स्टीफन कॉन्स्टेनटाइन और इगोर स्टीमाक में से कौन है ज्यादा बेहतर ?

2019 में क्रोएशिया के पूर्व खिलाड़ी को ब्लू टाइगर्स को आगे ले जाने की जिम्मेदारी मिली थी।
फीफा वर्ल्ड कप 2022 क्वालीफायर्स का सेकेंड राउंड खत्म हो गया है। वहीं अब टीम इंडिया के हेड कोच इगोर स्टीमाक का भी कॉन्ट्रैक्ट भी खत्म होने वाला है। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) उनके फ्यूचर को लेकर जल्द ही कोई फैसला ले सकता है।
इस बात की संभावना जताई जा रही है कि उनका कॉन्ट्रैक्ट और आगे बढ़ा दिया जाए। हालांकि, अगर आंकड़ों को देखें तो ये सही नहीं लगता है। उनकी कोचिंग में इंडियन टीम को मात्र दो ही मैचों में जीत मिली। बाकी मुकाबले या तो ड्रॉ रहे या फिर टीम को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा।
इगोर स्टीमाक को 2019 में स्टीफन कॉन्स्टेनटाइन की जगह ब्लू टाइगर्स का कोच बनाया गया था। एएफसी एशियन कप 2019 में टीम के बेहतरीन परफॉर्मेंस के बाद उम्मीदें काफी ज्यादा बढ़ गई थीं। लेकिन क्या कॉन्स्टेनटाइन जितनी सफलता स्टीमाक हासिल कर पाए। हम आपको इस आर्टिकल में बताते हैं।
स्टाइल ऑफ प्ले
स्टीफन कॉन्स्टेनटाइन की कोचिंग के दौरान इंडियन फैंस को उनके खेलने का अंदाज बिल्कुल पसंद नहीं था। भारतीय समर्थकों को उनकी रणनीति समझ में नहीं आती थी। भारत को रिजल्ट मिलते थे लेकिन वो उतने शानदार अंदाज में नहीं होते थे। ज्यादातर गोल या तो काउंटर अटैक या फिर सेट-पीसेज के जरिए आते थे।
हालांकि उनके तरीका जरूर काफी प्रभावशाली था। सबसे जरूरी बात ये है कि प्लेयर्स को उनकी रणनीति सूट करती थी। उनके कार्यकाल के दौरान आईएसएल नहीं था और ना ही इंडियन प्लेयर्स को मॉर्डन फुटबॉल के बारे में कोई जानकारी थी। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान भी प्लेयर्स से उनका बेस्ट निकलवालने के लिए स्टीफन कॉन्स्टेनटाइन को कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी।

अपने दूसरे कॉन्ट्रैक्ट के दौरान इंडिया ने स्टीफन की अगुवाई में कुल 43 मुकाबले खेले। इस दौरान टीम ने 75 गोल किए और 44 गोल खाए। वहीं इगोर स्टीमाक की कोचिंग में 15 मैचों में टीम ने सिर्फ ही 14 गोल किए जो काफी कम है। तीन ही बार टीम ने दो से ज्यादा गोल किए।
इंडियन टीम का कोच बनने के बाद स्टीमाक ने प्लेयर्स के खेलने के तरीके में बदलाव पर जोर दिया। उन्होंने ज्यादा पोजेशन बेस्ड अटैकिंग फुटबॉल खेलने का दावा किया। हालांकि वो इसे सही तरह से लागू नहीं कर पाए। केवल कुछ ही मैचों में भारतीय टीम ज्यादा पोजेशन अपने पास रख पाई।
टीम ज्यादातर मौकों पर डिफेंसिव ही रही और मुकाबले नहीं जीत सकी। इगोर स्टीमाक अभी तक बेस्ट स्टार्टिंग इलेवन का चयन भी नहीं कर पाए हैं और लगातार खिलाड़ियों को रोटेट कर रहे हैं। इससे टीम के परफॉर्मेंस पर काफी बुरा असर पड़ा है। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि स्टीमाक भारतीय टीम के खेलने के तरीके में सुधार करने में नाकामयाब रहे हैं।
रिजल्ट्स
फुटबॉल में आपके खेलने का तरीका चाहे जैसा भी हो आखिर में रिजल्ट के मायने काफी ज्यादा होते हैं। इस मामले में अगर तुलना करें तो वर्तमान कोच इगोर स्टीमाक पूर्व मैनेजर स्टीफन कॉन्स्टेनटाइन से काफी पीछे रह गए हैं। उनकी अगुवाई में टीम को 15 में से सिर्फ दो ही मैचों में जीत मिली है।
इनमें से एक जीत टीम को 2019 के किंग कप में थाइलैंड के खिलाफ मिली थी। वहीं दूसरी जीत टीम को दो साल बाद बांग्लादेश के खिलाफ हाल ही में मिली। जिन दोनों टीमों के खिलाफ टीम ने जीत हासिल की वो फीफा रैंकिंग में भारत से काफी पीछे हैं।

