‘डुबकी किंग’ का परफॉर्मेंस इस सीजन अभी तक अच्छा नहीं रहा है।

प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) की दो साल के बाद वापसी हुई लेकिन इसके रोमांच और एक्शन में कोई कमी नजर नहीं आई। आठवें सीजन में एक से बढ़कर एक कई धमाकेदार मुकाबले हो रहे हैं। सभी टीमें एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रही हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी तक हमें कई टाई मुकाबले देखने को मिल चुके हैं। खेल नाओ टीवी पर आप पूर्व पीकेएल विनर मोहित छिल्लर के साथ लीग की लगातार कवरेज भी देख रहे हैं।

नए साल के पहले दिन यानि 1 जनवरी को तो तीनों ही मुकाबले टाई पर समाप्त हुए थे। इससे पता चलता है कि सभी टीमें इस बार लीग जीतने के लिए कितनी तैयार हैं। पीकेएल के सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक परदीप नरवाल से भी इस सीजन काफी उम्मीदें थीं लेकिन अभी तक वो अपने नाम के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। परदीप नरवाल अपनी डुबकी के लिए मशहूर हैं और इसीलिए उन्हें ‘डुबकी किंग’ के नाम से जाना जाता है।

वह इस सीजन पटना पाइरेट्स का हिस्सा नहीं हैं। उन्हें टीम ने ऑक्शन से पहले रिलीज कर दिया था और उसके बाद नीलामी में यूपी योद्धा ने सबसे महंगी बोली लगाकर उन्हें खरीदा था।हालांकि, यूपी योद्धा की तरफ से खेलते हुए परदीप नरवाल की डुबकी सफल नहीं रही है। परदीप नरवाल के खराब परफॉर्मेंस की वजह से यूपी योद्धा की टीम भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है।

परदीप नरवाल का औसत प्रदर्शन

हर कोई इस बात से हैरान है कि हर सीजन रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड तोड़ने वाले परदीप नरवाल को आखिर इस सीजन क्या हो गया है। वहीं दिग्गज डिफेंडर मोहित छिल्लर ने परदीप नरवाल के लगातार खराब प्रदर्शन की बड़ी वजह बताई है। उन्होंने परदीप के डुबकी पर सवाल उठाए और कहा कि अब उनकी डुबकी में पहले वाली बात नहीं रह गई है।

खेल नाओ के स्पेशल शो में बातचीत के दौरान मोहित छिल्लर ने कहा, “परदीप नरवाल की डुबकी काफी स्लो हो गई है और इसी वजह से डिफेंडर्स उन्हें आसानी के साथ टैकल कर रहे हैं। जब मैं खेलता था परदीप नरवाल ने एक बार हरियाणा स्टीलर्स के खिलाफ एक ही रेड में पूरी टीम को ऑल आउट कर दिया था और कुल 9 प्वॉइंट हासिल किए थे। लेकिन अब उनका परफॉर्मेंस वैसा नहीं रहा है लेकिन वो फॉर्म में लौट सकते हैं और फिर उसी तरह का परफॉर्मेंस दोहरा सकते हैं।”

डिफेंडर्स भी इस सीजन परदीप के मूव्स को आसानी समझ पा रहे हैं। कई खिलाड़ियों ने परदीप पर बैकहोल्ड का इस्तेमाल भी किया है। किसी भी डिफेंडर के लिए बैकहोल्ड एक बड़ा हथियार है। कई डिफेंडर इस मूव के जरिए रेडर को आउट करते हैं। हालांकि इसके लिए जरूरी है कि आपका फोर्स डिफेंडर के ऊपर काफी ज्यादा रहे और उसकी पीठ दिखनी चाहिए।

बैकहोल्ड कैसे करना चाहिए

मोहित छिल्लर ने बताया कि डिफेंडर को बैकहोल्ड करते समय किन चीजों को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा “डिफेंडर बैकहोल्ड तभी करता है जब उसे रेडर की पीठ दिखती है। लेकिन अगर रेडर की पीठ नहीं दिखती है तो फिर एडवांस टैकल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इससे आप सफल नहीं होंगे।”

कबड्डी के नियमों में भी समय के साथ काफी बदलाव हुए हैं। पहले के जमाने में जब कोई रेडर रेड करने जाता था तो उसे लगातार कबड्डी-कबड्डी बोलते रहना पड़ता था और अपनी सांस रोककर रखनी पड़ती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। रेडर कबड्डी-कबड्डी बोलते वक्त अपनी सांस ले सकता है और ये एक बड़ा बदलाव है।

मोहित छिल्लर ने इस बारे में कहा, “जब कबड्डी की स्थापना हुई थी तब उसमें सांस को नहीं तोड़ने का नियम था लेकिन जैसे-जैसे ये गेम आगे डेवलप होता गया तब नियमों में बदलाव हुआ और अब एक रेडर सांस लेकर भी कबड्डी-कबड्डी बोल सकता है।”