पायदान पर मौजूद है। अभी तक टीम को केवल एक हार मिली है और उनके इस बेहतरीन परफॉर्मेंस का श्रेय काफी हद तक उनके कोच जेरार्ड नुस को जाता है।
अगस्त में जब टीम ने उन्हें अपना हेड कोच नियुक्त किया था, उससे पहले तक उन्हें इंडियन फुटबॉल में कोई नहीं जानता था। युवा होने की वजह से वो आईएसएल के बाकी कोचों से काफी अलग दिखे। इगोर एंगुलो जैसे खिलाड़ी जो उम्र में उनसे बड़े हैं इस सीजन लीग में खेल रहे हैं।
इतने कम उम्र में ही जेरार्ड नुस के नाम यूएफा प्रो लाइसेंस है और इसके अलावा वो लिवरपूल और ब्राइटन समेत यूरोप की कई दिग्गज टीमों के लिए खेल चुके हैं। वो घाना नेशनल टीम के असिस्टेंट कोच भी रह चुके हैं। नॉर्थईस्ट यूनाईटेड के साथ जिस तरह की सफलता उन्हें मिली है अगर वैसी ही सफलता उन्हें मिलती रही तो फिर वो इंडियन फुटबॉल में लंबे समय तक रह सकते हैं।
हम आपको बताते हैं कि क्यों वह इंडियन फुटबॉल के लिए काफी अहम साबित हो सकते हैं और क्यों उन्हें यहां पर लगातार काम करते रहना चाहिए:
4. यंग इंडियन प्लेयर्स पर विश्वास
इस सीजन नॉर्थईस्ट यूनाईटेड उन टीमों में से एक है जिन्होंने युवा खिलाड़ियों को काफी ज्यादा मौके दिए हैं और उन्हें इसका लाभ भी मिला है। लालेंगमाविया और रोछरजेला जैसे प्लेयर लगातार इस टीम का हिस्सा रहे हैं।
लालेंगमाविया यहां तक कि आईएसएल इतिहास के सबसे युवा कैप्टन भी बने। हाल ही में एफसी गोवा के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व किया। जेरार्ड नुस ने हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा भी था कि ये युवा खिलाड़ी पूरे सीजन टीम का अहम हिस्सा रहेंगे। इससे पता चलता है कि ये क्लब युवा प्लेयर्स पर कितना भरोसा जताती है और गेरार्ड नस एक ऐसे कोच हैं जो अपने डोमेस्टिक यंगस्टर्स पर काफी विश्वास जताते हैं।
3. बेहतरीन रणनीति और अलग-अलग टीमों के खिलाफ टीम को ढालना
आईएसएल सीजन की शुरुआत से पहले सबका यही मानना था कि मुंबई सिटी एफसी की टीम को हराना आसान नहीं होगा। जिस तरह के खिलाड़ी उनके पास हैं, उसकी वजह से कागजों पर मुंबई की टीम काफी बेहतरीन लग रही थी। वहीं दूसरी तरफ नॉर्थईस्ट यूनाईटेड उतनी अच्छी टीम नहीं लग रही थी लेकिन जब 90 मिनट के खेल के बाद रिजल्ट आया तो हर कोई हैरान था। नॉर्थईस्ट यूनाईटेड ने सबको चौंकाते हुए जीत हासिल की। ये आईएसएल इतिहास के सबसे हैरान कर देने वाले रिजल्ट में से एक था।
मुंबई, गोवा और बेंगलुरु के खिलाफ नॉर्थईस्ट की टीम ने काफी डिस्पिलिन के साथ खेला और बॉल पर उनका कंट्रोल काफी बढ़िया था। वहीं दूसरी तरफ केरला ब्लास्टर्स और एससी ईस्ट बंगाल के खिलाफ इस टीम ने अलग तरह की स्टाइल से खेल दिखाया। उदाहरण के तौर पर देखें तो गेरार्ड नस ने केरला ब्लास्टर्स के खिलाफ मुकाबले में शुरुआत में इस तरह की रणनीति बनाई कि गेंद ज्यादा से ज्यादा विरोधी टीम के पास रहे। जब ये रणनीति काम नहीं आई तो उन्होंने एक बार फिर अपने टैक्टिस में बदलाव किया और सेकेंड हाफ में दो गोल दागकर मैच ड्रॉ कराया।
इससे पता चलता है कि वह टीम की रणनीति को लेकर कितने सजग रहते हैं और खेल के हिसाब से उसमें बदलाव भी करते रहते हैं।
2. लिमिटेड प्लेयर्स से उनका बेस्ट निकलवाना
नॉर्थईस्ट यूनाईडेट की टीम इस सीजन उतनी ज्यादा मजबूत नहीं है। इसके बावजूद जेरार्ड नुस ने इस टीम से उनका बेस्ट परफॉर्मेंस निकलवाया है। लिमिटेड प्लेयर्स के बावजूद उन्होंने बेहतरीन रिजल्ट दिए हैं।
नॉर्थईस्ट की टीम में सबका रोल पूरी तरह क्लियर है। चाहे वो खासा कमारा का मिडफील्ड में रोल हो या फिर डिलन फॉक्स की डिफेंस में भूमिका हो। नुस को शायद पहले से ही पता था कि हर प्लेयर की क्वालिटी क्या है और वो उसी हिसाब से उनका प्रयोग कर रहे हैं।
1. पॉजिटिव एटीट्यूड
जैसा कि हमने पहले भी आपको बताया कि नॉर्थईस्ट यूनाईटेड को अभी तक एक ही हार झेलनी पड़ी है। सात में से चार मुकाबले उन्होंने ड्रॉ खेले हैं और इससे उन्हें 10 प्वॉइंट भी मिले हैं। इनमें से दो और मैचों में भी वो हार के करीब थे लेकिन आखिरी कुछ मिनटों में गोल कर शानदार वापसी की। एफसी गोवा के खिलाफ मुकाबले में कुछ कंट्रोवर्सी जरुर हुई। इन सबके बावजूद इस टीम ने मैदान के अंदर और बाहर अपना पॉजिटिव एटीट्यूड बनाए रखा।
अभी तक जितने भी मीडिया कॉन्फ्रेंस हुए हैं उसमें कोच जेरार्ड नुस ने एक भी एक्सक्यूज नहीं दिया है। उन्होंने हमेशा यही है कि उनके पास एक बेहतरीन टीम है और वो इस सीजन को बेहतरीन तरीके से फिनिश करेंगे।
एक तरफ जहां दूसरे कोच लगातार प्लेइंग कंडीशंस, ट्रेनिंग पिच, रेफरी और टाइट शेड्यूल की शिकायत करते रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस 35 वर्षीय कोच ने अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं की है। इससे पता चलता है कि टीम का माहौल कितना पॉजिटिव है और इसका असर मैदान में उनके परफॉर्मेंस पर भी दिखता है और आने वाले मैचों में भी उन्हें इसका लाभ मिलेगा।
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