मौजूदा समय में इंडियन फुटबॉल की सबसे बड़ी समस्या गोल करने वाले प्लेयर्स की कमी रही है। इंटरनेशनल लेवल हो या इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के मैच, इंडियन प्लेयर्स के नाम स्कोरशीट पर बहुत कम ही दिखे हैं।

आईएसएल के 2019-20 सीजन में भी यह समस्या जारी है। हालांकि, लीग में असिस्ट देने के मामले में भारतीय खिलाड़ी आगे हैं, जो इंडियन फुटबॉल के लिए एक अच्छा साइन है। पांच दिसंबर 2019 तक असिस्ट देने वाले खिलाड़ियों में इंडियन प्लेयर्स की संख्या ज्यादा है।

ब्रैंडन फ्रर्नांडिस और जेरी माविहमिंगथंगा फिलहाल, सबसे ज्यादा असिस्ट देने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में एकसाथ टॉप पर मौजूद हैं। ब्रैंडन ने अबतक छह मैचों तीन असिस्ट दिए हैं जबकि जेरी ने इतने ही असिस्ट सात मैचों में दिए हैं। अब सवाल यह उठता है कि यह खिलाड़ी लीग में तो बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इंटरनेशनल लेवल पर बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसी टीमों के खिलाफ भी अपने शानदार प्रदर्शन को जारी क्यों नहीं रख पा रहे।

इसका कारण टीम इंडिया के हेड कोच इगोर स्टीमाक की टैक्टिस है। आईएसएल में एफसी गोवा के हेड कोच सर्जियो लोबेरा ने ब्रैंडन का इस्तेमाल अबतक एक अटैकिंग प्लेयर के रूप में किया है ज​बकि स्टीमाक ने अबतक हुए 2022 फीफा वर्ल्ड कप क्वॉलीफायर के चार मैचों में ब्रैंडन को सेन्ट्रल मिडफील्डर की पोजिशन पर खिलाया है।

इंडिया ने क्वॉलीफायर में इस बार अबतक सिर्फ तीन गोल किए हैं और तीनों में ब्रैंडन ने असिस्ट दिया है। ऐसे में स्टीमाक को उन्हें इंडियन टीम में भी एक अटैकिंग प्लेमेकर के रूप में खिलाना चाहिए। क्वॉलीफायर मैचों में सहल अब्दुल समद और यहां तक कि सुनील छेत्री ने भी अटैकिंग प्लेमेकर का रोल प्ले किया है, लेकिन वे प्रभावशाली साबित नहीं हो पाए हैं और टीम की हालत देखते हुए स्टीमाक को जल्द से जल्द ब्रैंडन को अटैकिंग पो​जिशन पर खिलाने का फैसला लेना होगा।

दूसरी ओर जेरी ने अबतक इंडिया के लिए अपना डेब्यू नहीं किया है। ऐसे समय में जब टीम गोल स्कोरर एवं अटैकिंग प्लेमेकर्स की परेशानी से जूझ रही है, स्टीमाक को जेरी को मौका देना ​चाहिए। जेरी फास्ट हैं और मिडफील्ड के साथ विंग पर भी खेल सकते हैं। आईएसएल के मौजूदा सीजन में उन्होंने एक गोल भी किया है और उनके पास इंडिया अंडर-19 और अंडर-23 टीम में भी खेलने का अनुभव है।

एटीके की टीम इस सीजन दमदार फॉर्म में चल रही है। टीम 11 प्वॉइंट्स के साथ टेबल में दूसरे स्थान पर मौजूद है और इसमें उसके खिलाड़ी प्रबिर दास ने अहम भूमिका निभाई है। राइट-बैक और विंग-बैक के रूप में खेलने वाले दास ने छह मैचों में दो असिस्ट दिए हैं।

वह असिस्ट देने के मामले में फारुख चौधरी और जैकिचंद सिंह के साथ संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर मौजूद हैं। फारुख और जैकिचंद को इंडियन टीम से खेलने का मौका मिला है और अब समय आ गया है कि स्टीमाक, दास को भी मौका दें।

इंडिया ने वर्ल्ड कप क्वॉलीफायर्स में प्रीतम कोटाल और राहुल भेके को राइट-बैक पोजिशन पर खिलाया है, लेकिन दोनों प्लेयर्स अबतक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। स्टीमाक चाहते हैं कि इंडियन टीम पासिंग फुटबॉल खेले, लेकिन कोटाल की सबसे बड़ी कमी उनके शॉर्ट पासेस हैं जिसके कारण टीम को कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, कोटाल अटैक के दौरान विपक्षी टीम के 18 यार्ड बॉक्स में अच्छे क्रॉस भी नहीं डाल पाते हैं जिससे इंडिया के लिए गोल करने के मौके भी कम हो जाते हैं।

दूसरी ओर, भेके की परेशानी यह है कि वह मैच के दौरान आउट ऑफ पोजिशन हो जाते हैं जिसके कारण विपक्षी टीम को इंडिया के बॉक्स के पास काफी स्पेस मिल जाता है और वे गोल करने में कामयाब रहते हैं। भेके को बेंगलुरू एफसी भी आईएसएल में ज्यादातर एक सेंटर-बैक के रूप में ही खिलाती है।

ऐसे में दास इंडियन टीम के लिए राइट-बैक पोजिशन पर एकदम फिट बैठते हैं। इस सीजन अबतक दो असिस्ट के साथ-साथ उनके नाम 25 टैकल और नौ इंटरसेप्शन भी हैं। दास ने इसके अलावा, 36 क्लियरेंस और आठ ब्लॉक किए हैं।

दास अटैक और डिफेंस दोनों में बेहतरीन हैं जो उन्हें इंडियन टीम में जगह का प्रबल दावेदार बनाती है। आईएसएल में इस सीजन अबतक सबसे ज्यादा असिस्ट देने वाले खिलाड़ियों में कुछ विदेशी नाम भी शामिल हैं। यह​ खिलाड़ी मोहम्मद लार्बी (3), एरिक पार्टालु (2), मोर्टाडा फॉल (2), मार्टिन चावेस (2) और डिमास डेलगाडो (2) हैं।