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EXCLUSIVE: PKL से हमारा कंपटीशन नहीं है, युवा कबड्डी सीरीज के आयोजक विकास गौतम ने दिया बड़ा बयान

Published at :January 27, 2024 at 07:30 PM
Modified at :January 27, 2024 at 07:30 PM
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Rahul Gupta


इस टूर्नामेंट का आयोजन एक साल में कई बार होता है।

प्रो कबड्डी लीग (PKL) का रोमांच इन दिनों अपने चरम पर है। हर एक दिन कई सारे ब्लॉकबस्टर मुकाबले खेले जा रहे हैं। पीकेएल का आयोजन जब होता है तो इसे बड़ी संख्या में लोग देखते हैं, क्योंकि भारत समेत दुनिया भर के दिग्गज खिलाड़ी इसका हिस्सा होते हैं। हालांकि, पीकेएल से इतर कबड्डी का एक और टूर्नामेंट है जो काफी तेजी से आगे जा रहा है और ये है युवा कबड्डी सीरीज।

बता दें इन दिनों पुद्दुचेरी में युवा कबड्डी सीरीज के विंटर संस्करण का आयोजन हो रहा है, जिसमें पूरे देश के कई सारे यंग प्लेयर्स हिस्सा ले रहे हैं। युवा कबड्डी सीरीज के आयोजक विकास गौतम ने खेल नाउ के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान इस टूर्नामेंट के बारे में कई सारे बड़े खुलासे किए।

युवा कबड्डी सीरीज शुरु करने का प्लान

युवा कबड्डी सीरीज का आगाज युवा खिलाड़ियों को मौका देने के लिए किया गया था। इसमें 20 साल तक के ही प्लेयर खेलते हैं। युवा कबड्डी सीरीज को लेकर आगे बात करते हुए इस सीरीज के आयोजक विकास गौतम ने और भी कई चीजों पर बयान दिया है।

उन्होंने कहा ” ये काफी लंबा सफर रहा है और हमारे लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। भारत में सबसे ज्यादा पॉपुलैरिटी क्रिकेट की है और बाकी खेल काफी पीछे हैं। खिलाड़ी तो हैं लेकिन उनके लिए वो प्लेटफॉर्म नहीं है। इसी वजह से हमने युवा कबड्डी सीरीज की शुरुआत करने का फैसला लिया।

सीनियर खिलाड़ियों के लिए पीकेएल का आगाज हो गया था लेकिन यंग प्लेयर के लिए कोई बड़ा प्लेटफॉर्म नहीं था। इसलिए हमने उनके लिए एक लॉन्चपैड बनाने का फैसला किया। हमने कई सारे राज्यों का दौरा किया लेकिन वहां पर जूनियर प्लेयर्स के लिए कोई प्रोफेशनल टूर्नामेंट नहीं थे। प्रोफेशनल टूर्नामेंट के बिना गेम आगे नहीं बढ़ सकता है। इसी वजह से हमने ये टूर्नामेंट शुरु किया।”

युवा कबड्डी सीरीज का मॉडल

युवा कबड्डी सीरीज एक साल में कई बार खेली जाती है और इसके हर एक संस्करण को अलग-अलग नाम दिया गया है। विंटर एडिशन, समर एडिशन और मॉनसून एडिशन इसे नाम दिया गया है। इस बारे में उन्होंने कहा “जब हमने 2022 में इस टूर्नामेंट का आगाज किया था तो वो जून का महीना था। हमने सोचा था कि साल में एक की बजाय कई सारे संस्करण आयोजित करेंगे और हर एक संस्करण को अलग-अलग अनोखा नाम देंगे। इसी वजह से मौसम के हिसाब से हमने अलग-अलग संस्करण को नाम दे दिया, जैसे समर, मॉनसून और विंटर तो इस तरह से हमने अलग-अलग संस्करण को नाम दिए।”

पीकेएल के साथ युवा कबड्डी सीरीज का कंपटीशन

देश में एक तरफ सीनियर खिलाड़ियों के लिए प्रो कबड्डी लीग है तो दूसरी तरफ युवा खिलाड़ियों के लिए युवा कबड्डी सीरीज है। हालांकि इस टूर्नामेंट के आयोजक का कहना है कि पीकेएल और युवा कबड्डी सीरीज के बीच कोई कंपटीशन ही नहीं है।

उन्होंने कहा “हमारे देश में युवाओं की कमी नहीं है और मोबाइल और इंटरनेट की वजह से हर समय लोग कंटेंट देखने लगे हैं। इसी वजह से हम दिन में कई सारे मैचों का आयोजन कराते हैं, ताकि जिसको जो देखना है वो मैच देखे। शाम को पीकेएल का आयोजन होता है लेकिन हम अपने ज्यादातर मैच दिन में ही करा लेते हैं और इसी वजह से उनसे कोई टकराव ही नहीं होता है।”