अन्य मुकाबलों की अगर बात करें तो फीफा वर्ल्ड कप क्वालीफायर्स में इंडियन टीम अफगानिस्तान को भी नहीं हरा पाई। वहीं ओमान के खिलाफ भी उन्हें जीत नहीं मिली। स्टीमाक की कोचिंग में टीम का जीत प्रतिशत केवल 13% है। वहीं कॉन्स्टेनटाइन के दूसरे कार्यकाल के दौरान इंडिया ने 43 में से 24 मुकाबले जीते थे और टीम का जीत प्रतिशत 55.8% था।
स्टीमाक के अंडर भारत ने ज्यादातर मुकाबले ड्रॉ खेले जबकि कॉन्स्टेनटाइन के दौरान टीम ने 43 में से केवल छह मैच ही ड्रॉ खेले थे। रिजल्टस के मामले में स्टीमाक टीम इंडिया को आगे नहीं ले जा पाए और कॉन्स्टेनटाइन से काफी पीछे रह गए।
स्टीफन कॉन्स्टेनटाइन की कोचिंग में इंडियन टीम ने बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। टीम ने 2018 में पहली बार फीफा वर्ल्ड रैंकिंग के टॉप 100 में जगह बनाई थी। अगस्त 2018 में भारतीय टम 96वें स्थान पर थी। जब वह गए तो उस वक्त भारतीय टीम 101वें पायदान पर थी। इस समय टीम 105वें स्थान पर है और उन्हें चार स्थान का नुकसान हुआ है। कॉन्स्टेनटाइन की तरह स्टीमाक टीम को टॉप 100 में नहीं ले जा सके।
कनक्लूजन
2019 में इगोर स्टीमाक को इंडियन फुटबॉल टीम को आगे ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उनका काम टीम के खेलने के तरीके में सुधार करना था लेकिन इसमें उन्हें काफी कम सफलता मिली।
स्टीमाक को अभी तक ज्यादा मैच नहीं मिले हैं ताकि वो अपनी आइडियल टीम बना सके लेकिन इसके बावजूद टीम में ज्यादा सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। कोविड की वजह से इंटरनेशनल फुटबॉल पर काफी असर पड़ा और प्लेयर्स की इंजरी की वजह से भी टीम का परफॉर्मेंस प्रभावित रहा।
स्टीमाक की अगुवाई में भारतीय टीम का प्रदर्शन खराब रहा है और इसी वजह से कई फैंस ने दोबारा कॉन्स्टेनटाइन को लाने की मांग की। इससे पता चलता है कि अभी कॉन्स्टेनटाइन के लेवल तक इगोर स्टीमाक नहीं पहुंच पाए हैं।
Sawan Gupta is a passionate sports enthusiast with a strong interest in cricket, hockey, badminton, and kabaddi. He supports RCB in the IPL and UP Yoddhas in the PKL, and admires PV Sindhu and Virat Kohli. Since 2017, Sawan has been writing sports articles, covering major events like the Pro Kabaddi League, Asian Games, Olympics, and various cricket tournaments.