क्रोशिया के खिलाफ इंग्लैंड की ओर से डेब्यू के साथ ही ज्यूड बेलिंघम ने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

यूएफा यूरो चैंपियनशिप 2020 में क्रोशिया के खिलाफ एक अहम मुकाबले में इंग्लैंड के युवा खिलाड़ी ज्यूड बेलिंघम ने इतिहास रच दिया। 17 साल के इस युवा खिलाड़ी ने मैच के 82वें मिनट में हैरी केन को रिप्लेस किया और इसी के साथ वो टूर्नामेंट के इतिहास के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए।

ज्यूड से पहले ये रिकॉर्ड नीदरलैंड के जेट्रो विलेम्स के नाम दर्ज था। हालांकि, बेलिंघम का रिकॉर्ड भी ज्यादा दिन नहीं रहा और पोलैंड के युवा खिलाड़ी कैस्पर कोज्लोवोस्की ने उनका रिकॉर्ड तोड़ दिया

युवा खिलाड़ियों को अपने देश का इतने बड़े स्तर पर प्रतिनिधित्व करते हुए देखना काफी शानदार अनुभव देता है। ऐसे में खेल नाओ इतिहास को खंगालते हुए आपको यूरो चैंपियनशिप के इतिहास के टॉप पांच युवा खिलाड़ियों से रूबरू करा रहा है।

6. योहन वोनलान्थेन (स्विट्जलैंड) – 18 साल 137 दिन

अब रिटायर हो चुके स्विस खिलाड़ी योहन वोनलान्थेन का 2004 का यूरो कप काफी खास रहा था। तब 18 साल के रहे योहन ने यूरो में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू किया था। स्विट्जरलैंड के कई खिलाड़ी चोटिल थे, ऐसे में योहन को खेलने का मौका मिला था। हालांकि इस मुकाबले में उनकी टीम को इंग्लैंड के खिलाफ 3-0 से हार झेलनी पड़ी थी। लेकिन युवा मिडफिल्डर योहन इस डेब्यू के साथ टूर्नामेंट में खेलने वाले दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए थे।

हालांकि रिकॉर्ड्स का उनका ये कारवां यहीं नहीं थमा। डेब्यू के महज चार दिन बाद ही उन्होंने फ्रांस के खिलाफ गोल दागा और इसी के साथ वो यूरो चैंपियनशिप में गोल दागने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। ये रिकॉर्ड पहले इंग्लैंड के वेन रूनी के नाम दर्ज था, जिन्होंने जोहन के डेब्यू मुकाबले में ही स्विट्जरलैंड के खिलाफ गोल दागा था।

5. वालेरी बोजिनोव (बुल्गेरिया) – 18 साल 136 दिन

वोनलान्थेन का रिकॉर्ड सिर्फ पांच दिनों तक ही रहा। यूरो 2004 में वोनलान्थेन के डेब्यू के महज पांच दिनों बाद ही बुल्गेरिया के वालेरी बोजिनोव ने डेब्यू कर ये रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। बोजिनोव अब 35 साल के हैं और अभी भी मैदान पर खेल रहे हैं। यूरो में अपने डेब्यू के बाद उनका सफर बहुत अच्छा रहा और उन्होंने जुवेंटस, स्पोर्टिंग सीपी, मैनचेस्टर सिटी जैसी शानदार टीमों का प्रतिनिधित्व किया। फिलहाल बोजिनोव बल्गेरिया की लेवस्की सोफिया के लिए खेलते हैं।

4. एंजो साइफो (बेल्जियम) – 18 साल 115 दिन

यूएफा यूरो चैंपियनशिप के सबसे युवा खिलाड़ियों की लिस्ट में बेल्जियम के दिग्गज खिलाड़ी एंजो साइफो भी हैं। साइफो का नाम बेल्जियम के फुटबॉल इतिहास में काफी सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने चार बार अपने देश का प्रतिनिधित्व फीफा वर्ल्ड कप में किया है। मिडफिल्डर एंजो इंटर मिलान और एएस मोनाको जैसे कई बड़े यूरोपियन क्लब्स की ओर से भी खेल चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने के बाद साइफो ने एक कोच के तौर पर भी बेल्जियम अंडर-21 टीम के साथ जुड़े रहे।

3. जेट्रो विलेम्स (नीदरलैंड) – 18 साल 71 दिन

यूरो चैंपियनशिप में एंजो के सबसे युवा खिलाड़ी बनने के 28 साल बाद नीदरलैंड के डिफेंडर जेट्रो विलेम्स ने इतिहास बनाया। 2012 के टूर्नामेंट में विलेम्स ने अपनी राष्ट्रीय टीम में डेब्यू किया। अंडर-17 यूरोपियन चैंपियनशिप में बेहतरी प्रदर्शन के बाद इस फुल बैक ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा था। विलेम्स ने पीएसवी की तरफ से भी बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिनके लिए वो 140 से ज्यादा मैच खेले। उन्होंने 2019-20 प्रीमियर लीग में न्यूकैसल यूनाइटेड का भी प्रतिनिधित्व किया। फिलहाल 27 साल का ये खिलाड़ी बुदेशलीका में फ्रैंकफर्ट के लिए खेलता है।

2. ज्यूड बेलिंघम (इंग्लैंड) -17 साल 345 दिन

अपने डेब्यू के पहले ही ज्यूड बेलिंघम ने सुर्खियों में आते हुए अपने नाम का दबदबा कायम कर लिया था। बर्मिंघम सिटी के लिए उनके बेहतरीन प्रदर्शन की बानगी इस बात से ही मिल सकती है कि उनके क्लब छोड़ने के बाद ही बर्मिंघम ने 22 नंबर जर्सी रिटायर कर दी। सिग्नल इडूना पार्क में भी बेलिंघम का आगाज काफी शानदार रहा। उन्होंने इस क्लब के खिलाफ डेब्यू मुकाबले में ही गोल दागते हुए इतिहास रच दिया। 2020-21 के घरेलू सीजन में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के चलते इंग्लैंड की टीम से उन्हें बुलावा आया। इसके बाद टूर्नामेंट में डेब्यू के साथ ही उन्हें यूरो 2020 में इतिहास रच दिया।

1. कैस्पर कोज्लोवोस्की (पोलैंड) – 17 साल 246 दिन

इंग्लैंड के बेलिंघम का रिकॉर्ड ज्यादा दिनों तक नहीं टिका। छह दिनों बाद ही पोलैंड के कैस्पर कोज्लोवोस्की ने मौजूदा यूरो चैंपियनशिप में स्पेन के खिलाफ मैदान में उतकर उनका रिकॉर्ड तोड़ दिया।

कैस्पर मैच में दूसरे हाफ में मैदान पर आए। उनकी टीम ने मुकाबले को 1-1 से ड्रॉ किया और टूर्नामेंट अगले दौर में पहुंचने की अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा। स्पेन के लिए मैच में एल्वारो मोराटा ने गोल किया जब​कि पोलैंड को रॉबर्ट लेवांडोस्की के गोल से बराबरी मिली।