पीकेएल और युवा कबड्डी सीरीज का आपस में कोई संबंध नहीं है

युवा कबड्डी सीरीज के आयोजक ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि इस टूर्नामेंट का और पीकेएल का आपस में कोई भी लेना-देना नहीं है। वो पूरी तरह से अलग टूर्नामेंट है और ये अलग टूर्नामेंट है। उन्होंने कहा “प्रो कबड्डी लीग या मशाल स्पोर्ट्स के साथ हमारा कोई भी लिंक नहीं है। वो बिल्कुल अलग हैं और हम बिल्कुल अलग हैं। हमारे बीच कोई भी रिलेशनशिप नहीं है। हमने अंडर-20 बच्चों के लिए ये टूर्नामेंट बनाया है, जबकि पीकेएल सीनियर खिलाड़ियों के लिए है। हमें किसी भी एसोसिएशन या पीकेएल से कोई पैसे नहीं मिलते हैं। यहां तक कि हम किसी से भी पैसे नहीं लेते हैं।”

युवा कबड्डी सीरीज का बिजनेस मॉडल

किसी भी टूर्नामेंट के लिए जरूरी होता है कि वो पैसे किस तरह से कमाते हैं। उन्होंने बताया कि जब तक आप बड़े स्टार्स नहीं बनाएंगे, तब तक आप स्पॉन्सर्स को अपनी तरफ आकर्षित नहीं कर पाएंगे।

उन्होंने कहा “हम अभी भी बिजनेल मॉडल बना रहे हैं। हम अपनी तरफ से कुछ पैसे लगा रहे हैं और इन्वेस्टर्स के भी कुछ पैसे हैं। जब टूर्नामेंट के मैच कुछ प्लेटफॉर्म्स पर दिखाए जाते हैं तो हमें उसके पैसे मिलते हैं। कबड्डी के साथ दिक्कत ये है कि इसमें बड़े स्टार्स नहीं हैं, क्योंकि मैच ही उतने नहीं होते हैं। स्टार बनाने के लिए आपको उस खिलाड़ी को बार-बार स्क्रीन पर दिखाना होगा।

पीकेएल का अगर उदाहरण लें तो केवल एक ही खिलाड़ी शायद विज्ञापन कर रहा है, क्योंकि ये प्लेयर केवल पीकेएल के दौरान ही स्क्रीन पर दिखते हैं। इसी वजह से कबड्डी में हर महीने ऐसे मैच होने चाहिए जहां पर खिलाड़ी को लगातार दिखाया जाए और तब ही स्पॉन्सर आएंगे। स्टार प्लेयर्स ही स्पॉन्सर लेकर आते हैं और हमें ब्रॉन्ड बनाना होगा।”

PKL में खेल चुका खिलाड़ी युवा कबड्डी सीरीज में दोबारा खेल सकता है

युवा कबड्डी सीरीज में खेलने के बाद खिलाड़ी पीकेएल में भी जाकर खेलता है। यहां से उसको ये मोमेंटम मिल जाता है। हालांकि अगर वो चाहे तो पीकेएल में खेलने के बाद दोबारा इस टूर्नामेंट का हिस्सा बन सकता है।

उन्होंने कहा “इस वक्त पीकेएल में जितने भी खिलाड़ी खेल रहे हैं, उनमें से ज्यादातर यंग प्लेयर्स ने युवा कबड्डी सीरीज में खेला हुआ है। अगर ये खिलाड़ी पीकेएल में खेलकर वापस युवा कबड्डी सीरीज में खेलने के लिए आ रहे हैं तो फिर हमें काफी खुशी होगी। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि अगर वो नहीं आएंगे तो हम लोग दुखी हो जाएंगे।”

युवा कबड्डी सीरीज में कैसे मिलती है एंट्री?

कई सारे युवा खिलाड़ियों के मन में ये सवाल होगा कि अगर उन्हें युवा कबड्डी सीरीज में खेलना है तो फिर किस तरह से वो इसमें एंट्री पा सकते हैं। इस बारे में आयोजक ने बताया “हम लोग स्टेट एसोसिएशंस के पास जाते हैं और उनसे कहते हैं कि वो अपनी तरफ से युवा खिलाड़ियों को नॉमिनेट करें। इसके बाद सभी राज्य ट्रायल रन करते हैं और उनमें से 25-30 खिलाड़ियों का पूल तैयार करते हैं। इन प्लेयर्स का एक कैंप लगता है और वहां से खिलाड़ियों को युवा कबड्डी सीरीज के लिए नॉमिनेट किया जाता है। इसलिए स्टेट एसोसिएशंस के ट्रायल में जाना जरूरी है।”

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